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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट, दस में से आठ भारतीयों के पास नहीं है अच्छी नौकरी

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

संयुक्त राष्ट्र मानव विकास रिपोर्ट (यूएनएचडीआर) की साल 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 77.5 प्रतिशत श्रमिक ऐसी नौकरी कर रहे हैं जो उनके लिए सुरक्षित नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 25, 2018, 11:53 AM IST
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मयंक मोहंती

भारत में बेरोजगारी चिंता का विषय है. यह खबर थोड़ी पुरानी हो गई है. अब इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है कि भारत में अपना पेट पालने के लिए लोग खतरनाक और अमानवीय नौकरियां कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र मानव विकास रिपोर्ट (यूएनएचडीआर) की साल 2018  की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 77.5 प्रतिशत श्रमिक ऐसी नौकरी कर रहे हैं जो उनके लिए सुरक्षित नहीं है. यह आंकड़ा वैश्विक औसत 42.5 प्रतिशत से काफी अधिक है. यदि इस मेट्रिक्स के आधार पर भारत के रैंक की बात करेंगे तो जनसंख्या अनुपात में 51.9 प्रतिशत रोजगार वाला देश 189 देशों की सूची में 180 के नीचे पहुंच जाएगा.

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) विश्व रोजगार और सोशल आउटलुक ने इस साल जनवरी में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इस रिपोर्ट में साल 2019 में भारत में 53 करोड़ 50 लाख श्रम बल की भविष्यवाणी की गई थी. इसमें से 39 करोड़ 86 लाख के पास खराब गुणवत्ता वाली नौकरियां होंगी.



रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2017 में दुनियाभर में संवेदनशील रोजगार में अनुमानित 140 करोड़ कर्मचारी काम कर रहे थे. वहीं साल 2018 और 2019 में और 17 लाख लोग संवेदनशील रोजगार के क्षेत्र में आ सकते हैं.
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महिला-पुरुष श्रम में अंतर को दर्शाता चार्ट


यह चिंताजनक है कि साल 2017-19 के बीच भारत में कुल बेरोजगारी दर 3.4 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत हो गई है. युवाओं में 15-24 आयु वर्ग में बेरोजगारी दर कुल आबादी का 28 प्रतिशत रहने की भविष्यवाणी की गई है.

UNHDR की रिपोर्ट में ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि भारत में महिला श्रम भागीदारी दर पुरुष की तुलना में 78.8 प्रतिशत के मुकाबले 27.2 प्रतिशत ही है, जिसमें 51.6 प्रतिशत का अंतर है. यह पुरुष और महिला श्रम बल भागीदारी दरों में सबसे बड़े अंतर वाले 20 देशों की सूची में 12 वें स्थान पर है.

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