कोरोना कहां से आया? पता करो, नहीं तो अगली महामारी के लिए तैयार रहो: यूएस विशेषज्ञों ने चेताया

वुहान वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट पर फिर सवाल खड़े किए गए हैं. (तस्वीर-Reuters)

वुहान वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट पर फिर सवाल खड़े किए गए हैं. (तस्वीर-Reuters)

Covid-19 pandemic: वॉल स्ट्रीट जनरल की 23 मई की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी के तीन शोधार्थी 2019 में बुरी तरह बीमार हो गए थे और उनमें कोविड-19 और सामान्य बीमारी दोनों के लक्षण थे.

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नई दिल्ली. कोविड की जड़ कहां पर है, ये कैसे आया और किस तरह पैदा हुआ, ये पता करने के लिए दुनिया को चीन के सहयोग की ज़रूरत है. इसी तरह हम दुनिया को महामारी के खतरे से बचा सकते हैं. यूएस के दो प्रमुख बीमारी विशेषज्ञों ने ये राय जाहिर की है. ट्रंप शासन में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त रहे स्कॉट गोतिलेब का कहना है कि सार्स कोव-2 का वायरस चीन के वुहान की लैब से निकला है, इस बात को बल देने वाली जानकारी ज्यादा निकल कर आ रही हैं. साथ ही चीन ने अभी तक इस बात को नकारने को लेकर कोई सबूत पेश नहीं किये हैं, जिससे इस बात को लेकर शंका और गहरा जाती है. वहीं वन्यजीव से वायरस के इंसानों के शरीर में पहुंचने को लेकर अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है.

वहीं टेक्सास चिल्ड्रन हॉस्पिटल सेंटर फॉर वेक्सीन डेवलपमेंट के को-डायरेक्टर पीटर होटेज का कहना है कि अगर हमें ये नहीं मालूम होगा कि महामारी की शुरुआत कैसी हुई तो हम भविष्य में भी इसके प्रकोप से बच नहीं पाएंगे. अपनी बात को बढ़ाते हुए होटेज कहते हैं कि अगर हम इसकी उत्पत्ति को ठीक तरह से समझ नहीं पाए तो इस तरह तो भविष्य में कोविड-26 और कोविड-32 आ जाएगा.

वुहान के सीफूड मार्केट से जब वायरस के फैलने की बात सामने आई थी, तब से अब तक डेढ़ साल बीत चुके हैं. लेकिन अभी तक वायरस की सही उत्पत्ति की जगह का पता नहीं चल सका है. वैज्ञानिकों का अनुमान था कि ये वायरस जानवरों से इंसानों में पहुंचा था, वहीं वायरस को लेकर एक विचार ये भी था कि ये वायरस रिसर्च लैब से निकला है, रिपब्लिकन पार्टी भी काफी वक्त से ये बात कह रही है और अब बाइडन ने भी इस बात पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी है. जो बाइडन ने इस मुद्दे को लेकर फिर से गुप्तचर एजेंसी को जांच के आदेश दिए हैं कि 90 दिन के भीतर ये पता लगाएं कि ये वायरस जानवरों से इंसानों में आया है या किसी लैब की देन है.

इस बहस को तब हवा लगी जब वॉल स्ट्रीट जनरल की 23 मई की एक रिपोर्ट में लिखा गया कि चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी के तीन शोधार्थी 2019 में बुरी तरह बीमार हो गए थे और उनमें कोविड-19 और सामान्य बीमारी दोनों के लक्षण थे. होटेज का कहना है कि वैज्ञानिकों को एक लंबी जांच के लिए चीन में भेजे जाने की इजाजत मिलनी चाहिए, जिससे वो वहां पर इंसानों और जानवरों के खून का सैंपल ले सकें. यूएस को चीन पर दबाव डालना चाहिए और जांच के आदेश दिए जाने चाहिए.
वहीं चीन के अधिकारियों ने इस बात को राजनीति से प्रेरित कहते हुए वुहान लैब वाली बात से इनकार कर दिया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की मार्च में जारी की गई रिपोर्ट पूरी तरह से तो इस मामले का खुलासा नहीं करती है, लेकिन उसमें लैब से लीक होने की बात ज़रूर आती है. वैश्विक स्वास्थ्य संगठन इस मामले को लेकर गहन जांच चाहते हैं.

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