#News18OperationHathras: FIR करने वाले SO का चौंकाने वाला बयान, पहले सिर्फ एक आरोपी था, गैंगरेप की बात नकारी

हाथरस केस को लेकर बड़ा खुलासा
हाथरस केस को लेकर बड़ा खुलासा

#News18OperationHathras: News18 की टीम खुफिया कैमरों के साथ झूठे दावों और फर्जी खबरों के पीछे छिपे सच की तलाश में हाथरस पहुंची है जिससे पता चल सके कि पीड़िता के साथ आखिर क्या हुआ था?

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 8:07 PM IST
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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हाथरस (Hathras) जिले में 19 साल की एक दलित लड़की के साथ हुए कथित गैंगरेप (Gangrape) और उसकी मौत के बाद आधी रात को हुए अंतिम संस्कार को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है.  #News18OperationHathras के तहत News18 की टीम खुफिया कैमरों के साथ इस मामले को लेकर किए जा रहे झूठे दावों और फर्जी खबरों के पीछे छिपे सच को जानने के लिए हाथरस पहुंची, जिससे ये पता चल सके कि पीड़िता के साथ आखिर क्या हुआ था? न्यूज18 ने इस घटना से जुड़े उन लोगों से बातचीत की जिन्होंने सबसे पहले इस मामले को हैंडल किया था. हाथरस के निलंबित इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा से न्यूज18 ने बातचीत की. वर्मा ने कहा कि उन्हें इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि वह इस मामले को दबा नहीं पाए. 14 तारीख को जो शिकायत की गई जिसमें कहा गया था कि संदीप ने जान से मारने के इरादे से पीड़िता का गला दबाया.

एसओ दिनेश वर्मा ने कहा कि सबसे पहले एफआईआर सिर्फ एक आरोपी संदीप के खिलाफ दर्ज की गई थी. एसओ दिनेश वर्मा ने कहा कि चार आरोपी राजनीति के तहत आ गए कि उनसे कह दिया गया होगा कि 25-30 लाख रुपये मिल जाएंगे. एसओ दिनेश वर्मा के मुताबिक घटना की पहली शिकायत, सिर्फ इतनी थी कि संदीप ने जान से मारने की नीयत से पीड़िता का गला दबाया है. दिनेश ने बताया कि 14 तारीख को सिर्फ पीड़िता ही नहीं, उसकी मां और भाई भी पुलिस से यही शिकायत कर रहे थे.

वर्मा ने कहा कि ये गैंगरेप का केस नहीं है पहली शिकायत में न तो पीड़िता ने, न ही उसकी मां ने और न ही भाई ने बलात्कार की बात कही थी. उन्होंने कहा कि रेप की बात बाद में कही गई, यह सिर्फ धारा 307 का मामला है.



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307 के तहत दर्ज हुई थी पहली FIR
वर्मा ने कहा कि पहली एफआईआर एससी/एसटी और 307 के तहत दर्ज की गई थी न कि रेप की एफआईआर दर्ज की गई थी. उन्होंने कहा कि 14 को जो मेडिकल हुआ उसमें रेप की बात सामने नहीं आई थी. दोबारा जब 22 तारीख को इंटर्नल मेडिकल हुआ उसमें भी कुछ सामने नहीं आया.


वर्मा ने कहा कि रेप की बात न मां के दिमाग में थी, न लड़की के भाई के और न ही लड़की के. वर्मा ने आगे कहा कि एलआईयू की रिपोर्ट के मुताबिक परिवार लड़की का शव रखकर सीएम योगी आदित्यनाथ को बुलाने की मांग करने वाले थे इसलिए लड़की का शव रात को ही जलाना पड़ा
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