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केरल: पांच महीने पहले बोट से रवाना हुए थे 243 लोग, अब नहीं चल रहा कोई पता

केरल के मुनमबम से पांच महीने पहले जनवरी में देवा माथा नाम की एक फिशिंग बोट रवाना हुई. इस बोट पर 243 लोग सवार थे.

केरल के मुनमबम से पांच महीने पहले जनवरी में देवा माथा नाम की एक फिशिंग बोट रवाना हुई. इस बोट पर 243 लोग सवार थे.

अंबेडकर नगर कॉलोनी में काफी अफवाहें उड़ रही हैं. शुरुआत में यहां के लोगों का मानना ​​था कि नाव न्यूजीलैंड की ओर गई थी, लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि यह ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस द्वीप जा रही थी.

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    एम उन्नीकृष्णन
    बीते पांच महीने से कस्तूरी अपने उन परिजनों के बारे में पता लगा रही हैं जो एक बोट पर सवार हुए लेकिन फिर कभी लौट कर नहीं आए. वह हर रोज एक नई उम्मीद के साथ किसी न किसी मंत्रालय और अधिकारी के दरवाजे का रुख करती हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. कस्तूरी उन तमिल लोगों में से हैं जो 6 दशक पहले अपने राज्य से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आ गए थे.

    पांच महीने पहले जनवरी में केरल के मुनमबम से देवा माथा नाम की एक फिशिंग बोट रवाना हुई. इस बोट पर 243 लोग सवार थे. इनमें से 184 लोग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित अंबेडकर नगर कॉलोनी के निवासी थे. इन्हीं में से एक कस्तूरी का परिवार है. इस बोट पर 85 बच्चे सवार थे. News18 को इस मामले में एक बर्थ सर्टिफिकेट और CCTV फुटेज मिला है, जिसमें 12 साल का एक बच्चा अपने परिजनों के साथ नाव पर सवार था.

    Untraceable Boat, 'Illegal' Journey: What Happened to 243 Passengers Who Left Kerala 5 Months Ago?
    कस्तूरी अपने परिजनों की तस्वीर हथेली पर लिए. (NEWS18)


    कस्तूरी ने कहा, 'मेरे बेटों ने मुझे बताया कि वे तमिलनाडु में कहीं जा रहे थे और दिसंबर के बीच में घर से चले गए. ऐसी खबरें आने लगीं कि उन्होंने अवैध रूप से देश छोड़ दिया है, जिससे हमेंइस बारे में पता चला. पाँच महीने हो गए हैं, वे कहाँ हैं?' हाथ जोड़ते हुए कस्तूरी ने आग्रह किया, 'आप मीडियाकर्मी कृपया हमें यह पता लगाने में मदद करें कि वे जीवित हैं या नहीं.'

    घर में अकेली हैं कस्तूरी
    कस्तूरी अपने बेटों और परिवार के जाने के बाद से अपने घर में अकेली रह रही हैं. 48 वर्षीय महिला ने कहा कि उनके पति आपे से बाहर हो गए हैं और अब वह शराब के आदी हो गए हैं. कस्तूरी के मुताबिक, पड़ोसी तक अब यह पूछने लगे हैं कि 'उनके परिजन वाले जिंदा हैं या मर गए.'

    बीते पांच महीनों में लापता लोगों के परिवार के सदस्यों ने एक साथ आकर कई दरवाजे खटखटाए. उन्होंने गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को एक संयुक्त ज्ञापन भेजा है. परिवारों ने दिल्ली पुलिस, मुख्यमंत्री और यहां तक कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी चिट्ठी लिखी है.

    ज्ञापन में उन सभी के नाम और पते दिए गए हैं जिनके बारे में संदेह है कि यह नाव पर सवार थे. हालांकि, अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. परिजनों की अगली योजना विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिलने की है और वे उनके साथ अपांइटमेंट मांग रहे हैं.

    उड़ रही हैं अफवाहें
    इस बीच, अंबेडकर नगर कॉलोनी में काफी अफवाहें उड़ रही हैं. शुरुआत में यहां के लोगों का मानना ​​था कि नाव न्यूजीलैंड की ओर गई थी, लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि यह ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस द्वीप जा रही थी. हालांकि, केरल पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल नाव की सही स्थिति की पुष्टि नहीं कर सका.

    परिवार के कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से मिस्ड कॉल आया था


    कॉलोनी के निवासी जिनके परिवार के सदस्य लापता हो गए, उन्होंने एक फोन नंबर मिला जिसका पता अल्जीरिया का है. अफवाह यह थी कि नाव पर सवार सभी लोग अब जेल में हैं. पुलिस अधिकारी ने कहा कि 'अल्जीरिया के एक तटीय शहर अन्नाबा में एक पुलिस स्टेशन का पता लगाया गया है. हमने अपने वाणिज्य दूतावास के साथ नंबर साझा किया. उन्होंने सत्यापित किया और पाया कि इसका वर्तमान मामले से कोई संबंध नहीं है.'

    कनकलिमगाम और रमेश के परिवार के सदस्यों के भी नाव पर होने की सूचना मिली थी. वह बताते हैं कि उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से मिस्ड कॉल मिला है, लेकिन जब उन्होंने वापस कॉल करने की कोशिश की, तो नंबर कनेक्ट नहीं हुआ.

    केरल हाईकोर्ट ने की टिप्पणी
    11 जनवरी को, केरल पुलिस को कोच्चि के पास मुनंबम में 50 फेंके हुए बैग मिले. अगले दिन उन्होंने आसपास के क्षेत्रों से और अधिक फेंके हुए बैग, पहचान पत्र और दस्तावेज पाए, रहस्य को और गहरा किया. पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि यात्रियों को अपना सामान पीछे छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था, क्योंकि नाव में भीड़ थी. बाद में बैग्स मिलने के आधार पर की गई जांच में पुलिस ने मानव तस्करी की संभावना जताई है.

    शुरुआती जांच में पता चला है कि श्रीकांत और सेल्वन रैकेट के मास्टरमाइंड थे. दस बिचौलियों की भी पहचान की गई है. पुलिस के मुताबिक, दिल्ली और तमिलनाडु दोनों के इन बिचौलियों ने न्यूजीलैंड में नौकरी का वादा करके नाव पर निकलने वालों को लालच दिया था, जिससे उनसे पैसे निकाले गए.

    अब तक पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. उनमें से दो - दिल्ली के अंबेडकर नगर से प्रभु दंडपाणि और रवि राजा हैं, जबकि दंडपाणि को जमानत पर रिहा कर दिया गया है, चेन्नई से गिरफ्तार बाकी न्यायिक हिरासत में हैं.

    इस बीच केरल हाईकोर्ट ने कहा कि मुनंबम मानव तस्करी मामले में आरोपों को हल्के में नहीं देखा जा सकता क्योंकि इससे राष्ट्र की संप्रभुता और सुरक्षा प्रभावित हुई थी.

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