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उत्तराखंड आपदा: ग्लेशियर ढहा या फिर ये हिमस्खलन था? पता करने को आज मौके पर पहुंचेंगे वैज्ञानिक

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से बड़ी तबाही हुई है.  AP)
उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से बड़ी तबाही हुई है. AP)

Utrakhand Disaster: असल में ये हादसा कैसे हुआ इसको लेकर वैज्ञानिक पक्के तौर पर कुछ भी नहीं कह रहे हैं. फिलहाल इसके पीछे मुख्यतौर पर तीन वजहें बताई जा रही है- ग्लेशियर टूटना, बादल का फटना या फिर एवलान्च.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 8, 2021, 8:25 PM IST
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नई दिल्ली. उत्तराखंड में चमोली के पास हर तरफ तबाही का मंजर दिख रहा है. ग्लेशियर टूटने (Glacial Lake Burst) से अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है. जबकि कहा जा रहा है कि इस हादसे के बाद से अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा लोग लापता हैं. हाल के सालों में ये दूसरा मौका है जब राज्य में अचानक आई बाढ़ से इतनी बड़ी तबाही हुई है. इससे पहले साल 2013 में बाढ़ से हजारों लोगों की मौत हुई थी. असल में ये हादसा कैसे हुआ इसको लेकर वैज्ञानिक पक्के तौर पर कुछ भी नहीं कह रहे हैं. फिलहाल इसके पीछे मुख्यतौर पर तीन वजहें बताई जा रही है- ग्लेशियर टूटना, बादल का फटना या फिर एवलान्च यानी हिमस्खलन.

इस तरह की तबाही आमतौर पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) या फिर उस इलाके में होने वाले निर्माण कार्य से होते है. आज वैज्ञानिकों की एक टीम चमोली के उत्तर में मौजूद पहाड़ों का दौरा करेगी. इसके बाद ही हादसे की असली वजहों को पता चलेगा. फिलहाल कहा जा रहा है कि ये घटना ग्लेशियर टूटने से हुई. विज्ञान की भाषा में इसे GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबस्ट फ्लड कहते हैं. ऐसे हादसे में ग्लेशियर टूटने से पानी नीचे की तरफ तेज़ी से बढ़ता है. नदी में एकाएक भारी मात्रा में पानी भर जाता है.

आखिर कैसे बनते हैं ये ग्लेशियर झील?
हिमालय में कई तरह के ग्लेशियर हैं. आम तौर पर इससे झील बन जाते हैं, जिन्हें प्रोग्लेशियल झील कहा जाता है. इस तरह की झील सिर्फ वहां मौजूद पत्थरों से बंधे होते हैं. यानी इसके टूटने का खतरा बना रहता है. इसके टूटने पर भारी मात्रा पानी पास के नदियों में पहुंच जाती है. इस दौरान पानी के रास्ते में आने वाले चट्टान भी आगे की तरफ बढ़ते हैं. लिहाजा कुछ ही देर में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं.
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ये GLOF की घटना आम है?
GLOF की घटना होती रहती है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि किसी ग्लेशियर की झील कितनी बड़ी है और वो कहां है. इसके टूटने की वजहें कई सारी हो सकती हैं. दो दिन पहले इस इलाके से बादल फटने की खबर आई थी. हो सकता है कि इसी वजह से ये घटना हुई हो. उत्तराखंड के हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के ग्लेशियोलॉजिस्ट प्रोफ़ेसर एच सी नैनवाल ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा, 'हम इस क्षेत्र में किसी भी बड़ी ग्लेशिय झीलों के बारे में नहीं जानते हैं. हिमस्खलन काफी आम है. लेकिन इसके चलते नहीं में बाढ़ नहीं आती है. पानी एक स्रोत से आता है, और अब तक हमें नहीं पता है कि ये स्रोत क्या है. हमें इसका पता लगाने के लिए उस इलाके में जाना होगा.'

ग्लेशियर के बारे में सही जानकारी का आभाव
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER), पुणे में काम करने वाली ग्लेशियोलॉजिस्ट, अरघा बनर्जी ने कहा कि ये संभव है कि एक ग्लेशियर झील क्षेत्र में मौजूद थी, लेकिन वैज्ञानिकों को इसका पता नहीं था. उन्होंने कहा, ' पूरे स्थान पर ऐसी सैकड़ों झीलें हैं. हम उनमें से कई के बारे में जानते हैं, लेकिन ये संभव है कि एक ऐसा है जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं. आज की घटना के बाद, मैंने सैटेलाइट इमेज को देखना शुरू किया, और मुझे उस क्षेत्र में कोई ग्लेशियल झील नहीं मिली. लेकिन, अगर हम अच्छे रिज़ॉल्यूशन के सैटेलाइट इमेज देखते हैं, तो हम एक मिल सकता है.
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