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स्वास्थ्य मंत्रालय का अध्ययन, देश में करीब 7.5 करोड़ बुजुर्ग पुरानी बीमारियों से पीड़ित

अध्ययन की शुरूआत केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय (Health Ministry) ने 2016 में की थी.
अध्ययन की शुरूआत केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय (Health Ministry) ने 2016 में की थी.

स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) की ओर से कराए जा रहे अध्ययन में भारत के साठ साल से अधिक आयु के करीब 10.3 करोड़ लोगों में उम्र संबंधी बदलावों और बीमारियों के प्रभावों का अध्‍ययन किया जाना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2021, 11:44 PM IST
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नई दिल्ली. बुजुर्गों की सेहत पर आधारित दुनिया की सबसे बड़ी स्‍टडी 'द लांगिटुडिनल एजिंग स्‍टडी इन इंडिया' (Longitudinal Aging Study in India) के पहले चरण में प्रकाशित नतीजों के मुताबिक भारत में रहने वाले करीब साढ़े सात करोड़ बुजुर्ग पुरानी बीमारियों से पीड़ित हैं. 60 साल या उससे अधिक आयु वर्ग के हर दो में से एक व्‍यक्ति अलग-अलग अक्षमताओं का शिकार है. अध्ययन कहता है कि बुजुर्गों की आबादी का 40 फीसद किसी न किसी प्रकार की अक्षमता से और करीब 20 फीसदी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं. दूसरी ओर 27 फीसद बुजुर्ग कई प्रकार के रोगों से जूझ रहे हैं, जिनकी संख्‍या करीब 3.5 करोड़ हो सकती है.

सर्वे के अनुसार करीब 4.5 करोड़ लोगों को हृदय रोग और तनाव की समस्या है, तो करीब 2 करोड़ लोगों को डायबिटीज की बीमा‍री है. करीब 24 फीसद बुजुर्ग अपने रोजमर्रा के काम जैसे चलना, खाना और नित्‍यकर्म आदि करने में तकलीफ महसूस करते हैं. यह जानकारी सर्वे के लिए नोडल संस्‍थान 'द इंटरनेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेस मुंबई' के डायरेक्‍टर केएस जेम्‍स ने दी.

जेम्‍स ने कहा, "यदि ऐसा सोचा जाए कि इन बुजुर्गों में से 90 फीसदी की उनके घरों में ही देखभाल की जाए तो भी 10 फीसदी लोगों को प्रोफेशनल मदद की जरूरत होगी. भविष्‍य में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के बारे में कल्‍पना कीजिए कि आखिर कितने लोगों को प्रशिक्षण देने की जरूरत है, ताकि अपने देश के बुजुर्गों की देखभाल की जा सके."



अध्ययन की शुरूआत केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय (Health Ministry) ने 2016 में की थी. इसमें हार्वर्ड टीएच चान स्‍कूल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ और यूनिवर्सिटी ऑफ दक्षिणी कैलीफोर्निया जैसे संस्‍थान सहयोगी बने. अध्ययन में भारत के साठ साल से अधिक आयु के करीब 10.3 करोड़ लोगों में उम्र संबंधी बदलावों और बीमारियों के प्रभावों का अध्‍ययन किया जाना है. सर्वे का एक पहलू ये भी है कि दुनिया भर में लोगों की उम्र बढ़ रही है. इसका प्रभाव है कि 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्‍या 1990 में 9.2 प्रतिशत थी और 2013 में यह 11.7 फीसद हो गई. 2050 तक इसके 21.1 फीसद होने की उम्‍मीद है.
स्‍टडी की शुरूआत के समय भारत में 35 साल की आयु वाले लोगों की संख्या कुल जनसंख्‍या का 65 प्रतिशत था. अनुमान है कि 2050 तक भारत में करीब 35 करोड़ लोगों की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो जाएगी. ऐसे में सरकार बुजुर्गों में होने वाली समस्‍याओं के बारे में अध्‍ययन कर रही है, ताकि उनका समाधान किया जा सके. भारत में उम्रदराज लोगों की बात करें तो 2011 में 60 वर्ष की आयु वाले 9 प्रतिशत लोग थे, जो 2050 में बढ़कर 20 फीसदी हो जाएंगे.

इस अध्‍ययन में 45 वर्ष या उससे अधिक के 72,250 लोगों को शामिल किया गया, जबकि 60 साल की आयु वाले लोगों की संख्या 31,464 रही और 75 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले 6,749 लोगों को पैनल सैंपल में जगह मिली.

नेशनल हेल्‍‍थ मिशन की डायरेक्‍टर वंदना गुरनानी ने कहा कि अध्‍ययन से प्राप्‍त निष्‍कर्षों के आधार पर योजना बनाई जाएगी, ताकि देश में बुजुर्गों की बेहतर देखभाल हो सके.
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