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अमेरिका के तीखे तेवर, भारत से व्यापार विवाद के निपटारे को फिर गया WTO

भाषा
Updated: September 22, 2019, 8:56 PM IST
अमेरिका के तीखे तेवर, भारत से व्यापार विवाद के निपटारे को फिर गया WTO
अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार विवाद मामले में फइर से WTO पहुंचा है (फाइल फोटो)

अमेरिका (America) ने भारत में कुछ सूचना एवं संचार (ICT) उत्पादों पर आयात शुल्क (Import Duty) लगाये जाने के मामले के निपटान के लिये विश्व व्यापार संगठन (WTO) की विवाद समाधान समिति में जाने का फैसला किया है.

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  • Last Updated: September 22, 2019, 8:56 PM IST
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नई दिल्ली. अमेरिका (America) ने भारत में कुछ सूचना एवं संचार (ICT) उत्पादों पर आयात शुल्क (Import Duty) लगाये जाने के मामले के निपटान के लिये विश्व व्यापार संगठन (WTO) की विवाद समाधान समिति में जाने का फैसला किया है. इन आईसीटी उत्पादों में मोबाइल फोन (Mobile Phone), कलपुर्जे, बेस स्टेशन आदि शामिल हैं.

अमेरिका ने जुलाई में भारत द्वारा आईसीटी उत्पादों (ICT Products) पर आयात शुल्क लगाए जाने के मामले में डब्ल्यूटीओ (WTO) में विवाद निपटान व्यवस्था के तहत विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू करने को कहा था. अमेरिका ने भारत पर वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. बहरहाल, दोनों देश विचार विमर्श के जरिये मामले को सुलझाने में असफल रहे हैं, इसलिये अमेरिका ने अब विवाद समाधान समिति गठित करने की मांग की है.

अगस्त की मीटिंग में नहीं हल हो सका विवाद
डब्ल्यूटीओ (WTO) नियमों के तहत किसी व्यापारिक मुद्दे पर उठे विवाद को सुलझाने में द्विपक्षीय विचार-विमर्श पहला कदम होता है. डब्ल्यूटीओ को अमेरिका की ओर से भेजी गई सूचना में कहा गया है कि उसने भारत के साथ संबंधित मुद्दों पर 1 अगस्त, 2019 को विचार विमर्श किया. दुर्भाग्य से इस विचार विमर्श से विवाद का हल नहीं हुआ.

कई अन्य देशों यूरोपीय संघ (EU), सिंगापुर (Singapore), कनाडा (Canada), चीन (China), ताइवान (Taiwan) और थाइलैंड (Thailand) ने भी इस विवाद में शामिल होने की पेशकश की है. इन देशों ने कहा है कि जिन आईसीटी उत्पादों पर भारत ने आयात शुल्क लगाया है उनसे उनका व्यापक हित जुड़ा है.

अमेरिका ने भारत पर लगाए समझौते से इतर कर लगाने के आरोप
यूरोपीय संघ ने आईसीटी उत्पादों की व्यापक श्रृंखला पर आयात शुल्क (Import Duty) लगाने को चुनौती दी है. इन उत्पादों में मोबाइल फोन और उसके कलपुर्जे, बेस स्टेशनों, एकीकृत सर्किट और आप्टिकल उपकरण आदि शामिल हैं.
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अमेरिका ने कहा है कि वर्ष 2018 में उसने इस श्रेणी के 49 करोड़ डॉलर के सामान को भारत को निर्यात किया. ‘‘भारत के डब्ल्यूटीओ में इन उत्पादों पर कोई भी शुल्क नहीं लेने की इससे पहले की गई वैधानिक रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धता के बावजूद भारत इन उत्पादों पर 7.5% से लेकर 20% तक शुल्क ले रहा है. इस प्रकार यह भारत की तरफ से डब्ल्यूटीओ नियमों (WTO Rules) का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन है. इस शुल्क से यूरोपीय संघ (EU) के 60 करोड़ यूरो के निर्यात पर भी प्रभाव पड़ा है.

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First published: September 22, 2019, 7:27 PM IST
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