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22-23 अप्रैल को जलवायु शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे पीएम मोदी, बाइडन के निमंत्रण को किया स्वीकार

जो बाइडेन ने जलवायु परिवर्तन से निपटने पर वार्ता के मकसद से यह बैठक बुलाई है, (फ़ाइल फोटो)

जो बाइडेन ने जलवायु परिवर्तन से निपटने पर वार्ता के मकसद से यह बैठक बुलाई है, (फ़ाइल फोटो)

Climate Summit 2021: इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) द्वारा पीएम मोदी (PM Modi), बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना समेत 40 देश के नेताओं को आमंत्रित किया गया है.

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नई दिल्ली. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22-23 अप्रैल को आयोजित होने वाले जलवायु शिखर सम्मेलन (Climate Change summit) में हिस्सा लेंगे. इस बार जलवायु परिवर्तन से निपटने पर वार्ता के मकसद से आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) द्वारा पीएम मोदी (PM Modi), बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना समेत 40 देश के नेताओं को आमंत्रित किया गया है. गौर करने वाली बात ये है कि जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को आमंत्रित नहीं किया गया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'यह ग्लासगो में इस साल नवंबर में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी26) के मार्ग में एक मील का पत्थर होगा.'

इन देशों के नेताओं को किया गया है आमंत्रित
जलवायु शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा, ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को आमंत्रित किया गया है.
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इन नेताओं के अलावा दक्षिण एशिया से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और भूटान के प्रधानमंत्री लोते शेरिंग को भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है.

2030 उत्सर्जन लक्ष्य की घोषणा
व्हाइट हाउस ने कहा कि शिखर सम्मेलन के आयोजन से पहले अमेरिका पेरिस समझौते के तहत अपने नए राष्ट्रीय निर्धारित अंशदान के रूप में महत्वाकांक्षी 2030 उत्सर्जन लक्ष्य की घोषणा करेगा. व्हाइट हाउस ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन और सीओपी26 का मुख्य लक्ष्य वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के प्रयासों को गति देना है. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सम्मेलन में उन उदाहरणों को भी रेखांकित किया जाएगा कि किस प्रकार जलवायु महत्वाकांक्षा से अच्छे वेतन वाली नौकरियां पैदा होती हैं, नवोन्मेषी तकनीक विकसित करने में मदद मिलती है और कमजोर देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के अनुसार ढलने में सहायता मिलती है.
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