India-China Standoff: अमेरिका अधिकारी बोले- राष्‍ट्रपति चुनाव के बाद भी चीन के खिलाफ भारत के साथ खड़ा रहेगा US

अमेरिका ने शनिवार को किया ऐलान. (File Pic- Reuters)

India-China Standoff: 'क्या चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका राष्ट्रपति चुनावों के बाद भी भारत को समर्थन जारी रखेगा?' न्‍यूज18 के इस सवाल पर अमेरिकी अफसरों ने कहा कि उनके पास यह विश्वास करने लायक ऐसा कोई कारण नहीं है कि नए शासन में भारत को लेकर उनकी नीति बदलेगी.

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    नई दिल्‍ली. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो (Mike Pompeo) अगले हफ्ते भारत दौरे पर आने वाले हैं. इस बीच अमेरिकी अफसरों (US Officials) ने शनिवार को बयान जारी कर कहा है कि लद्दाख (Ladakh) में भारत और चीन (India China) के बीच वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रहे तनाव की अमेरिका निगरानी कर रहा है. उनका यह भी कहना है कि अमेरिका चाहता है कि दोनों देशों के बीच वहां हालात खराब ना हों. अमेरिकी अफसरों ने यह बातें ऑनलाइन न्‍यूज ब्रीफिंग के दौरान कहीं.

    'क्या चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका राष्ट्रपति चुनावों के बाद भी भारत को समर्थन जारी रखेगा?' न्‍यूज18 के इस सवाल पर अमेरिकी अफसरों ने कहा कि उनके पास यह विश्वास करने लायक ऐसा कोई कारण नहीं है कि नए शासन में भारत को लेकर उनकी नीति बदलेगी. उन्होंने कहा, अमेरिका के दोनों राजनीतिक दल भारत के साथ संबंधों को समर्थन और उन्‍हें गहनता प्रदान करने में रुचि रखते हैं.

    उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार हिमालयी क्षेत्र की स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए थी और यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि हालात खराब ना हों. अधिकारी ने कहा, 'हम रक्षा बिक्री, अभ्यास और सूचना साझा करने के माध्यम से समर्थन प्रदान कर रहे हैं. ये ऐसे क्षेत्र हैं, जहां हम भारत के साथ सहयोग करते हैं, सिर्फ हिमालयी क्षेत्रों में तनाव के संबंध में ही नहीं.'





    अमेरिका ने दौरान कहा कि वह दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने सहित दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय भागीदारी में बढ़ोतरी का स्वागत करता है और हिमालय से लेकर विवादित समुद्री क्षेत्र तक चीन के आक्रामक व्यवहार का मुकाबला करने के लिए समान विचारधारा वाले सहयोगियों के साथ वह काम कर रहा है.

    ऑनलाइन न्‍यूज ब्रीफिंग में अमेरिकी अफसरों ने कहा, 'हमने दक्षिण चीन सागर ही नहीं, बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया में बढ़े सहयोग के बारे में भारत के साथ बातचीत जारी रखी है. हम उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं. हम विकास संबंधी निवेश, सुरक्षा सहयोग और मौजूदगी के संबंध में दक्षिण पूर्व एशिया में अधिक से अधिक भारतीय भागीदारी का स्वागत करते हैं.'

    उन्होंने कहा, 'हिमालय से दक्षिण चीन सागर तक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार को देखते हुए यह पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि हम भारत जैसे समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ काम करें. ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत की हालिया घोषणा को देखकर हम खुश थे.' यह घोषणा मालाबार नौसैन्‍य अभ्‍यास में शामिल होने संबंधी थी.

    वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा था कि 'क्वाड' या चतुभुर्जीय गठबंधन के अंतर्गत भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का आना बदलते समय के अनुरूप उठाया गया कदम है तथा यह बहुध्रुवीय विश्व के उभरते परिदृश्य का प्रतिबिंब है. जयशंकर ने कहा कि शक्ति के भूराजनीतिक संतुलन में प्रत्येक प्रतिबिंब और आयाम अपनी खुद की सोच और रणनीति उत्पन्न करते हैं तथा भारत समूचे दृष्टिकोण में अपनी अनुरूपता कायम रखते हुए विभिन्न स्थितियों में विभिन्न प्रकार से स्वयं को अभिव्यक्त करेगा.


    पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (पीएएफआई) द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन सम्मेलन में ‘क्वाड’ से संबंधित सवालों के जवाब में जयशंकर ने कहा, 'यह समय के अनुरूप उठाया गया कदम है और हमारे सामने एक अधिक बहुध्रुवीय दुनिया तथा एक अधिक बिखरा हुआ विश्व होगा, देशों के ये विशेष संगठन हैं जो मिलकर काम करेंगे.'

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