मेडिकल ऑक्सीजन पर केंद्र का बड़ा फैसला, 9 सेक्टरों को छोड़ 22 अप्रैल से उद्योगों को सप्लाई बंद

रेलवे देशभर में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलिंडरों की आपूर्ति के लिये अगले कुछ दिन में 'ऑक्सीजन एक्सप्रेस' चलाएगा. PTI

रेलवे देशभर में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलिंडरों की आपूर्ति के लिये अगले कुछ दिन में 'ऑक्सीजन एक्सप्रेस' चलाएगा. PTI

Prohibit Supply of Oxygen for Industrial Purposes: गृह सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि ऑक्सीजन की गैर जरूरी औद्योगिक उद्देश्यों के लिए सप्लाई को रोकें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 18, 2021, 10:01 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला (Ajay Bhalla) ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कहा है कि अगर बहुत जरूरी ना हो तो औद्योगिक उद्देश्यों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई को रोकें, सिर्फ छूट प्राप्त सेवाओं के लिए ही सप्लाई को अनुमति दें. दूसरी ओर केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने एएनआई से बातचीत में कहा कि 22 अप्रैल से 9 सेक्टरों को छोड़कर ऑक्सीजन की इंडस्ट्रियल सप्लाई बंद रहेगी. गोयल ने कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त मेडिकल सप्लाई जारी रखने के लिए ऐसा किया गया है.

'15 अप्रैल को 4,795 MT मेडिकल ऑक्सीजन की खपत'

गोयल ने कहा, "कोरोना से पहले भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की खपत 1000 से 1200 मीट्रिक टन थी. लेकिन, 15 अप्रैल को देश में 4,795 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की खपत हुई है. पिछले एक साल से देश में मेडिकल ऑक्सीजन की उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा रहा है." उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को 1500 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई की जाएगी. दिल्ली को 350 मीट्रिक टन और उत्तर प्रदेश को 800 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई होगी.

'ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेन चलाने की तैयारी'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 12 राज्यों के साथ मीटिंग के बाद केंद्र ने फैसला लिया है कि 6177 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई विभिन्न राज्यों में की जाएगी. केंद्रीय रेल मंत्री ने कहा कि राज्यों में ऑक्सीजन की निर्बाध सप्लाई के लिए ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेन चलाने की तैयारी है, जिसके लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है.

'कोरोना को काबू करने की जिम्मेदारी राज्यों की'

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दो टूक शब्दों में कहा, "कोरोना वायरस पर काबू की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की हैं. इसलिए राज्य सरकारों को मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड को नियंत्रण में रखना होगा. सप्लाई के साथ मांग को भी नियंत्रण में रखने की जरूरत है. गोयल ने कहा, "अगर इसी तरह लगातार संक्रमण के मामले बढ़ते रहे तो देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी. हम राज्य सरकारों के साथ हैं, लेकिन उन्हें डिमांड का प्रबंधन करने की जरूरत है और कोरोना पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे."



रेलवे दौड़ाएगी 'ऑक्सीजन एक्सप्रेस'

दूसरी ओर रेलवे ने देशभर में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलिंडरों की आपूर्ति के लिये अगले कुछ दिन में 'ऑक्सीजन एक्सप्रेस' चलाएगा. देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में जबरदस्त वृद्धि के चलते मेडिकल ऑक्सीजन की मांग बढ़ गई है. अधिकारियों ने कहा कि खाली टैंकर विशाखापत्तनम, जमशेदपुर, राउरकेला और बोकारो से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन भरने के लिये सोमवार को मुंबई और उसके आसपास कलमबोली और बोइसर स्टेशनों से चलेंगे.

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सरकारों ने इससे पहले रेलवे से पूछा था कि क्या उसके रेल नेटवर्क के जरिये लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंकरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है. दोनों राज्य सरकारों के अनुरोध पर रेलवे ने तुरंत लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आवाजाही के लिये तकनीकी पहलुओं पर विचार करना शुरू कर दिया था.

एक अधिकारी ने कहा, ''19 अप्रैल को खाली टैंकर चलेंगे, लिहाज हम अगले कुछ दिन में ऑक्सीजन एक्सप्रेस अभियान शुरू होने की उम्मीद करते हैं. जहां कहीं मांग होगी, हम वहां ऑक्सीजन भेज सकेंगे. ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों के तीव्र संचालन के लिये ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है.'' लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की ढुलाई से संबंधित मुद्दों पर 17 अप्रैल को रेलवे बोर्ड के अधिकारियों, राज्य परिवहन आयुक्तों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी.

रेल मंत्रालय ने कहा, ''टैंकर हासिल करने और लोड करके उन्हें वापस भेजने की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय रेलवे केन्द्रों को निर्देश जारी किये गए हैं. विशाखापत्तनम, अंगुल और भिलाई में रैंप तैयार किये जा चुके हैं. कलमबोली में पहले से मौजूद रैंप को मजबूत बनाया जा रहा है.'' मंत्रालय ने कहा, ''कलमबोली रैंप 19 अप्रैल तक तैयार हो जाएगा. अन्य स्थानों पर भी टैंकरों के पहुंचने से पहले रैंप तैयार हो जाएंगे.''

औद्योगिक कंपनियां भी कर रहीं ऑक्सीजन की सप्लाई

टाटा स्टील ने रविवार को घोषणा की कि वह कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिये विभिन्न राज्य सरकारों और अस्पतालों को दैनिक आधार पर 300 टन चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रही है. टाटा स्टील ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘देश की जरूरत को ध्यान में रखते हुए, हम विभिन्न राज्य सरकारों और अस्पतालों को रोजाना 200-300 टन तरल चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं. हम कोरोना की रोकथाम के लिये जारी अभियान में साथ हैं और निश्चित रूप से इससे पार पांएगे.’’

निजी क्षेत्र की जेएसपीएल ने भी कहा कि वह अपने अंगुल (ओड़िशा) और रायगढ़ (छत्तीसगढ़) स्थित कारखानों से 50 से 100 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रही है. इससे पहले, सार्वजनिक क्षेत्र की सेल ने शनिवार को ट्विटर पर लिखा था, ‘‘सेल ने अपने एकीकृत इस्पात कारखाने बोकारो (झारखंड), भिलाई (छत्तीसगढ़), राउरकेला (ओड़िशा), दुर्गापुर और बर्नपुर (पश्चिम बंगाल) से कोविड मरीजों के उपचार के लिये 99.7 प्रतिशत शुद्धता वाले 33,300 टन तरल चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति की है.’’



आर्सेलर मित्तल निप्पन स्टील इंडिया लि. (एएमएनएस इंडिया) ने कहा कि वह गुजरात में स्वास्थ्य केंद्रों को प्रतिदिन 200 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रही है. पेट्रोलियम और इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने को लेकर शुक्रवार को मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी. इस्पात मंत्रालय के अनुसार इस्पात कारखानों में 28 ऑक्सीजन संयंत्र हैं. ये संयंत्र सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में स्थित हैं, जो प्रतिदिन 1,500 टन चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं.
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