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अमेरिका को उम्मीद, एनएसजी पर चीन की अड़चन होगी दूर

अमेरिका को उम्मीद, एनएसजी पर चीन की अड़चन होगी दूर

एनएसजी में प्रवेश की भारत की कोशिशों पर चीन द्वारा ओबामा प्रशासन का खुलकर विरोध किए जाने के बाद निवर्तमान अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने विश्वास जताया कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार चीनी अवरोध को दूर करने में कामयाब होगी।

एनएसजी में प्रवेश की भारत की कोशिशों पर चीन द्वारा ओबामा प्रशासन का खुलकर विरोध किए जाने के बाद निवर्तमान अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने विश्वास जताया कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार चीनी अवरोध को दूर करने में कामयाब होगी।

एनएसजी में प्रवेश की भारत की कोशिशों पर चीन द्वारा ओबामा प्रशासन का खुलकर विरोध किए जाने के बाद निवर्तमान अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने विश्वास जताया कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार चीनी अवरोध को दूर करने में कामयाब होगी।

    नई दिल्ली। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में प्रवेश की भारत की कोशिशों पर चीन द्वारा ओबामा प्रशासन का खुलकर विरोध किए जाने के एक दिन बाद निवर्तमान अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने मंगलवार को विश्वास जताया कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार चीनी अवरोध को दूर करने में कामयाब होगी।

    वर्मा ने कहा कि राष्ट्रपति बराक ओबामा, विदेश मंत्री जॉन केरी और कई अन्य लोगों ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता पर जोर देने की दिशा में काम किया है और अमेरिका इस पर काम करता रहेगा। चीन ने कहा था कि विदाई उपहार के रूप में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं करने वाले देशों का एनएसजी में प्रवेश नहीं हो सकता। ओबामा प्रशासन ने कहा था कि भारत को एनएसजी का सदस्य बनाने की कोशिशों में बीजिंग अवरोधक है। इसके बाद चीन की प्रतिक्रिया आई है।

    वर्मा ने कहा कि इस पर हम काम करते रहेंगे। भारत की सदस्यता के लिए भरपूर समर्थन है क्योंकि हमने कहा था कि हम एनएसजी में भारत के प्रवेश का पुरजोर समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि ये चीजें जटिल हैं, इनमें समय लगता है, ये बहुपक्षीय हैं। हमें चीन समेत उन देशों के साथ काम करते रहना होगा जिनकी कुछ चिंताएं हो सकती हैं। लेकिन मेरा मानना है कि आखिर में वहां हमारी मौजूदगी होगी।

    रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद की कमान संभालने जा रहे हैं। उससे पहले पद से हटने वाले वर्मा ने कहा कि अमेरिका एनएसजी और अन्य निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं में भारत की कोशिशों का पुरजोर समर्थन करता रहा है। वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी भारत की सदस्यता का पक्षधर है। उन्होंने यहां एक समारोह से इतर कहा कि ये सभी चीजें राष्ट्रपति ओबामा के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहीं हैं और मेरा विश्वास है कि ये प्राथमिकता में रहेंगी। भारत को अधिकतर देशों का समर्थन होने के बावजूद चीन 48 सदस्यीय समूह में भारत की कोशिशों को बाधित कर रहा है। चीन इस आधार पर भारत की कोशिशों को बाधित कर रहा है कि भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

    चीन ने अमेरिका से कहा, भारत की एनएसजी सदस्यता विदाई उपहार नहीं हो सकती

    चीन ने सोमवार को कहा था कि एनएसजी में परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों का प्रवेश वह विदाई उपहार नहीं हो सकता जो कि देश एक दूसरे को दे सकें। चीन के इस बयान से एक दिन पहले निर्वतमान ओबामा प्रशासन ने दावा किया था कि इस विशिष्ट परमाणु समूह में भारत को एक सदस्य बनाने के प्रयासों के मामले में चीन अलग थलग पड़ गया है।

    Tags: America, China, India

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