उन्नाव मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- परिवार चाहे तो पीड़िता को इलाज के लिए ले आएं दिल्ली

बेंच ने कहा था कि वह लखनऊ के अस्पताल के डॉक्टरों से जानना चाहेगी कि क्या उन्हें एयर-एंबुलेंस पर एयरलिफ्ट किया जा सकता है.

News18Hindi
Updated: August 1, 2019, 2:39 PM IST
उन्नाव मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- परिवार चाहे तो पीड़िता को इलाज के लिए ले आएं दिल्ली
चीफ जस्टिस ने ये भी पूछा है कि 'क्या पीड़िता के परिवार को सुरक्षा चाहिए.
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Updated: August 1, 2019, 2:39 PM IST
उत्तर प्रदेश के उन्नाव बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट तलब की. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने पूछा कि 'पीड़िता की तबीयत कैसी है? क्या हम उसे दिल्ली ला सकते हैं, अगर हां तो उसे एयरलिफ्ट कर के दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराएं.

2 बजे मामले की सुनवाई दोबारा शुरू होने के बाज पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी गई. डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक, केजीएमयू के पास इलाज की सुविधाएं हैं. हालांकि पीड़िता दिल्ली शिफ्ट करने की हालत में है .ऐसे में चीफ जस्टिस ने वकीलों से कहा है कि 'अगर परिवार चाहता है कि पीड़िता को दिल्ली शिफ्ट किया जाए, तो उन्हें शिफ्ट किया जा सकता है'. पीड़िता के साथ-साथ घायल वकीलों के बारे में भी ऐसा ही करने को कहा गया है.

इसके अलावा चीफ जस्टिस ने ये भी पूछा है कि 'क्या पीड़िता के परिवार को सुरक्षा चाहिए. जिस पर वकील ने अदालत को बताया कि पीड़िता की चार बहनें हैं, माता हैं और एक चाचा हैं जिनकी पत्नी की एक्सीडेंट में मौत हो गई है. इन सभी को सुरक्षा चाहिए.'

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परिवार को दी गई सुरक्षा

इसके बाद सीजेआई ने कहा- 'हम उन्नाव में गांव में पीड़िता, उसके वकील, पीड़िता की मां, पीड़िता के चार भाई-बहनों, उसके चाचा और तत्काल परिवार के सदस्यों को सुरक्षा और संरक्षण भी देने का आदेश देते हैं.'

इससे पहले 12 बजे के बाद शुरू हुई सुनवाई में सीजेआई के सवालों का जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि पीड़िता वेंटिलेटर पर है. फिलहाल केजीएमयू से इस आशय की जानकारी मांगी जाएगी कि उसकी हालत कैसी है. इसके बाद सीजेआई ने दो बजे मेडिकल रिपोर्ट तलब कर ली थी.
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बेंच ने तलब की थी रिपोर्ट

बेंच ने कहा था कि वह लखनऊ के अस्पताल के डॉक्टरों से जानना चाहेगी कि क्या उन्हें एयर-एंबुलेंस पर एयरलिफ्ट किया जा सकता है. बेंच ने कहा, 'अगर जवाब हां है, तो हम उसके अनुसार आदेश पारित करेंगे और यदि यह नहीं है, तो हम एक अलग आदेश पारित करेंगे.'

जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने महिला द्वारा लिखे गए पत्र को लाने में देरी के मुद्दे पर एक आदेश पारित करेगी. आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नेता और विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने साल 2017 में महिला से बलात्कार किया जब वह 17 साल की थी. पीड़िता का परिवार सीजेआई के समक्ष पहुंचा था. चिट्ठी में परिजनों ने मुख्य बलात्कार के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से अपनी जान को खतरा बताया था.

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First published: August 1, 2019, 2:28 PM IST
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