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UPSC ने पूछा, क्या धर्मनिरपेक्षता ने संस्कृति को कमजोर किया? लोगों ने उठाए सवाल

यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा में धर्मनिरपेता (Secularism) को लेकर पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद पैदा हो गया है. जिस सवाल को लेकर यह विवाद हुआ, वह था- धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हमारे सांस्कृतिक दस्तूर (Cultural Practice) के सामने क्या चुनौतियां पैदा हुई हैं?

यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा में धर्मनिरपेता (Secularism) को लेकर पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद पैदा हो गया है. जिस सवाल को लेकर यह विवाद हुआ, वह था- धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हमारे सांस्कृतिक दस्तूर (Cultural Practice) के सामने क्या चुनौतियां पैदा हुई हैं?

यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा में धर्मनिरपेता (Secularism) को लेकर पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद पैदा हो गया है. जिस सवाल को लेकर यह विवाद हुआ, वह था- धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हमारे सांस्कृतिक दस्तूर (Cultural Practice) के सामने क्या चुनौतियां पैदा हुई हैं?

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली: यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा में धर्मनिरपेता (Secularism) को लेकर पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद पैदा हो गया है. जिस सवाल को लेकर यह विवाद हुआ, वह था- धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हमारे सांस्कृतिक दस्तूर (Cultural Practice) के सामने क्या चुनौतियां पैदा हुई हैं?

    शनिवार को जनरल स्टडीज पेपर-1 की परीक्षा में कैंडिडेट धर्मनिरपेक्षता (Secularism) पर पूछे गए एक सवाल को लेकर असमंजस में दिखे. इस सवाल में पूछा गया था कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर देश के सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में था. अभ्यर्थियों को इस सवाल का उत्तर 150 शब्दों में देना था.

    कैंडिडेट्स बोले 'धर्मनिरपेक्षता एक आदर्श'
    हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस परीक्षा में शामिल होने वाले एक कैंडिडेंट ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता भारतीय संवैधानिक मूल्यों (Constitutional Morality) के आदर्श के रूप में देखी जाती है और इसे सकारात्मक तरीके से देखा जाना चाहिए. एक दूसरे कैंडिडेट ने कहा कि ऐसे सवालों को नहीं पूछा जाना चाहिए.

    वहीं IAS के लिए ALS कोचिंग संस्थान चलाने वाले सचिन अरोड़ा ने कहा है कि ऐसे सवाल पूछे जाने की UPSC की स्वतंत्रता को नकारा नहीं जा सकता है.

    लोगों ने #upsc के साथ ट्वीट कर उठाए सवाल
    इसके बावजूद इस सवाल को लेकर इंटरनेट (Internet) पर बवाल हो गया है और #upsc के साथ लोग इस सवाल के पूछे जाने को लेकर ट्विटर (Twitter) पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

    हाल ही में IAS से इस्तीफा देने वाले कन्नन गोपीनाथन ने भी इस सवाल के मसले को उठाया है. उन्होंने लिखा है, भारतीय धर्म निरपेक्षता एक सकारात्मक अवधारणा है, जो सभी सांस्कृतिक दस्तूरों (Cultural Practices) को साथ लेकर चलती है और उसे बढ़ावा देती है. यह अंधविश्वास और नुकसान पहुंचाने वाली प्रथाओं के खिलाफ वैज्ञानिक मानसिकता को बढ़ावा देती है.



    इससे पहले 'पूर्वाग्रही मीडिया भारतीय लोकतंत्र (Indian Democracy) के लिए एक बड़ा खतरा है', प्रश्न पर भी लोगों ने सवाल खड़े किए थे. यह सवाल शुक्रवार को निबंध के पेपर में पूछा गया था.

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