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नागरिकता कानून पर UN ने कहा- लोगों के अधिकारों का हनन न हो, इसपर हमारी कड़ी नजर

भाषा
Updated: December 13, 2019, 5:27 PM IST
नागरिकता कानून पर UN ने कहा- लोगों के अधिकारों का हनन न हो, इसपर हमारी कड़ी नजर
संयुक्त राष्ट्र ने नागरिकता अधिनियम कानून को लेकर बड़ा बयान दिया है.

नागरिकता अधिनियम कानून (Citizenship Amendment Act) को लेकर संयुक्‍त राष्‍ट्र प्रमुख एंटोनियो गुतारेस (United Nations Secretary General Antonio Guterres) के उप प्रवक्ता ने कहा है कि इसपर हमारी कड़ी नजर है.

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संयुक्त राष्ट्र. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुतारेस (United Nations Secretary General Antonio Guterres) के उप प्रवक्ता ने कहा है कि भारत के नागरिकता अधिनियम कानून ( Citizenship Amendment Act) के संभावित परिणामों का यह वैश्विक संस्था करीब से निगरानी कर रही है. प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र के अपने मूलभूत सिद्धांत हैं, जिनमें मानवाधिकारों के सार्वभौम घोषणापत्र में शामिल अधिकार निहित हैं. उम्मीद है कि उन्हें कायम रखा जाएगा.

उल्लेखनीय है कि नागरिकता अधिनियम के मुताबिक अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को बुधवार को राज्यसभा ने पारित किया. इससे पहले सोमवार को इसे लोकसभा ने पारित किया था.

इन छह समुदायों को इस शर्त पर दी जाएगी नागरिकता
अधिनियम में कहा गया है इन छह समुदायों के शरणार्थियों को पांच साल भारत में निवास करने के बाद भारतीय नागरिकता दी जाएगी, जबकि पहले इसके लिए 11 साल निवास करने की जरूरत थी. संरा महासचिव गुतारेस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, 'हम इस बात से अवगत हैं कि भारतीय संसद के निचले एवं उच्च सदन ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित किया है और हम सार्वजनिक रूप से प्रकट की गई चिंताओं से भी अवगत हैं. संयुक्त राष्ट्र नये अधिनियम के संभावित परिणामों की करीबी निगरानी कर रहा है.' उप प्रवक्ता ने एक सवाल के जवाब में यह बात कही.

संयुक्‍त राष्‍ट्र ने कैब पर कही ये बात
दरअसल, उनसे पूछा गया था कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम पर क्या महासचिव कोई टिप्पणी करेंगे. उन्होंने कहा कि वह इस तथ्य की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहेंगे कि संयुक्त राष्ट्र के कुछ मानवाधिकार प्रतिवेदनों में इस कानून के स्वरूप के बारे में पहले ही चिंता जताई जा चुकी है और आप देख सकते हैं कि वे मानवाधिकार कार्यालय से हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या इस नये कानून के संभावित परिणामों का संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्लेषण पूरा करने के बाद कोई और बयान जारी किया जाएगा, हक ने कहा, 'हमें देखना होगा कि हमें किस तरह की प्रतिक्रिया करने की जरूरत है. फिलहाल, हम इसकी विशेषताओं का विश्लेषण करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं.'ये भी पढ़ें: पूर्वोत्तर में हो रहे प्रदर्शन को दबाने के लिए मेरे बयान पर हंगामा : राहुल

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First published: December 13, 2019, 5:17 PM IST
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