गाजियाबाद की घटना से सीखे ट्विटर, भारत में दोहरे मापदंड नहीं चलेंगेः रविशंकर प्रसाद

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ये बीजेपी बनाम ट्विटर का मुद्दा नहीं है. मुद्दा सिर्फ एक ही है... कानून का पालन नहीं करना. फाइल फोटो

Union Minister Ravi Shankar Prasad ने आरोप लगाया कि ट्विटर ने गाजियाबाद की तस्वीरों को मैनिपुलेटेड क्यों नहीं कहा? 26 जनवरी को लाल किले पर जो हुआ ट्विटर ने आज तक उसे मैनिपुलेटेड नहीं माना.

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नई दिल्ली. गाजियाबाद में एक फैब्रिकेटेड वीडियो के ट्विटर पर वायरल होने के बाद बवाल उठ खड़ा हुआ है. यूपी सरकार ने सिर्फ दोषियों के खिलाफ ही नहीं बल्कि ट्विटर पर भी वैमनस्य बढ़ाने का मुकदमा दर्ज कर लिया है. केन्द्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद का मानना है कि केन्द्र सरकार के बनाए दिशा निर्देशों को नहीं मानना ही मध्यस्थता के नाम पर दोहरा मापदंड रखने वाली ट्विटर जैसी कंपनियों को कानूनी प्रक्रिया में फंसना पड़ा है. न्यूज18 इंडिया के राजनीतिक संपादक अमिताभ सिन्हा के साथ खास इंटरव्यू में रविशंकर प्रसाद ने बताया कि 25 मई को दिशानिर्देश पालने करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी गुडविल के नाम पर आखिरी नोटिस ट्विटर जैसी कंपनियों को भेजा गया था. लेकिन, ट्विटर टालमटोल करता रहा. इसलिए गाजियाबाद में उनकी ये स्थिति सरकार के कारण नहीं बल्कि कानून के हिसाब से आयी है.

रविशंकर प्रसाद ने न्यूज18 को कहा कि भारत की कंपनियां भी अमरीका में काम करती हैं, लेकिन वहां के कानून का पालन करती हैं. लेकिन, जब ट्विटर जैसी कंपनियां व्यापार भी करती हैं और यहां के कानूनों का पालन भी नहीं करना चाहती हैं तो ये दोहरा मापदंड नहीं है तो और क्या है? रविशंकर ने सोशल मीडिया कंपनियों को कहा, "आप भारत में काम कीजिए, मोदी की आलोचना कीजिए, रविशकर प्रसाद की आलोचना कीजिए, लेकिन भारत के संविधान को मानना ही पड़ेगा. असम में बीजेपी जीतती है और बंगाल में हार जाती है. आजाद न्यायपालिका है, आजाद प्रेस है. ये मुनाफा कमाने वाली कंपनी हमें अमरीका में बैठ कर लोकतंत्र का ज्ञान नहीं दे."

'मुद्दा एक है; कानून का पालन नहीं करना'
रविशंकर प्रसाद ने बताया कि ये सोशल मीडिया कंपनियां एक प्लेटफार्म हैं और उनका अपना कोई विचार नहीं हैं. आपके प्लेटफार्म पर इसे इस्तेमाल करने वाले अपने विचार रखते हैं. लेकिन अगर सोशल मीडिया कंपनियां स्वयं निर्णय करने लगें कि क्या जाएगा या क्या नहीं जाएगा या फिर क्या मैनिपुलेटेड है तो फिर उन पर सवाल उठेंगे ही. रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि ट्विटर ने गाजियाबाद की तस्वीरों को मैनिपुलेटेड क्यों नहीं कहा? अमरीका के कैपिटल हिल पर जो हुआ उसे मैनिपुलेटेड कहा और वहां के ट्वीट ब्लॉक कर दिए लेकिन 26 जनवरी को लाल किले पर जो हुआ उसे ट्विटर ने आज तक मैनिपुलेटेड नहीं माना. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम ये अपेक्षा नहीं करते कि ट्विटर भारत सरकार से कंप्लायंस करे, ये मुद्दा सरकार बनाम ट्विटर नहीं है, ये बीजेपी बनाम ट्विटर भी नहीं है. मुद्दा सिर्फ एक ही है... कानून का पालन नहीं करना.

