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कृषि कानूनः सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा, कहा- कानून वापसी की मांग स्वीकार्य नहीं

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि कानून वापसी की मांग जायज नहीं है. (फाइल फोटो)
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि कानून वापसी की मांग जायज नहीं है. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) मंगलवार को कृषि कानून (Farm Laws) और किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) के मुद्दे पर अपना अंतरिम आदेश सुनाएगा. इससे पहले केंद्र सरकार ने कोर्ट हलफनामा दायर किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 11, 2021, 11:04 PM IST
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नई दिल्ली. कृषि कानून और किसानों के प्रदर्शन पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसला सुनाने से पहले केंद्र सरकार ने शीर्ष कोर्ट में हलफनामा दायर किया है. हलफनामे में कहा गया है कि तीनों नए कृषि कानूनों को बड़े पैमाने पर देश भर में समर्थन मिला है और कुछ किसान और अन्य लोग इसका विरोध कर रहे हैं. इनकी मांग है कि कृषि कानून को वापस लिया जाए, जोकि ना तो जायज और ना ही स्वीकार्य योग्य है. सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये साफ कर दिया कि वो फिलहाल कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगाना चाहते हैं. कोर्ट का मकसद है कि किसानों द्वारा की गई घेराबंदी को जल्द खत्म किया जाए और उसमें कोई हिंसा न हो.

इससे पहले सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों के विरोध प्रदर्शन से निबटने के तरीके पर केन्द्र को आड़े हाथ लिया और कहा कि किसानों के साथ उसकी बातचीत के तरीके से वह ‘बहुत निराश’ है. कोर्ट ने कहा कि इस विवाद का समाधान खोजने के लिये वह अब एक समिति गठित करेगा. जो कि दोनों पक्षों से बातचीत कर कोई बीच का रास्ता निकालेगी.

शीर्ष अदालत ने कहा कि बातचीत सकारात्मक हो इसके लिए जरूरी है कि फिलहाल तीनों कृषि कानून लागू न हो. इससे किसान संगठन बेहतर तरीके से बात कर पाएंगे और जब तक कोई समाधान नहीं निकलता तब तक आंदोलन को कहीं और शिफ्ट किया जा सकेगा. किसानों के प्रदर्शन में किसी भी तरह कि हिंसा होती है तो इसके लिए सभी जवाबदेह होंगे. हालांकि केंद्र सरकार कानून पर रोक लगाए जाने के हक में नहीं है.



सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के वकीलों को जिम्मेदारी दी कि वह किसान नेताओं से बात कर कोर्ट को भरोसा दिलाएं की अगर कृषि कानून पर रोक लगा दी जाती है तो प्रदर्शन को कहीं और शिफ्ट किया जाएगा. दिल्ली की घेराबंदी और रोड ब्लॉकेज ख़त्म किया जायगा. औरतों और बुजुर्गों को भी प्रदर्शन से दूर रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि प्रदर्शन साथ-साथ चल सकते हैं, लेकिन रास्ता साफ करना होगा. आम लोगों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.
किसानों के वकील मंगलवार को कोर्ट को बताएंगे कि किसान इस पेशकश पर क्या सोचते हैं. सुप्रीम कोर्ट एक कमेटी का गठन करना चाहता है, जिसके लिए दोनों पक्षों से नाम मांगा गया है. कमेटी दोनों पक्षों से बात कर सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट देगी कि मसले का क्या हल हो सकता है.

चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए यहां तक संकेत दिया कि अगर सरकार इन कानूनों का अमल स्थगित नहीं करती है तो वह उन पर रोक लगा सकती है. पीठ ने कहा कि हम पहले ही सरकार को काफी वक्त दे चुके हैं.

पीठ ने कहा, ‘‘मिस्टर अटॉर्नी जनरल, हम पहले ही आपको काफी समय दे चुके हैं, कृपया संयम के बारे में हमें भाषण मत दीजिये.’’
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