कश्मीर: विशेषज्ञों की अमेरिका को चेतावनी, PAK का साथ दिया तो पड़ेगा भुगतना!

काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अध्यक्ष रिचर्ड एन हॉस ने पिछले सप्ताह लिखे एक लेख में साफ कहा है कि पाकिस्तान (Pakistan) की ओर रणनीतिक साझेदार के तौर पर अमेरिका (America) का झुकाव अविवेकपूर्ण होगा.

भाषा
Updated: August 19, 2019, 6:49 PM IST
कश्मीर: विशेषज्ञों की अमेरिका को चेतावनी, PAK का साथ दिया तो पड़ेगा भुगतना!
अमेरिकी विशेषज्ञ ने पाकिस्तान का साथ कश्मीर मुद्दे पर न देने की सलाह अमेरिका को दी है (फाइल फोटो)
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Updated: August 19, 2019, 6:49 PM IST
कश्मीर (Kashmir) को लेकर भारत और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच तनाव और अफगान शांति वार्ता (Afghan Peace Talks) जारी रहने के बीच अमेरिका (America) के एक शीर्ष विदेश नीति विशेषज्ञ ने पाकिस्तान की ओर किसी रणनीतिक झुकाव और भारत से दूर जाने के प्रति आगाह किया है. काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अध्यक्ष रिचर्ड एन हॉस ने पिछले सप्ताह लिखे एक लेख में कहा, ‘‘पाकिस्तान की ओर रणनीतिक साझेदार के तौर पर अमेरिका का झुकाव अविवेकपूर्ण होगा.’’

रिचर्ड एन हॉस ने अपने लेख को पहले प्रोजेक्ट सिंडिकेट और उसके बाद CFR वेबसाइट द्वारा प्रकाशित किया गया. उन्होंने लेख में लिखा है कि पाकिस्तान काबुल (Kabul) में एक दोस्ताना सरकार को अपनी सुरक्षा और चिर प्रतिद्वंद्वी भारत के लिहाज से जरूरी मानता है. हॉस ने कहा, ‘‘यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं हैं कि सेना और गुप्तचर एजेंसियां जो अभी भी पाकिस्तान को चलाती हैं वे तालिबान पर लगाम लगाएंगी या आतंकवाद का खात्मा करेंगी.’’

'भविष्य की बड़ी अर्थव्यवस्था भारत पर दांव लगाना अमेरिका के लिए होगा अच्छा'
रिचर्ड एन हॉस ने अपने लेख में लिखा, ‘‘इसके साथ ही अमेरिका का भारत को दूर करना अविवेकपूर्ण होगा. हां, भारत की संरक्षणवादी व्यापार नीति की एक परंपरा रही है और वह रणनीतिक मुद्दों पर पूर्ण सहयोग के प्रति अपनी अनिच्छा से अमेरिकी नीति-निर्माताओं को अक्सर निराश करता है.’’ यद्यपि लोकतांत्रिक भारत विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या के मामले में चीन को जल्द ही पीछे छोड़ देगा और उसकी अर्थव्यवस्था विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (Fifth Largest Economy) होगी और उस पर दीर्घकालिक दांव लगाना अच्छा होगा.

चीन के मुकाबले में भारत ही दे सकता है अमेरिका का साथ
रिचर्ड एन हॉस ने अपने लेख में कहा, ‘‘चीन को संतुलित करने के लिए वो (भारत) एक स्वाभाविक साझेदार है. भारत ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (Belt and Road Initiative) में भागीदारी से इनकार कर दिया है जबकि पाकिस्तान ने उसे स्वीकार कर लिया है जिसकी अर्थव्यवस्था संघर्ष के दौर से गुजर रही है.’’ शीर्ष अमेरिकी विशेषज्ञ के अनुसार अमेरिका की अफगानिस्तान से बाहर निकलने की होड़ भी अविवेकपूर्ण होगी. उन्होंने दावा किया कि तालिबान के साथ शांतिवार्ता अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों को निकालने का माध्यम दिखती प्रतीत होती है.

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First published: August 19, 2019, 6:14 PM IST
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