• Home
  • »
  • News
  • »
  • nation
  • »
  • शिलान्यास के बाद भी क्यों नहीं बना राम मंदिर? 

शिलान्यास के बाद भी क्यों नहीं बना राम मंदिर? 

इस सीरीज़ की 13वीं कहानी में पढ़िये शिलान्यास के बाद भी क्यों नहीं बना राम मंदिर...

  • Share this:
अयोध्या को भगवान राम के नाम से जाना जाता है. ऐसे में यहां भक्ति की बात होनी चाहिए, पर अब भक्ति से ज्यादा अयोध्या विवाद के कारण मशहूर है. इस शहर में आमतौर पर सब कुछ शांत रहता है. साल भर श्रद्दालु आते रहते हैं, राम की बात होती है, लेकिन 6 दिसंबर आते-आते शहर का माहौल गर्म होने लगता है, श्रद्धालु कम होने लगते हैं और नेता बढ़ने लगते हैं. धर्म से ज्यादा चर्चा विवाद की होने लगती है. इस साल इस तादाद और चर्चा दोनों में तेजी आई है. हो भी क्यों नहीं, आखिर यह चुनावी साल जो है.

न्यूज़18 हिंदी एक सीरीज़ की शक्ल में अयोध्या की अनसुनी कहानियां लेकर आ रहा है. इसमें 6 दिसंबर तक हम आपको रोज एक ऐसी नई कहानी सुनाएंगे, जो आपने पहले कहीं पढ़ी या सुनी नहीं होगी. हम इन कहानियों के अहम किरदारों के बारे में भी बताएंगे.

अयोध्या के इतिहास को देखें तो आजादी के बाद तीन अहम पड़ाव हैं. पहला, 1949 जब विवादित स्थल पर मूर्तियां रखी गईं, दूसरा, 1986 जब विवादित स्थल का ताला खोला गया और तीसरा 1992 जब विवादित स्थल गिरा दिया गया. 1992 के बाद की कहानी सबको पता है, लेकिन 1949 से लेकर अब तक ऐसा काफी कुछ हुआ है जो आपको जानना चाहिए.

इस सीरीज़ की 13वीं कहानी में पढ़िये शिलान्यास के बाद भी क्यों नहीं बना राम मंदिर...

1987 में राममंदिर का ताला खुला और उसके बाद आम सहमति से समझौते की कोशिशें भी हुईं, लेकिन ये कोशिशें कामयाब नहीं हो पाईं. इस बीच 1989 में आम चुनाव की आहट के बीच विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राममंदिर आंदोलन की धार तेज कर दी.

विश्व हिंदू परिषद के इस आंदोलन के पीछे अब बीजेपी भी आ चुकी थी. अयोध्या में राममंदिर चुनावी मुद्दा बन चुका था. केंद्र में बैठी राजीव गांधी और उत्तर प्रदेश की नारायण दत्त तिवारी सरकार को ये समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर इस मुद्दे को कैसे शांत किया जाए.

इलाहाबाद हाईकोर्ट लगातार इस मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी कर रहा था तो विश्व हिंदू परिषद 9 नवंबर को शिलान्यास करने पर अड़ी हुई थी. इस मामले को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह को कई बार लखनऊ भेजा.

14 अगस्त 1889 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ-साफ आदेश दिया कि संपत्ति के स्वरूप में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन विश्व हिंदू परिषद अपने आंदोलन को किसी तरह से खत्म करने को तैयार नहीं थी. इस बीच मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, गृहमंत्री बूटा सिंह और विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त सचिव अशोक सिंघल की एक बैठक हुई.

सरकार वीएचपी को अयोध्या में शिलादान आंदोलन की इजाजत देने से पहले हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक हलफनामा चाहती थी.

राम मंदिर को लेकर लगातार बन रहे राजनीतिक दवाब के बीच राजीव गांधी नहीं चाहते थे कि उनकी हिंदू विरोधी छवि बने. ऐसे में सरकार ने बीच का रास्ता निकाला और विवादित स्थल के पास ही 9 नवंबर 1989 को शिलान्यास करा दिया गया. वीएचपी ये दावा कर रही थी कि शिलान्यास उसी जगह पर हुआ है जहां के लिए विश्व हिंदू परिषद ने ऐलान किया था.

इस बीच 17 अक्टूबर 1989 को चुनाव आयोग ने आम चुनावों की ऐलान कर दिया और चुनाव के परिणामों में राजीव गांधी की सरकार सत्ता से बाहर हो गई और बीजेपी के गठबंधन से विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के प्रधानमंत्री बन गए. सत्ता में बदलाव के बाद राम मंदिर आंदोलन धीरे-धीरे विश्व हिंदू परिषद के हाथ से निकल कर भारतीय जनता पार्टी के हाथ में आ गया.

यहां पढ़ें इस सीरीज की अन्य कहानियां

भाग 1- राजीव गांधी नहीं, इस शख्स ने खुलवाया था ताला
भाग 2- एक साधु की ललकार सुन मंदिर मामले पर सुनवाई को मजबूर हुए थे फैजाबाद के जिला जज
भाग 3- कौन था वो काला बंदर जो अयोध्या पर फैसले के दिन हर जगह नजर आया
भाग 4- अयोध्या पर फैसला देने वाले जज साहब की जान को किससे था खतरा?
भाग 5- अयोध्या के अनसुने किस्सेः मुलायम ने कैसे रोका जिला जज पांडे का प्रमोशन?
भाग 6- अयोध्या: रिटायरमेंट के बाद किसने कराया जज साहब का प्रमोशन
भाग 7- अयोध्या: मंदिर में ताला किसने लगाया?
भाग 8- अयोध्या: किसने दिया पूजा शुरू करने का आदेश?
भाग 9- नेहरू को अयोध्या आने से किसने रोका?

भाग 10- अंग्रेजों ने नहीं निकलने दिया था अयोध्या मसले का हल, ऐसे रोका मंदिर निर्माण
भाग 11- अयोध्या: CM वीर बहादुर और महंत अवैद्यनाथ की सीक्रेट बैठक में क्या हुआ था तय?भाग 12- अयोध्याः किसने बिगाड़ी मंदिर बनाने की योजना?

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज