यूपी की जेल में सबसे ज्यादा इंजीनियर और पोस्ट-ग्रैजुएट, महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर

यूपी की जेल में बंद हैं सबसे ज्यादा पढ़े लिखे कैदी.
यूपी की जेल में बंद हैं सबसे ज्यादा पढ़े लिखे कैदी.

राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो (NCRB) की क्राइम रिपोर्ट (Crime Report) के मुताबिक उत्तर (Uttar Pradesh) प्रदेश के बाद महाराष्ट्र (Maharashtra) का नंबर आता है जहां सबसे ज्यादा पढ़े लिखे कैदी बंद हैं, जबकि कर्नाटक (Karnataka) का नंबर इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 9:56 AM IST
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नई दिल्ली. कहते हैं पढ़ा लिखा आदमी अपराध (Crime) करने से पहले कई बार सोचता है, लेकिन राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो (NCRB) की क्राइम रिपोर्ट (Crime Report) कुछ और ही आंकड़े पेश कर रही है. एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की जेलों (jail) में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे कैदी बंद हैं. इसमें ज्यादातर इंजीनियर या पोस्ट-ग्रैजुएट कैदी है. रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र (Maharashtra) का नंबर आता है जहां सबसे ज्यादा पढ़े लिखे कैदी बंद हैं. जबकि कर्नाटक (Karnataka) का नंबर इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर है.

एनसीआरबी की क्राइम इन इंडिया की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरप्रदेश भारत का ऐसा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा इंजीनियर, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा धारक कैद हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भारत की जेलों में टेक्निकल डिग्री रखने वाले तकरीबन 3 हजार 740 कैदी बंद हैं. इनमें से सबसे ज्यादा यूपी की जेलों में हैं. उत्तर प्रदेश की जेल में 727 कैदी ऐसे हैं, ​जिनके पास टेक्निकल डिग्री है. इसके बाद महाराष्ट्र में 495 कैदियों के पास जबकि कनार्टक के 362 कैदियों के पास टेक्निकल डिग्री है. भारत की जेलों में बंद 5282 कैदियों के पास पोस्टग्रैजुएट डिग्री है. इनमें से 2010 कैदी उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद हैं.

उत्तर प्रदेश के जेल महानिदेशक (डीजी) आनंद कुमार ने बताया कि टेक्निकल डिग्री रखने वाले ज्यादातर कैदियों पर दहेज हत्या और बलात्कार जैसे आरोप हैं. इसके साथ ही कुछ ऐसे भी है जो किसी आर्थिक अपराध के चलते जेल में बंद हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भारत के जेलों में अलग अलग अपराध के चलते 3 लाख 30 हजार 487 कैदी सजा काट रहे हैं. आनंद कुमार ने बताया कि पढ़े लिखे कैदियों के कौशल का इस्तेमाल जेल के अंदर अन्य कैदियों को प्रशिक्षित करने में किया जा रहा है.
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उत्तर प्रदेश के जेल महानिदेशक (डीजी) आनंद कुमार ने बताया कि जेल में बंद टेक्निकल डिग्री वाले कैदियों ने ही कई जेलों में ई जेल परिसर विकसित किया है. इसके साथ ही इन कैदियों ने जेल इन्वेंट्री सिस्टम के कम्प्यूटरीकरण में मदद की है. इसके साथ ही कुछ कैदियों ने जेल परिसर के अंदर जेल रेडियो की भी शुरुआत की है.
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