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अब सुप्रीम कोर्ट नितिन गडकरी से लेगा सलाह, कहा-उनके पास प्रदूषण रोकने के हैं अच्‍छे आइडियाज़, भेजा बुलावा

अब सुप्रीम कोर्ट नितिन गडकरी से लेगा सलाह, कहा-उनके पास प्रदूषण रोकने के हैं अच्‍छे आइडियाज़, भेजा बुलावा

नितिन गडकरी (फाइल)

नितिन गडकरी (फाइल)

सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक व्हीकल (Electric Vehicles) में बदलने की प्रक्रिया पर बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) को कोर्ट में पेश होने को कहा.

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    नई दिल्ली. सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने की प्रक्रिया पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान प्रधान न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे (Chief Justice SA Bobde) ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) को कोर्ट में पेश होने को कहा. CJI ने कहा कि हम चाहते हैं कि गडकरी कोर्ट में आकर बताएं कि प्रदूषण को नियंत्रित करने में आखिर दिक्कत कहां आ रही है. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के इस पर विरोध जताने पर CJI ने साफ किया कि इसे समन नहीं गुजारिश समझें.

    दरअसल, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल माधवी गराडिया (Madhavi Goradia) ने कोर्ट में कहा कि अगर केंद्रीय मंत्री को पेश होने को कहा गया तो इसका राजनीतिक असर पड़ेगा. इस पर प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा, 'हम आदेश नहीं दे रहे हैं. इसे एक गुजारिश समझें. केंद्रीय मंत्री के पास इनोवेटिव आइडियाज़ हैं, जिससे प्रदूषण दूर करने में मदद मिल सकती है. देखिए वह कोर्ट में आ सकते हैं या नहीं.'

    CJI ने आगे कहा, 'इसे आप निमंत्रण समझें, क्योंकि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बारे में दूसरों के बजाय परिवहन मंत्री को अच्छी समझ होगी.' कोर्ट ने आगे कहा कि हम प्रदूषण को लेकर कोई समझौता नहीं कर सकते. ये सिर्फ दिल्ली-एनसीआर का नहीं, बल्कि देश का मामला है.

    दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है कि सरकार ने सार्वजनिक और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने के लिए पर्याप्त कोशिशें नहीं की. याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में सुझाव दिया कि सरकार इस मामले में पेट्रोल-डीजल कार वालों से जुर्माना वसूल सकती है और इलेक्ट्रिक व्हीकल पर सब्सिडी दे सकती है. कोर्ट ने सरकार को चार हफ्तों में मीटिंग कर इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित मामले में कोई फैसला लेने को कहा है.

    बता दें कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी कई कदम उठा रही है. इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जाती है. साथ ही सरकार लिथियम ऑयन बैटरी की मैन्युफैक्चरिंग पर भी सब्सिडी देने की योजना लेकर आई है. इसके लिए सरकार बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी लाई है.

    पॉलिसी के मुताबिक, सरकार प्रति किलोवॉट ऑवर 2,000 रुपये की सब्सिडी देगी. इसका मतलब ये होगा कि एक इलेक्ट्रिक व्हीकल में एक बड़ा हिस्सा बैटरी खर्च को लेकर है. लिथियम बैटरी पर सब्सिडी से इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमत कम हो जाएगी. ये सब्सिडी इलेक्ट्रिक व्हीकल पर मौजूदा छूट के अलावा होगी.

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    Tags: Air pollution, Modi government, Nitin gadkari, Supreme Court

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