'ट्विटर पर बैन क्यों नहीं'
नाइजीरिया ने ट्विटर को बैन कर दिया. ऐसे में कई लोग सवाल उठाने लगे हैं कि आखिर मोदी सरकार ट्विटर क्यों नही बंद कर देती? ऐसे में रविशंकर प्रसाद ने ये बात साफ कर दी कि मोदी सरकार बंद करने में विश्वास नहीं करतीं. ये लोकतंत्र है. सरकार चाहती है कि कंपनियां आएं, मुनाफा कमाएं, लेकिन सवाल यही उठता है कि आखिर ये सोशल मीडिया कंपनियां भारत का कानून क्यों नहीं मानेगी? रविशंकर प्रसाद ने उन विरोधियों को भी आड़े हाथों लिया जो कह रहे हैं कि इसका भारत के बिजनेस साख पर असर पड़ेगा. प्रसाद ने कहा कि ये वही लोग हैं जो कभी कहते हैं कि देश में बोलने की आजादी है. भारत एक बहुत बड़ा बाजार भी है. ये तमाम कंपनियां आएं और काम करें. ये इंस्ट इंडिया कंपनी जैसी हरकत हम बर्दाश्त नहीं करेंगे कि व्यापार भारत में हो और सारा पैसा अमरीका चला जाए. रविशंकर प्रसाद ने दो टूक कहा कि भारत पीएम मोदी की अगुवाई में डिजिटल संप्रभुता से कभी समझौता नहीं करेगा.

'निजता के अधिकार का पूरा सम्मान'
ट्विटर की चुटकी लेते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सिर्फ एक नोडल अफसर, एक ग्रिवांस अफसर की नियुक्ति के लिए क्या उन्हें यूपीएससी की परीक्षा लेनी पड़ेगी. देश में कहीं ना कहीं सवाल जरूर उठेगा. ट्विटर ने अपनी सफाई में कहा है कि उनके कंसल्टेंट कहते हैं कि जब तक भारत में एक दफ्तर नहीं बना लें यहां एक कंप्लायंस अफसर नियुक्त नहीं कर सकते. रविशंकर प्रसाद कहते हैं कि ये कहां का तर्क है. सरकार निजता के अधिकार का पूरा सम्मान करती हैं. हम क्या खाते हैं, क्या पहनते हैं, आपकी आमदनी, आपके बच्चों की प्राइवेसी ये निजता होती हैं. मंत्री बनते हैं तो हर ब्यौरा देना पड़ता हैं. तब कहां चली जाती है प्राइवेसी. ऐसी जमात पर कटाक्ष करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वो लोग जो पहले जो राइट टू इंफार्मेशन की वकालत करते थे, वो आज राइट टू प्राइवेसी की मांग कर रहे हैं.

'बताना पड़ेगा, किसने की खुराफात'
केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि सरकार सिर्फ ऐसा चाहती हैं कि ऐसे संदेश जो वायरल हो गए हैं, जिसके कारण दंगा फैला, महिला को गलत तरीके से दिखाया. इसके बारे में बताना पड़ेगा कि किसने शुरुआत की. अगर विदेश से आया मैसेज तो उसे बताना पड़ेगा कि भारत में किसने खुराफात की. हम देश के व्हाट्स ऐप पर चैट करने वालों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनकी प्राइवेसी का कोई उल्लंघन नहीं होगा. गाजियाबाद केस की पुलिस जांच पर कुछ नहीं कहना है. इस घटना से ट्विटर को सीखना है कि अगर आप कोई मानदंड ले कर चलते हैं तो ये दोहरा मापदंड नहीं है तो और क्या है? उन्होंने कहा, "मैं ट्विटर से कहना चाहता हूं कि भारत में व्यापार कीजिए, लेकिन यहां के संविधान और कानून का भी सम्मान कीजिए."

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