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केंद्र में यूपी के पुलिस अधिकारियों का कम हुआ प्रतिनिधित्व, राज्य सरकार से नहीं मिल रही एनओसी

फिलहाल उत्तर प्रदेश कैडर के सिर्फ 39 पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति केंद्र में हैं. (File Photo)

फिलहाल उत्तर प्रदेश कैडर के सिर्फ 39 पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति केंद्र में हैं. (File Photo)

Representation of UP police officers in the centre: केंद्र ने उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारियों का प्रतिनियुक्ति कोटा 1 ...अधिक पढ़ें

(ममता त्रिपाठी)
केंद्र में उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों का प्रतिनिधित्व अब और कम हो जाएगा. हालांकि केंद्र ने उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारियों का प्रतिनियुक्ति कोटा 112 से बढ़ाकर 117 कर दिया है. अगले दो महीने तक चार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपने मूल कॉडर यूपी में वापस आ जाएंगे.1994 बैच के आईपीएस प्रकाश डी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की मियाद पूरी करके अपने मूल कैडर में वापस आ गए हैं. वो सीआरपीएफ में आईजी के पद पर कार्यरत थे. जल्द ही चार और अफसर भी प्रतिनियुक्ति से वापस आ जाएंगे. इन सबके चलते केंद्र में यूपी का प्रतिनिधित्व और कम हो जाएगा. प्रकाश डी के वापस आने के बाद अब सिर्फ 39 अधिकारी ही केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं. केंद्र में इस तरह से यूपी का प्रतिनिधित्व कम होता दिख रहा है.

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से यूपी लौट रहे हैं ये चार आईपीएस
1990 बैच की आईपीएस तिलोत्मा वर्मा, 1992 बैच के आनंद स्वरूप,1995 बैच के मुथा अशोक जैन और अनुपम कुलश्रेष्ठ भी अपनी प्रतिनियुक्ति खत्म करके जल्द ही यूपी लौट रहे हैं. राजीव रंजन वर्मा, अजय कुमार मिश्रा, नेहा पांडे, गौरव सिंह भी जल्द ही वापस आएंगे. कई अधिकारी पांच साल से ज्यादा समय तक प्रतिनियुक्ति पर रह चुके हैं. दीपेश जुनेजा भी लगभग डेढ़ साल की स्टडी लीव के बाद सर्विस ज्वाइन कर रहे हैं. डीजी रैंक के अफसर अनिल कुमार अग्रवाल, एडीजी रैंक के आशीष गुप्ता, दलजीत चौधरी, रघुबीर लाल और डीआईजी रैंक की अधिकारी हैप्पी गुप्ता की प्रतिनियुक्ति भी इस साल के आखिर तक खत्म हो रही है. हालांकि इसमें से ज्यादातर अधिकारियों ने अपनी प्रतिनियुक्ति का समय बढ़ाने की दरख्वास्त गृह मंत्रालय को दे रखी है.

यूपी का प्रतिनियुक्ति कोटा 117 का, मगर हैं 39
आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही आईपीएस अफसरों का कैडर रिव्यू हुआ था. जिसमें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर यूपी के अधिकारियों का प्रतिनियुक्ति कोटा 112 से बढ़ाकर 117 कर दिया गया है. मगर जमीनी हकीकत ये है कि अभी यूपी के महज 39 अफसर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. चार और अफसरों के वापस मूल कैडर में आने के बाद ये संख्या 35 हो जाएगी. हैरानी की बात ये है कि लगभग 18 आईपीएस अफसरों ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए रिक्वेस्ट भेजी है मगर राज्य की योगी सरकार उन्हें एनओसी नहीं दे रही है. इसमें एसपी से लेकर डीजी रैंक तक के अधिकारी हैं जो प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं. कुछ की फाइलें तो तीन साल से गृह विभाग में धूल फांक रही हैं.

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कर्मठ अफसरों को छोड़ना नहीं चाहती योगी सरकार
योगी सरकार कर्मठ और ईमानदार छवि के अफसरों को छोड़ना नहीं चाहती है और जिनको भेजना चाहती है वो केंद्र सरकार के पैमाने पर खरे नहीं उतर रहे हैं. महज तीन अफसरों को योगी सरकार ने दो साल में रिलीव किया है. 2020 में दीपक रतन और 2021 में डीआईजी रैंक के मनोज कुमार और नितिन तिवारी को केंद्र में जाने के लिए राज्य सरकार ने एनओसी दी है.

यूपी के पूर्व डीजीपी, विक्रम सिंह का कहना है कि हर अफसर को केंद्रीय सेवा में ज्यादा से ज्यादा वक्त देना चाहिए. एक अधिकारी का चौतरफा विकास होता है, अलग अलग सशस्त्र बलों में काम करने का अनुभव उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाता है, दक्ष बनाता है. एक दौर था जब ज्यादातर सशस्त्र बलों के मुखिया यूपी कैडर के अधिकारी होते थे पर अब हालात बिल्कुल ही अलग है.

नहीं होगी राज्य सरकार से एनओसी लेने की जरूरत
गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने अफसरों की कमी को खत्म करने के लिए अखिल भारतीय सेवा नियमावली में कुछ संशोधन का प्रस्ताव पीएमओ को भेजा है जिसमें राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारी को राज्य सरकार से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी. एसपी और डीआईजी स्तर के अधिकारियों को भी प्रतिनियुक्ति पर जाना होगा अगर वो आने में आनाकानी करते हैं तो भविष्य में प्रतिनियुक्ति के लिए उनका नाम पैनल में शामिल नहीं किया जाएगा साथ ही प्रतिकूल प्रविष्टी भी होगी. हालांकि केंद्र सरकार ने इस तरह का संशोधन 2019 में भी करने की कोशिश की थी मगर गैर-भाजपा शासित राज्यों ने इसका विरोध किया था जिसके चलते ये ठंडे बस्ते में चला गया था.

केंद्रीय एजेंसियों पर दिखता है खाली पदों का असर
गृह मंत्रालय के आंकड़ों की बात करें तो इस वक्त आईपीएस अधिकारियों के देश में 4,982 पद हैं. इनमें 3,452 सीधे भारतीय पुलिस सेवा से भरे जाते हैं जबकि 1,530 पदों पर राज्यों की पुलिस सेवा के पदोन्नत अफसरों की तैनाती होती है. अभी 4,074 पद ही भरे हैं बाकी पद खाली हैं. इन खाली पदों का असर केंद्रीय एजेंसियों पर सबसे ज्यादा दिखाई देता है. डीआईजी स्तर के 252 में से 118 पद खाली हैं. एसपी रैंक के लगभग 50 प्रतिशत पद खाली हैं.

जिसका सीधा असर केंद्र सरकार के काम काज पर पड़ रहा है. आपको बता दें कि ज्यादातर आईजी रैंक के अधिकारी ही प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सेवा में आते हैं. क्योंकि कानून व्यवस्था की दुहाई देते हुए राज्य सरकारें एसपी-डीआईजी रैंक के अधिकारियों को रिलीव नहीं करती हैं.

Tags: Central Government employees, UP police

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