Budget 2019 त्वरित टिप्पणी: हवा की ओट लेकर चिराग जलाने की है सीतारमण की तैयारी

मोदी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ दूसरी बार भी सत्ता में आई है, तो इसमें गांव के गरीब-गुरबों और किसानों की बड़ी भूमिका है. इसलिए बजट में इनके हित का खास ध्यान रखा गया है .

Brajesh Kumar Singh, Group Consulting Editor | News18Hindi
Updated: July 5, 2019, 2:59 PM IST
Budget 2019 त्वरित टिप्पणी: हवा की ओट लेकर चिराग जलाने की है सीतारमण की तैयारी
मोदी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ दूसरी बार भी सत्ता में आई है, तो इसमें गांव के गरीब-गुरबों और किसानों की बड़ी भूमिका है. इसलिए बजट में इनके हित का खास ध्यान रखा गया है .
Brajesh Kumar Singh, Group Consulting Editor
Brajesh Kumar Singh, Group Consulting Editor | News18Hindi
Updated: July 5, 2019, 2:59 PM IST
नरेंद्र मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान देश में निवेश का माहौल बेहतर करने के साथ ही आधारभूत सुविधाओं के विकास और टैक्स की असरदार ढंग से वसूली कर गांव, गरीब और किसानों का जीवन बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़ने वाली है. देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के तौर पर निर्मला सीतारामन के पहले बजट से यही संकेत मिल रहा है. साम्यवादी सोच वाली यूनिवर्सिटी जेएनयू से अर्थशास्त्र में एमए करने के बावजूद सीतारामण के लिए न तो निजी पूंजी और निवेश अछूत है और न ही भारतीय परंपराओं और संतो की वाणी से निकले संदेश. अपने दो घंटे सात मिनट के पहले बजट भाषण के दौरान सीतारामण ने यही संकेत दिया.

मुख्य तौर पर अंग्रेजी में दिये गये इस भाषण में सीतारामण ने चाणक्य, रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद और गांधी से लेकर भगवान वश्वेश्वर और तमिलनाडु में संगम काल के दौरान रचे गये महत्वपूर्ण ग्रंथ पूर्णानुरू का भी जिक्र किया. आखिर सीतारामण उस कर्नाटक से राज्यसभा में आती हैं, जहां के लिए भगवान वश्वेश्वर आराध्यदेव हैं, तो तमिल ग्रंथ का जिक्र अपनी जड़ से जुड़ने की कोशिश भी है, सीतारामण तमिल माता-पिता की संतान जो हैं.

1990 तक बजट भाषण सूखे और अपेक्षाकृत संक्षिप्त होते थे, लेकिन पीवी नरसिंह राव के समय में वित्त मंत्री बने मनमोहन सिंह ने बजट भाषण में उर्दू शायरी के समावेश की परंपरा शुरु की, जिसे आगे चलकर पी चिदंबरम ने तमिल काव्य ग्रंथों को उद्धृत कर आगे बढ़ाया, तो यशवंत सिन्हा और अरूण जेटली ने हिंदी की कविताएं डालकर. उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सीतारामन ने जहां कई ग्रंथों और नारी तू नारायणी जैसे सूक्तों को उद्धृत किया, तो दो घंटे से अधिक के अपने भाषण के दौरान उर्दू का एक शेर भी पढ़ डाला – यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है.

अर्थव्यस्था की रफ्तार बढ़ाने वाला बजट

दरअसल इस शेर को पढ़ने वाली निर्मला सीतारामन को उम्मीद है कि 2019-20 का ये बजट अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ाएगा, जिससे आखिरकार भारत पांच ट्रिलियर डॉलर वाली इकोनॉमी में तब्लील हो जाएगा, जिस अर्थव्यवस्था का मौजूदा आकार दो ट्रिलियन डॉलर का है. सीतारामण ने इस साल के अंत तक इसे तीन ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तो रखा ही है.

आखिर ये लक्ष्य हासिल कैसे होगा, वित्त मंत्री ने इसका रोडमैप भी तैयार किया है. सबसे अधिक भार तो आधारभूत सुविधाओं के विकास पर है, खास तौर पर हर किस्म की परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करने की जल, थल और नभ तीनों ही स्तर पर. सागरमाला का दायरा बढ़ाकर समुद्र रास्ते से होने वाले व्यापार को बढ़ाना है, तो नदियों में परिवहन व्यवस्था विकसित कर देश के अंदर उत्पन्न होने वाले उत्पादों की अंतिम लागत को कम करने का, ताकि वो आयाती उत्पादों के मुकाबले आ सकें.


