जानिए क्या है ब्लड कल्चर, कब होती है इसकी जरूरत, इसी से उन्नाव रेप पीड़ता को हुए गंभीर इंफेक्शन का चला है पता

उन्नाव रेप पीड़िता के शरीर में एंटेरोकोकस (Enterococcus) मौजूद होने की पुष्टि ब्लड कल्चर रिपोर्ट से हुई है. हम आपको बताने जा रहे हैं कि ब्लड कल्चर क्या है और इसकी जरूरत कब और क्यों पड़ती है...

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 2:05 PM IST
जानिए क्या है ब्लड कल्चर, कब होती है इसकी जरूरत, इसी से उन्नाव रेप पीड़ता को हुए गंभीर इंफेक्शन का चला है पता
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: August 8, 2019, 2:05 PM IST
उन्नाव रेप पीड़िता (Unnav Rape Victim) के ब्लड में एक गंभीर बैक्टीरिया पाया गया है, जो एंटेरोकोकस (Enterococcus) प्रजाति का है. यह ऐसा बैक्टीरिया है जिसमें मल्टी ड्रग रिजिस्टेंट (MDR) की क्षमता होती है. यानी इस पर अधिकांश प्रमुख एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं. उन्नाव रेप पीड़िता के शरीर में इसके मौजूद होने की पुष्टि ब्लड कल्चर रिपोर्ट से हुई है. हम आपको बताने जा रहे हैं कि ब्लड कल्चर क्या है और इसकी जरूरत कब और क्यों पड़ती है...

क्या है ब्लड कल्चर
जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, इस टेस्ट में ब्लड में मौजूद रोगाणु का संवर्धन (कल्चर) किया जाता है. सामान्य शब्दों में कहें तो एक तरह से रोगाणुओं की खेती की जाती है, जिसमें उन्हें वृद्धि करने का पूरा मौका दिया जाता है. इससे मरीज के ब्लड में मौजूद रोगाणुओं जैसे बैक्टीरिया या फंगस आदि के प्रकार का पता लगाना आसान हो जाता है. इसके बाद सेंसिटिविटी टेस्टिंग की जाती है जिससे पता चलता है कि संबंधित रोगाणु पर कौन सी एंटीबायोटिक असर करेगी और कौन सी नहीं. इससे डॉक्टर को उचित दवा चुनने में मदद मिलती है और मरीज का इलाज आसान हो जाता है.

ब्लड कल्चर में मरीज की अलग-अलग शिराओं (Veins) से अलग-अलग ब्लड सैंपल लिए जाते हैं. हर सैंपल को ब्रोथ लिक्विड से युक्त बॉटल में रखा जाता है. ब्रोथ ऐसा लिक्विड है जो ब्लड में मौजूद रोगाणु की वृद्धि में सहायक होता है. इस टेस्ट में बैक्टीरिया की अलग-अलग माध्यम में ग्रोथ कराई जाती है. बैक्टीरिया या फंगस की ग्रोथ दिखने के बाद उसमें सेंसिटिविटी टेस्टिंग की जाती है, जिसमें अलग-अलग एंटीबायोटिक के पैच होते हैं.

कब होती है ब्लड कल्चर की जरूरत
ब्लड में गंभीर संक्रमण का पता लगाना इसलिए जरूरी होता है, क्योंकि इसका दुष्प्रभाव शरीर के अलग-अलग अंगों जैसे फेफड़े, आंत, किडनी या हार्ट वाल्व पर भी पड़ता है. जब डॉक्टर को किसी मरीज के ब्लड में सेप्सिस (Sepsis) या बैक्टीरीमिया (Bacteremia) जैसे किसी गंभीर संक्रमण होने की संभावना दिखती है, तो वह ब्लड कल्चर कराने के लिए कहता है.

आमतौर पर जब कोई मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है या फिर हॉस्पिटल में भर्ती होता है, तो उसे सामान्य जांच के बाद एंटीबायोटिक दवाएं दे दी जाती हैं. लेकिन यदि मरीज पर वे दवाएं असर नहीं करतीं और बीमारी बनी रहती है या फिर डॉक्टर को लगता है कि मरीज के ब्लड में कोई गंभीर संक्रमण है, तो फिर वह ब्लड कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्टिंग की सलाह देता है.
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कितना लगता है समय
ब्लड सैंपल लेने के बाद अधिकांश कल्चर में बैक्टीरिया 2 से 3 दिन में नजर आने लगते हैं. लेकिन कुछ बैक्टीरिया 10 या उससे अधिक दिन भी ले लेते हैं. फंगस के मामले में 30 दिन तक लग जाते हैं.

उन्नाव रेप पीड़िता के मामले में यह हो सकते हैं संक्रमण के कारक
उन्नाव रेप पीड़िता को एंटेरोकोकस (Enterococcus) बैक्टीरिया का संक्रमण हुआ है. मनुष्य में इसकी दो प्रजातियां पाई जाती हैं- एंटेरोकोकस फिकेलिस और एंटेरोकोकस फेसियम.

यह बैक्टीरिया आमतौर पर आंतों में पाया जाता है. स्वस्थ मनुष्य में यह कोई परेशानी नहीं पैदा करता, लेकिन यदि यह किसी वजह से शरीर के अन्य अंगों में पहुंच जाता है, तो यह जानलेवा संक्रमण का कारण बन जाता है.

हॉस्पिटल में भर्ती गंभीर मरीजों में इसका संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी होती है. साथ ही ऐसे मरीजों में यूरिनरी कैथेटर या इंट्रावैस्कुलर डिवाइस का उपयोग आम बात है, जिनसे एंटेरोकोकस फिकेलिस के फैलने का खतरा होता है. वैसे भी एंटेरोकोकस फिकेलिस, हॉस्पिटल में होने वाले संक्रमणों का तीसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है.

संभव है कि उन्नाव रेप पीड़िता के मामले में भी इसी तरह के किसी माध्यम से यह ब्लड में पहुंच गया होगा और अब वह गंभीर स्थिति में है.

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First published: August 8, 2019, 1:37 PM IST
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