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अमेरिकी सांसद ने कहा, जमात-ए-इस्लामी से जुड़े संगठन हैं कश्मीर में हिंसा के जिम्‍मेदार 

News18Hindi
Updated: November 14, 2019, 7:00 PM IST
अमेरिकी सांसद ने कहा, जमात-ए-इस्लामी से जुड़े संगठन हैं कश्मीर में हिंसा के जिम्‍मेदार 
अमेरिकी सांसद जिम बैंक्‍स ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी एक हिंसक समूह है.

अमेरिकी सांसद जिम बैंक्‍स (Jim Banks) ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी (जम्‍मू-कश्‍मीर) हिंसक समूह है. यह संगठन अल्पसंख्यक ईसाइयों, हिंदुओं, बौद्धों और अहमदियों के खिलाफ हिंसक वारदातों को अंजाम देता है. इंडियाना से रिपब्लिकन (Republican) सांसद ने कहा, कश्मीर (Kashmir) में हिंसा (Violence) की अधिकतर घटनाओं का संबंध जमात-ए-इस्लामी और उसके आतंकवादी साझेदारों से जुड़े़ संगठनों से है. भारत ने इसी साल इस संगठन को प्रतिबंधित (Ban) कर दिया है.

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  • Last Updated: November 14, 2019, 7:00 PM IST
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वाशिंगटन. अमेरिका के एक सांसद (US congressional) ने कहा कि कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) में ज्यादातर हिंसा के जिम्‍मेदार अलगाववादी संगठन जमात-ए-इस्लामी (Jamaat-E-Islami) और उस से जुड़े संगठन हैं. उन्होंने कहा कि इस समूह ने हिंदुओं और ईसाइयों समेत अल्पसंख्यक समूहों (Minorities) के खिलाफ जमकर हिंसा (Violence) की है. अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य जिम बैंक्स (Jim Banks) ने बुधवार को पश्चिम एशिया फोरम की एक संगोष्ठी में ये टिप्पणियां की. यह कार्यक्रम साउथ एशिया माइनॉरिटीज एलायंस फाउंडेशन (SAMAF) के सहयोग से आयोजित किया गया था.

'जमात हिंसक वारदातों को देता है अंजाम'
जिम बैंक्‍स ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी एक हिंसक समूह है. यह समूह अल्पसंख्यक ईसाइयों, हिंदुओं, बौद्धों और अहमदियों के खिलाफ हिंसक वारदातों को अंजाम देता है. इंडियाना से रिपब्लिकन (Republican) सांसद ने कहा, 'कश्मीर में हिंसा की अधिकतर घटनाओं का संबंध जमात-ए-इस्लामी और उसके आतंकवादी साझेदारों से जुड़े़ संगठनों से है.' भारत ने इस साल की शुरुआत में जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) को पांच साल के लिए प्रतिबंधित (Ban) किया था. उसे प्रतिबंधित करने का आधार बताया गया था कि वह आतंकवादी संगठनों (Terror Organisations) के करीबी संपर्क में है. यह संगठन जम्मू-कश्मीर और अन्य जगहों पर चरमपंथ व आतंकवाद को समर्थन तथा बढ़ावा दे रहा है.

भारत ने जमात पर लगा दिया है प्रतिबंध

पुलवामा हमले (Pulwama Attack) के बाद केंद्र सरकार आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए लगातार प्रयास कर रही थी. एक के बाद एक अहम कदम उठाए जा रहे थे. इसी क्रम में सरकार ने जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे संगठन जमात-ए-इस्लामी पर 5 साल तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया. गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के बाद यह फैसला लिया था. जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) की घाटी की राजनीति में अहम भूमिका रही है. साल 1971 से इसने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया. पहले चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं करने के बाद आगे के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया. हालांकि अब इसे सूबे में अलगाववाद और आतंकवाद के प्रसार के लिए जिम्मेदार संगठन माना जाता है.

केंद्र सरकार ने इसी साल जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे संगठन जमात-ए-इस्लामी पर 5 साल का प्रतिबंध लगाया है.


हिजबुल का दाहिना हाथ है जमात-ए-इस्‍लामी
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जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) के बारे में माना जाता है कि यह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन (Hizbul Mujahideen) का दाहिना हाथ है. हिजबुल मुजाहिदीन को जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) ने ही खड़ा किया है. हिजबुल मुजाहिदीन को इस संगठन ने हर तरह की सहायता दी है. बता दें कि इससे पहले भी दो बार इस संगठन को बैन किया जा चुका था. पहली बार जम्मू-कश्मीर सरकार (Jammu-Kashmir Government) ने इस संगठन को 1975 में 2 साल के लिए प्रतिबंधित किया था, जबकि दूसरी बार केंद्र सरकार (Central Government) ने 1990 में इस पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया था. ये प्रतिबंध दिसंबर, 1993 तक जारी रहा था.

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First published: November 14, 2019, 7:00 PM IST
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