RTI में नहीं बताए जा सकते UPSC के मार्क्स, SC ने खारिज किया रिव्यू पिटीशन

सुप्रीम कोर्ट (फ़ाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फ़ाइल फोटो)

जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने कहा था कि अंकों को सार्वजनिक करने का मूल्यांकन प्रक्रिया पर गहरा नकरात्मक असर पड़ सकता है.

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  • Last Updated: September 15, 2018, 11:05 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन यानी UPSC सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत सिविल सर्विसेज़ परीक्षा का अंक बताने के लिए बाध्य नहीं है. दरअसल इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की गई थी, जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को ही बरकरार रखा है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल फरवरी में दिल्ली हाईकोर्ट के पांच साल पुराने एक फैसले को खारिज़ करते हुए कहा था कि RTI के तहत अंक बताना जरूरी नहीं है. जस्टिस उदय यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, "हम समीक्षा याचिकाओं की सारी चीजें देख चुके हैं. हमें इसमें कोई गलतियां नहीं दिख रही है. रिव्यू पिटीशन को खारिज कर रहे हैं."

इससे पहले फरवरी में जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और उदय यू ललित की बेंच ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि अंकों को सार्वजनिक करने का गहरा नकरात्मक असर मूल्यांकन प्रक्रिया पर पड़ सकता है. इससे न केवल प्रतिष्ठा बल्कि सिस्टम की अखंडता के साथ समझौता करने के बराबर होगा.



सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दूसरे शैक्षणिक निकायों की परीक्षाओं की स्थिति अलग होती है. हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि अगर कोई मामला सामने आया है, जहां लगता है कि सार्वजनिक हित में जानकारी देने की आवश्यकता है, तो कोर्ट निश्चित रूप से ऐसा करने के लिए हकदार है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था 'सूचना का अधिकार, जनहित, सरकार के कुशल कामकाज, वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और संवेदनशील जानकारी की गोपनीयता में संतुलन बनाना ज़रूरी है.

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