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केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में मौसम विज्ञान विभाग के केंद्र की शुरुआत

लद्दाख के द्रास में तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है और हर साल औसतन 10 सेंटीमीटर बारिश होती है (फाइल फोटो)
लद्दाख के द्रास में तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है और हर साल औसतन 10 सेंटीमीटर बारिश होती है (फाइल फोटो)

IMD: लेह का मौसम विज्ञान केंद्र 3500 मीटर की ऊंचाई पर है और यह भारत में सबसे ऊंचाई पर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र होगा.

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नई दिल्ली. केंद्र शासित क्षेत्र लद्दाख (Ladakh) में मंगलवार को मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Department) के एक केंद्र का उद्घाटन किया गया. इससे स्थानीय स्तर पर मौसम की जानकारी मिलेगी और क्षेत्र में मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूती मिलेगी. पृथ्वी विज्ञान मंत्री हर्षर्वधन ने केंद्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह केंद्र भारत में सबसे ऊंचाई पर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र है. यह केंद्र 3,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.

मंत्री ने कहा कि इस केंद्र के जरिए केंद्रशासित क्षेत्र के दो जिलों-लेह और करगिल के लिए मौसम संबंधी लघु अवधि (तीन दिनों), मध्यम अवधि (12 दिनों) और दीर्घावधि (एक महीने) अनुमान जारी किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि मौसम, जलवायु, संस्कृति, भौगोलिक स्थान के कारण यह विशिष्ट स्थान है, जहां द्रास में तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है और हर साल औसतन 10 सेंटीमीटर बारिश होती है. लद्दाख में बादल फटने, अचानक बाढ़, हिमस्खलन जैसी घटनाओं का भी सामना करना पड़ता है.

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भारत में सबसे ऊंचाई पर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र
हर्षवर्धन ने कहा, ‘‘ऐसे कठिन मौसम के कारण भविष्य में नुकसान को कम करने के लिए भारत सरकार ने लद्दाख में मौसम संबंधी पूर्वानुमान चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने के वास्ते लेह में मौसम विज्ञान केंद्र बनाने की आवश्यकता महसूस की. लेह का मौसम विज्ञान केंद्र 3500 मीटर की ऊंचाई पर है और यह भारत में सबसे ऊंचाई पर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र होगा.’’

उन्होंने कहा कि इस केंद्र के जरिए नुब्रा, चांगथंग, पैंगोग झील, जंस्कर, करगिल, द्रास,धा-बैमा (आर्यन वैली), खाल्सी जैसे स्थानों के मौसम की भी जानकारी मिलेगी.

इस केंद्र के जरिए राजमार्ग, पर्वतारोहण, कृषि क्षेत्र, अचानक बाढ, सर्द हवाओं, तापमान में बदलाव के लिए पूर्वानुमान जारी किए जाएंगे.
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