बुजुर्ग पिटाई: यूपी पुलिस लोनी FIR मामले में ट्विटर और अन्य आरोपियों को जारी करेगी नोटिस

सूफी अब्दुल समद, जिन्होंने दावा किया कि उन पर हमला किया गया और उन्हें 'जय श्री राम' बोलने के लिए मजबूर किया गया. (File Photo)

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने कहा कि गाज़ियाबाद का लोनी बहुत संवेदनशील इलाका है, कुछ महीने पहले दिल्ली भयानक दंगों का गवाह बना था, कुछ ट्वीट की वजह से यहां वैमनस्य बढ़ा और सांप्रदायिक तनाव फैल गया.

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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश पुलिस लोनी एफआईआर में दर्ज सभी आरोपियों को नोटिस जारी करेगी. इनमें ट्विटर भी शामिल है. सभी को जांच में शामिल होने को कहा जाएगा. यूपी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ( कानून व्यवस्था) प्रशांत किशोर ने न्यूज 18 को यह जानकारी दी. यूपी पुलिस ने लोनी मामले में जहां एक बुजुर्ग मुस्लिम को बुरी तरह पीटा गया था, ट्विटर सहित कुछ लोगों पर ट्वीट के ज़रिये गलत जानकारी फैलाने का आरोप दर्ज किया है. पुलिस का कहना है, ‘यूपी पुलिस के इस मामले में स्पष्टीकरण देने के बाद ट्विटर को उन लोगों को चेताना चाहिए था जिन्होंने गलत जानकारी डाली थी या उन्हें सत्यता की जांच करते हुए पोस्ट को डिलीट कर देना चाहिए था.’ हम इस मामले में शामिल सभी आरोपियों को जिसमें ट्विटर भी शामिल है, नोटिस जारी करेंगे, हमें किसी से कोई पूर्वाग्रह नहीं है, बस हम मामले में न्यायपूर्वक जांच करना चाहते हैं.

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने कहा कि गाज़ियाबाद का लोनी बहुत संवेदनशील इलाका है, कुछ महीने पहले दिल्ली में भयानक दंगों हुए थे. कुछ ट्वीट की वजह से यहां वैमनस्य बढ़ाया और सांप्रदायिक तनाव फैल गया. उन्होंने बताया कि इसके बाद पुलिस ने कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर से पोस्ट पर स्पष्टीकरण मांगा और इसे हटाने की गुज़ारिश भी की. जब एक बार स्पष्टीकरण हो गया था तो उन्हें पोस्ट हटा देनी चाहिए थी और आगे पोस्ट नहीं करनी चाहिए थी, लेकिन ट्विटर ने ना तो कोई सफाई दी और ना ही पोस्ट को डिलीट किया.

निगरानी के लिए तंत्र जरूरी
पुलिस का कहना था कि एक आरोपी ने अपना ट्वीट बाद में हटाया भी था. हर संस्थान के पास एक तंत्र ऐसा होता है जो इस पर निगरानी रखता है, मतलब अगर आप ट्विटर पर कुछ लिखते हो, कोई तो ऐसा ज़रूर होना चाहिए जो उस पर निगाह रखे और बता सके कि ये गलत है. न्यूज18 को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे पुलिस, सरकार या प्रशासन को बदनाम नहीं कर सकते हैं. उनका ये भी कहना था कि उसमें से एक वीडियो में पीड़ित की आवाज़ के साथ छेड़खानी भी की गई थी, यूपी पुलिस इसकी भी जांच कर रही है.

वहीं उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एच.सी. अवस्थी ने न्यूज 18 को बताया कि इस मामले में कहीं से भी हिंदू-मुस्लिम विवाद नहीं था. ये पूरी तरह से एक निजी लड़ाई थी. हमने सारी जानकारी एकत्र करके एफआईआर दर्ज कर ली थी. हम नहीं चाहेंगे कि इस तरह की गलत जानकारी को अंजाम दिया जाए. ये पूरी तरह से सांप्रदायिक संवेदनाओं को उकसाने की कोशिश थी जिसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अवस्थी का कहना है कि जिन्होंने भी ये बेवजह का विवाद भड़काने की कोशिश की है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. कुमार बात आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि पीड़ित ताबीज बनाने का काम करता है और जिन्होंने उसे पीटा जिसमें मुस्लिम भी शामिल थे, उनका कहना था कि उसका ताबीज किसी काम का नहीं था और उसे पहनने के बाद भी कोई असर नहीं हुआ था.

26 मई को प्रभाव में आए नए आईटी कानून जिसका ट्विटर ने अभी तक पालन करना शुरू नहीं किया है उत्तर प्रदेश सरकार पहली है जिसने उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है. सोशल मीडिया कंपनी को सुरक्षा के दृष्टिकोण से और गलत खबरों के फैलने से बचने के लिए नए आईटी कानून का पालन करना है.

उत्तर प्रदेश ने देर रात ट्विटर के खिलाफ गाजियाबाद के लोनी के बुजुर्ग मुस्लिम को लेकर जो सामग्री डाली गई थी उसे नहीं हटाने को लेकर एफआईआर दर्ज की है. अधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में इस मामले के बाद जो तनाव बढ़ रहा था उसे लेकर केंद्र सरकार भी चिंता में थी.

ट्विटर के खिलाफ इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 153,153 ए, 295ए, 120 बी, और 34 में सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने, और आपराधिक साज़िश का मामला बनाया है. जिसमें 3 साल तक की जेल हो सकती है.

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