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चहुंमुखी विकास की योजना
गांव से लेकर शहर तक, हाईवे से लेकर ग्रामीण सड़क तक, इन सबको और विस्तृत करने की योजना है, तो रेल के ढांचे के विस्तार की भी योजना है, जिसके लिए निजी पूंजी को भी डालने के लिए तैयार हो गई है सरकार यानी पब्लिक-प्राइवेट सहयोग से रेल का ढांचा मजबूत किया जाएगा. हवाई मोर्चे पर न सिर्फ उड़ान को आगे लेकर जाने की बात है, बल्कि एमआरओ सुविधाओं का हब बनाकर विमानों के रखरखाव और मरम्मत के बड़े बाजार पर कब्जा करने की नीयत भी.

मोदी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ दूसरी बार भी सत्ता में आई है, तो इसमें गांव के गरीब-गुरबों और किसानों की बड़ी भूमिका है. इसलिए बजट में इनके हित का खास ध्यान रखा गया है . भारत गांवों में बसता है या फिर महात्मा गांधी के अंत्योदय को ध्यान में रखते हुए, आजादी के 75 साल पूरा होने के वर्ष यानी 2022 में हर घर तक बिजली और गैस पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. यही नहीं, इस वित्त वर्ष के दौरान करीब एक करोड़ 95 लाख घर हाउसिंग फॉर ऑल योजना के तहत देने का लक्ष्य भी रखा गया है. मछुआरों की चिंता की गई है, तो किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ ही छोटे दुकानदारों का भी पेंशन के जरिये ध्यान रखा गया है. स्वच्छ भारत मिशन, जल शक्ति और डिजिटल इंडिया, ये तीनों भी सरकार के फोकस में हैं, इसके लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, मसलन भारतनेट, जिसके तहत हर पंचायत को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाना है.

उजाला योजना के तहत एलईडी बल्ब लगाकर बड़े पैमाने पर बचत करने करने वाली केंद्र सरकार ने अब ई-मिशन पर बड़े पैमाने पर काम शुरु करने की सोची है. मसलन सामान्य डीजल-पेट्रोल गाड़ियों की जगह ई-व्हीकल के इस्तेमाल के लिए लोगों को प्रेरित करना या फिर इसके लिए करों में छूट देना. इसी के तहत ऐसे गाड़ियों की खरीद पर लिये गये कर्ज में डेढ़ लाख रुपये सालाना ब्याज को करमुक्त करने की बात की गई है.

एनबीएफसी सेक्टर पर सरकार का फोकस

बैंकों के एनपीए को कम करने में कामयाबी हासिल करने वाली सरकार अब एनबीएफसी सेक्टर की हालत ठीक करने की तैयारी करती भी दिख रही है. यही नहीं, नये उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए भी छूट की व्यवस्था की गई है. जहां तक मध्यमवर्ग का सवाल है, उसके लिए आयकर में कोई नई छूट तो नहीं दी गई है, लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग को प्रोत्साहित करने के तहत घर खरीदने के लिए पैंतालीस लाख रुपये तक लिये गये कर्ज पर ब्याज में डेढ लाख रुपये की अतिरिक्त छूट देने की घोषणा की गई है. मध्यम वर्ग के सामने धनी वर्ग से ज्यादा टैक्स वसूली की योजना बना ली है सरकार ने, इसी के तहत 2 से पांच करोड़ रुपये सालाना की कमाई करने वालों से जहां तीन फीसदी तो पांच करोड़ से ज्यादा आमदनी वालों से सात फीसदी सेस लेनी की तैयारी है.



डिजिटल पेंमेंट को प्रोत्साहित करने पर जोर 

जहां तक अर्थव्यवस्था से काले धन को खत्म करने का सवाल है, सरकार इसके लिए एक तरफ डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहित कर रही है, तो दूसरी तरफ नकदी के इस्तेमाल को हतोत्साहित. ऐसे में अगर एक साल के अंदर कोई एक करोड़ रुपये से ज्यादा नकदी निकालता है, तो उसे दो फीसदी टीडीएस देने की तैयारी कर लेनी होगी.

तमाम पहलुओं को देखते हुए इस बजट का संदेश साफ है, टैक्सचोरी को रोकना, निवेश का माहौल बेहतर करना, गांव, गरीब और किसान की चिंता करना और तमाम योजनाओं के जरिये देश की अर्थव्यवस्था में आशा, उत्साह, विश्वास और आकांक्षा का माहौल पैदा करना. जाहिर है, इनको जमीन पर उतारने में मोदी सरकार और वित्त मंत्री के तौर पर निर्मला सीतारामण की असली परीक्षा है, जो शायराना अंदाज में हवा की ओट लेकर भी चिराग जलाने की हिम्मत दिखा रही हैं.

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First published: July 5, 2019, 2:06 PM IST
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