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अमेरिका ने कश्मीर में इंटरनेट पर पाबंदी और नेताओं की हिरासत पर चिंता जताई

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Updated: January 12, 2020, 5:56 AM IST
अमेरिका ने कश्मीर में इंटरनेट पर पाबंदी और नेताओं की हिरासत पर चिंता जताई
अमेरिका ने कश्मीर में नेताओं को हिरासत में रखने और इंटरनेट पर लगी पाबंदियों पर चिंता जताई है (न्यूज18 क्रिएटिव, मीर सुहैल)

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो (SCA) ने ट्वीट किया कि वह भारत में अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर तथा अन्य विदेशी राजनयिकों की जम्मू-कश्मीर यात्रा (Jammu-Kashmir Visit) पर बारीकी से नजर रखे हुए है.

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  • Last Updated: January 12, 2020, 5:56 AM IST
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वाशिंगटन. अमेरिकी विदेश मंत्रालय (US State Department) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में इंटरनेट पर पाबंदी (Internet Ban) और नेताओं की हिरासत पर शनिवार को चिंता जाहिर की.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो (SCA) ने ट्वीट किया कि वह भारत में अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर तथा अन्य विदेशी राजनयिकों की जम्मू-कश्मीर यात्रा (Jammu-Kashmir Visit) पर बारीकी से नजर रखे हुए है.

'हम नेताओं और निवासियों की हिरासत ता इंटरनेट पाबंदियों से चिंतित'
ब्यूरो ने ट्वीट किया, 'हम नेताओं (Leaders) और निवासियों की हिरासत तथा इंटरनेट पाबंदियों (Internet Ban) से चिंतित हैं. हम हालात समान्य होने की उम्मीद करते हैं. सब अच्छा हो.'



इससे पहले जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में आर्टिकल-370 (Article 370) हटाने के बाद से लगाई गई रोक पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "कश्मीर में हमारी प्राथमिकता लोगों की स्वतंत्रता और सुरक्षा देना है. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि कश्मीर में अभिव्‍यक्ति की आजादी (Freedom of Speech) सबसे अहम है. इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा है कि बहुत जरूरी होने पर तय समय के लिए ही इंटरनेट बंद किए जाने चाहिए. साथ ही दोहाराया कि अनिश्चितकाल के लिए इंटरनेट को बंद नहीं किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी जरूरी सेवाओं के लिए इंटरनेट शुरू किया जाए."

'ठोस वजह के बिना नहीं बंद किया जा सकता इंटरनेट'
जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि लगातार धारा-144 (Section- 144) का गलत इस्तेमाल किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इंटरनेट लोगों के लिए अभिव्यक्ति की आजादी जैसा है. साथ ही कहा कि यह मौलिक अधिकार जैसा ही है. उन्होंने कहा कि ठोस वजह के बिना इंटरनेट बंद नहीं किया जा सकता." (भाषा के इनपुट सहित)

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First published: January 12, 2020, 5:40 AM IST
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