कोरोना की जंग जीतना नहीं है आसान, COVID-19 टेस्टिंग में पिछड़े पश्चिम बंगाल, यूपी, एमपी और बिहार

कोरोना की जंग जीतना नहीं है आसान, COVID-19 टेस्टिंग में पिछड़े पश्चिम बंगाल, यूपी, एमपी और बिहार
गुजरात में भी बढ़ रहे हैं कोरोना के केस.

सबसे अधिक कोरोना केस वाले 15 राज्यों में पश्चिम बंगाल में कोरोना जांच की रफ्तार काफी कम है. यहां पर प्रति 10 लाख लोगों पर केवल 230 लोगों की जांच की गई है.

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नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित मरीजों का बढ़ता ग्राफ देश के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. कोरोना (Corona) की जंग जीतनी है तो संदिग्धों की ज्यादा से ज्यादा जांच करनी जरूरी है. इन सबके बावजूद बहुत से राज्य कोरोना जांच में COVID-19 टेस्ट के राष्ट्रीय औसत से भी काफी पीछे चल रहे हैं. पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में हालात और भी ज्यादा खराब हैं. ये राज्य कोरोना टेस्ट (Corona test) राष्ट्रीय औसत से 25 प्रतिशत तक पीछे चल रहे हैं.बता दें कि देशभर में अबतक 10 लाख से अधिक लोगों का कोरोना टेस्ट कराया जा चुका है. इसके साथ ही प्रति 10 लाख आबादी पर टेस्ट भी बढ़कर 818 हो गया है.

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से जारी किए आंकड़े केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा सकते हैं. दरअसल बहुत से राज्यों में कोरोना संक्रमित संदिग्ध मरीजों की जांच की रफ्तार काफी धीमें है. सबसे अधिक कोरोना केस वाले 15 राज्यों में पश्चिम बंगाल में कोरोना जांच की रफ्तार काफी कम है. यहां पर प्रति 10 लाख लोगों पर केवल 230 लोगों की जांच की गई है. इसके बाद बिहार का नंबर आता है. यहां पर प्रति 10 लाख पर केवल 267 लोगों की जांच की गई है. उत्तर प्रदेश की स्थिति भी अच्छी नहीं दिखाई दे रही है. यूपी में प्रति 10 लाख पर 429 टेस्ट ही कराए जा रहे हैं. जबकि मध्य प्रदेश जहां कोरोना के मामलों ने राज्य सरकार की नींद उड़ा दी है वहां भी प्रति 10 लाख पर 642 टेस्ट ही किए जा सके हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस संबंध में चिंता जताते हुए कहा गया है कि कई राज्यों में टेस्ट किट सही नहीं मिलने के कारण जांच में समय लग रहा है. इससे स्पष्ट हो गया है कि राज्य अगर सही तरीके से टेस्ट करें तो संक्रमितों की संख्या में तेजी देखी जा सकती है. भारत में पिछले 24 मार्च से लॉकडाउन की घोषणा किए जाने के बाद से ही देशभर में कोरोना टेस्ट कराए जाने की बात कही जा रही है. जानकारों ने भी साफ तौर पर कहा है कि जब तक बड़े पैमाने पर टेस्टिंग नहीं की जाती तब तक देश को कोविड-19 से होने वाले खतरे का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकेगा.



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दिल्ली में प्रति 10 लाख पर किए 3,486 टेस्ट
दिल्ली सरकार ने तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमित मरीजों को देखते हुए राज्य में टेस्ट को युद्धस्तर पर बढ़ा दिया था. यहां पर प्रति 10 लाख पर 3,486 टेस्टिंग की गई है जो राष्ट्रीय औसत का तकरीबन चार गुना है. इसके बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने भी अपने राज्य में कोरोना संदिग्धों के टेस्ट किए हैं. यहां पर प्रति 10 लाख पर 2313 टेस्ट, जम्मू कश्मीर में 2083, तमिलनाडु में 1932, राजस्थान में 1668 और महाराष्ट्र में 1423 टेस्ट किए गए हैं.

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