CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग, भारत ने जताया ऐतराज

CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग, भारत ने जताया ऐतराज
एमपी में सियासी संकट-कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

UNHRC के हाई कमिश्नर ने भारत को जानकारी दी कि उन्होंने CAA के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह भारत का आंतरिक मामला है.

  • Share this:
नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) भारत के सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. यह जानकारी UNHRC के उच्चायुक्त ने भारत को दी है.  UNHRC के इस कदम पर भारत की तरफ से सख्त आपत्ति जताई गई है. इस मामले पर विदेश मंत्रालय का कहना है कि 'यह भारत का आंतरिक मामला है. किसी विदेशी पक्ष को भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर अदालत में जाने का अधिकार नहीं है.' इस संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार (Raveesh Kumar) ने कहा, 'जेनिवा में हमारे स्थायी मिशन को कल शाम UNHRC के उच्चायुक्त ने बताया कि उनके कार्यालय ने 2019 नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के संबंध में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया है.'

अपने आवेदन में UNHRC ने कहा है कि 'अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था 'सीएए' की आलोचना करती है. सीएए का कहना है कि मुस्लिम प्रवासियों को जोखिम में डालता है.' कहा गया है कि, सीएए के औचित्य और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं. कानून के तहत सभी को समानता दिये जाने की कसौटी पर भी सीएए एक बड़ा सवाल है.' UNHRC द्वारा दाखिल 12 पन्ने के आवेदन में कहा गया है कि ' CAA भारत के व्यापक मानवाधिकार दायित्वों और अंतरराष्ट्रीय के वचनों के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है.'

'हम सभी को अपनी स्वतंत्र न्यायपालिका पर पूरा भरोसा'
कुमार ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भारत का आंतरिक मामला है और कानून बनाने के लिए भारतीय संसद के संप्रभु अधिकार है. हम दृढ़ता से मानते हैं कि किसी भी विदेशी शक्ति के पास भारत की संप्रभुता से संबंधित मुद्दों पर कोई नियंत्रण नहीं है.'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि, 'हम इस बात पर अडिग हैं कि सीएए संवैधानिक रूप से मान्य है और हमारे संवैधानिक मूल्यों की सभी आवश्यकताओं का अनुपालन करता है. यह भारत के विभाजन की त्रासदी के बाद पैदा हुए मानवाधिकारों के मुद्दों के संबंध में हमारी लंबे समय से चली आ रही राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का परिणाम है.' उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां कानून का शासन है. हम सभी को अपनी स्वतंत्र न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. हमें पूरा यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर हमारा मजबूत वैधानिक पक्ष सही साबित होगा.'



यह भी पढ़ें: दिल्ली हिंसा: लापरवाही का जिम्मेदार कौन? गृह मंत्रालय ने पुलिस से तलब की रिपोर्ट
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading