विधानसभा चुनाव: हरियाणा में 75 सीट जीतने का रिकॉर्ड तोड़ेगी बीजेपी, ये है समीकरण!

हरियाणा विधानसभा चुनाव: 1977 में जनता पार्टी ने 90 में से 75 सीटें जीती थीं. यह रिकॉर्ड आज तक कोई तोड़ नहीं पाया है

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 21, 2019, 5:49 PM IST
विधानसभा चुनाव: हरियाणा में 75 सीट जीतने का रिकॉर्ड तोड़ेगी बीजेपी, ये है समीकरण!
मोदी लहर के भरोसे हरियाणा में बीजेपी ने दिया है 75 प्लस का नारा!
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 21, 2019, 5:49 PM IST
राजनीतिक दलों ने हरियाणा विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. बीजेपी ने 75 प्लस का नारा दिया है. यहां कुल 90 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 75 से अधिक पर जीत का टारगेट है. यह इतना बड़ा लक्ष्य है कि अगर इसे बीजेपी पा लेती है तो प्रदेश में विपक्ष बचेगा ही नहीं. बीजेपी यह टारगेट पा सकेगी या नहीं लेकिन हरियाणा में यह करिश्मा एक बार हो चुका है. 1977 में जनता पार्टी ने 90 में से 75 सीटें जीती थीं. आज तक यह रिकॉर्ड कोई तोड़ नहीं पाया. सवाल यही है कि क्या बीजेपी इस रिकॉर्ड को तोड़कर नया कीर्तिमान बना पाएगी?

इस समय बीजेपी के पास 48 सीटें हैं. जबकि लोकसभा की सभी 10 सीटें भी भाजपा की ही झोली में हैं. लोकसभा चुनाव का विधानसभावार विश्लेषण करने पर पता चलता है कि 89 सीटों पर बीजेपी अन्य पार्टियों से आगे थी. साफ है कि पार्टी ने 75 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य यूं ही नहीं लिया. बीजेपी को सबसे ज्यादा विश्वास मोदी लहर पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी हरियाणा में बीजेपी के प्रभारी हुआ करते थे. बीजेपी का आत्मविश्वास कमजोर विपक्ष से भी बढ़ा हुआ है. कांग्रेस का जिलों में संगठन नहीं है. हुड्डा और चौटाला परिवारों की जनता पर पकड़ पहले से कमजोर नजर आ रही है. ऐसे में बीजेपी को यह टारगेट आसान लगता है.

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बीजेपी प्रवक्ता राजीव जेटली का कहना है कि कुछ पार्टियां अपने परिवार के लिए काम कर रही हैं जबकि हम जनता को परिवार मानकर काम कर रहे हैं. इसलिए जनता विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस, इनेलो और जेजेपी को नकार कर बीजेपी को कुर्सी सौंपेगी. हालांकि, हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा का मानना है कि यह 75 सीट जीतने का रिकॉर्ड तोड़ पाना आसान नहीं है. लेकिन अभी जिस तरह की बीजेपी की लहर है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना सकती है.

चौटाला परिवार में बिखराव का फायदा किसे? 

जाटों की सबसे बड़ी पार्टी इनेलो कही जाती थी लेकिन चौटाला परिवार में कलह के बाद यह पार्टी टूट गई. इनेलो से निकलकर अजय, दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला ने जन नायक जनता पार्टी (जेजेपी) नाम से एक नई पार्टी बना ली है. इस बिखराव के बाद जींद उप चुनाव और लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों का टेस्ट हुआ और पाया गया कि वे अलग होने के बाद काफी कमजोर हो गए. क्योंकि जाट वोट बंट गए.

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पिछला चुनाव अक्टूबर 2014 में हुआ था. बीजेपी ने यह चुनाव बिना चेहरे के लड़ा था. पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी ने कांग्रेस के गढ़ रहे इस प्रदेश में 47 सीटें जीतीं. पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. आरएसएस प्रचारक मनोहरलाल खट्टर को सीएम बनाया गया. माना जा रहा है कि बीजेपी मनोहरलाल खट्टर के ही चेहरे पर ही 2019 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी. जींद उप चुनाव जीतने के बाद बीजेपी के पास 48 सीट हो गईं हैं. इनेलो और कांग्रेस के पास सिर्फ 17-17 सीटें हैं.

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