आतंकी कर सकते हैं चेचक वायरस से हमला, US ने दी पहली दवा को मंजूरी

इस कदम का मकसद किसी आतंकी हमले में चेचक वायरस को बायोविपन की तरह इस्तेमाल किए जाने की सूरत में उसके घातक असर का काट निकालना है.


Updated: July 14, 2018, 12:05 PM IST
आतंकी कर सकते हैं चेचक वायरस से हमला, US ने दी पहली दवा को मंजूरी
प्रतीकात्मक तस्वीर

Updated: July 14, 2018, 12:05 PM IST
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने शुक्रवार को चेचक के इलाज के लिए पहली दवा को मंजूरी दे दी है. इस कदम का मकसद किसी आतंकी हमले में चेचक वायरस को बायोविपन की तरह इस्तेमाल किए जाने की सूरत में उसके घातक असर का काट निकालना है.

टोपॉक्सक्स या टीकोक्सिमाट नाम की एंटीवायरल गोली का कभी भी इंसानों पर परीक्षण नहीं किया गया है, क्योंकि साल 1980 में इस बीमारी को देश से खत्म मान लिया गया था. हालांकि तीन साल पहले एक मामला सामने आया था.

न्यूयॉर्क के दवाई निर्माता सिगा टेक्नोलॉजी ने पहले से ही 20 लाख ट्रीटमेंट दिए हैं, जिनका भंडारण सरकार करेगी. इस दवा के विकास में आंशिक रूप से सरकार ने भी सहयोग किया है. दवा के प्रभाव का परीक्षण करने के लिए बंदरों और खरगोशों को एक वायरस से संक्रमित किया गया और फिर उन्हें दवा दी गई. कंपनी ने कहा कि 90 प्रतिशत से ज्यादा बच गए हैं. इसकी सुरक्षा का परीक्षण कई सौ स्वस्थ स्वयंसेवकों पर किया गया था, जो चेचक से संक्रमित नहीं थे.

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20वीं शताब्दी में चेचक के चलते दुनिया भर में 30 करोड़ लोग मारे गए थे. चेचक का लक्षण बुखार, थकान और पस से भरे घाव हैं. अब तक डॉक्टर केवल आईवी तरल पदार्थ और बुखार के उपचार जैसे देखभाल और रोगियों को अलग रख सकते थे. वहीं संक्रमण को रोकने के लिए टीके का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह लक्षण प्रकट होने से ठीक पहले, वायरस के संपर्क में आने के पांच दिनों के भीतर किया जाना चाहिए.

फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख डॉ स्कॉट गॉटलिब ने एक बयान में कहा, 'यह नया उपचार हमें एक अतिरिक्त विकल्प प्रदान करेगा जिसे कभी भी बायोवेपन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.' दवा एक कैप्सूल है, जिसे 14 दिनों तक दिन में 2 बार खाना है.

मुख्य कार्यकारी फिल गोमेज़ ने कहा कि कंपनी चतुर्थ संस्करण विकसित कर रही है. उन्होंने कहा अन्य देशों को दवा बेचने और अन्य संक्रामक बीमारियों के इलाज के लिए इसका विकास किया जा रहा है. इसमें  मंकीपॉक्स (बंदरों को होने वाले चेचक) भी शामिल है, जो अफ्रीकी बंदरों के चलते मनुष्यों को हो सकता है.

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