डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला, जर्मनी से वापस बुलाए जाएंगे 12 हज़ार सैनिक, ये है वजह

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला, जर्मनी से वापस बुलाए जाएंगे 12 हज़ार सैनिक, ये है वजह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

नाटो (NATO) के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने अमेरिका के कदम का स्वागत किया और कहा कि वाशिंगटन ने हाल ही में इस मामले में सहयोगियों से विचार-विमर्श किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 30, 2020, 11:59 AM IST
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वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने फैसला किया है कि उनके करीब 12 हज़ार सैनिकों को जर्मनी से वापस बुलाया जाएगा. इनमें से 6400 सैनिकों को वापस अमेरिका भेजा जाएगा, जबकि 6400 सैनिकों को दूसरे नाटो देश जैसे कि इटली और बेल्जियम भेजा जाएगा. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ने ये कदम जर्मनी के नाटो सैन्य बजट के लिए निर्धारित खर्च न करने की वजह से उठाया है.

क्यों वापस बुलाए जाएंगे सैनिक?
उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना 4 अप्रैल, 1949 को 12 संस्थापक सदस्यों द्वारा अमेरिका के वाशिंगटन में की गयी थी. नाटो देशों का करीब 70% खर्च अमेरिका उठाता है. नाटो देशों ने 2024 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद का दो फीसदी रक्षा पर खर्च करने का संकल्प लिया है और जर्मनी इस लक्ष्य से अब भी पीछे है. पिछले महीने ट्रंप ने कहा था कि जर्मनी की तरफ से खर्चे में सहयोग नहीं किया जा रहा है. सैन्य बल में कटौती का फैसला लेने के बाद व्हाइट हाउस में ट्रंप ने कहा, ‘हम सैनिकों की संख्या कम कर रहे हैं क्योंकि वे (जर्मनी) अपने बिल नहीं चुका रहे हैं. यह बहुत सीधी-सी बात है. उन पर काफी बकाया है.’

ट्रंप का फैसला
अमेरिकी रक्षा नेताओं ने पेंटागन की एक योजना के एक बारे में विस्तार से बताते हुए बुधवार को ये जानकारी दी. इस योजना पर अरबों डॉलर का खर्च आएगा और इसे पूरा होने में कई साल लगेंगे. ये फैसला ट्रंप की जर्मनी से सैनिकों को वापस बुलाने की इच्छा को देखते हुए लिया गया है. बड़ी संख्या में सैनिक इटली जाएंगे और कुछ जर्मनी से बेल्जियम में अमेरिकी यूरोपीय कमान मुख्यालय और विशेष अभियान कमान यूरोप जाएंगे.



रूस से मुकाबला करेंगे सैनिक?
सांसदों ने सैनिकों की संख्या में कटौती की निंदा की है. हालांकि रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने बुधवार को इस योजना का बचाव करते हुए कहा कि वैसे तो यह फैसला ट्रंप के आदेश के बाद लिया गया है लेकिन यह रूस को रोकने, यूरोपीय सहयोगियों को पुन: आश्वस्त करने और सैनिकों को काला सागर तथा बाल्टिक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने के वृहद सामरिक लक्ष्यों को भी पूरा करता है. एस्पर ने कहा, ‘हम सैनिकों को मध्य यूरोप, जर्मनी से हटा रहे हैं जहां वे शीत युद्ध के बाद से थे. इससे अमेरिकी सैनिक रूस के नजदीक पूर्व में होंगे जहां हमारे नए सहयोगी हैं.’

फैसले की निंदा
इस बीच नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने अमेरिका के कदम का स्वागत किया और कहा कि वाशिंगटन ने हाल ही में इस मामले में सहयोगियों से विचार-विमर्श किया था. वहीं जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने जर्मनी के रक्षा खर्च का बचाव करते हुए कहा कि यह बढ़ा है और देश दो प्रतिशत के मानदंड को पूरा करने की ओर काम करता रहेगा.
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