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उत्तराखंड चुनाव: कांग्रेस ने हरीश रावत को रामनगर से हटाकर लालकुआं क्यों भेजा, जानिए वजह

उत्तराखंड चुनाव: कांग्रेस ने हरीश रावत को रामनगर से हटाकर लालकुआं क्यों भेजा, जानिए वजह

उत्तराखंड में हरीश रावत समेत  5 उम्मीदवारों की सीट कांग्रेस ने बदली है.

उत्तराखंड में हरीश रावत समेत 5 उम्मीदवारों की सीट कांग्रेस ने बदली है.

Uttarakhand Assembly Election : हरीश रावत (Harish Rawat) को कांग्रेस (Congress) ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election) के लिए मुख्यमंत्री पद का अपना प्रत्याशी (CM Candidate) घोषित नहीं किया है. लेकिन अगर कांग्रेस सत्ता में लौटती है, तो वे इस पद के लिए सबसे तगड़े दावेदार माने जा रहे हैं. इस वक्त वे पार्टी की चुनाव प्रचार समिति के मुखिया हैं.

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देहरादून. कांग्रेस (Congress) पार्टी ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election) के लिए इसी बुधवार को 10 उम्मीदवारों की सूची जारी की. इसमें 5 उम्मीदवार ऐसे थे, जिनके नाम पहले जारी सूची में भी थे. लेकिन इस बार उनके विधानसभा क्षेत्र बदल दिए गए थे. इनमें भी सबसे बड़ा नाम राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Former Chief Minister Harish Rawat) का रहा. उन्हें रामनगर विधानसभा क्षेत्र से हटाकर लालकुआं से टिकट दिया गया है. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने बड़े कद वाले नेता का विधानसभा क्षेत्र बदलने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? जानते हैं, इसका जवाब और उससे जुड़े अन्य पहलू.

यहां बताते चलें कि हरीश रावत (Harish Rawat) को कांग्रेस (Congress) ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election) के लिए मुख्यमंत्री पद का अपना प्रत्याशी (CM Candidate) घोषित नहीं किया है. लेकिन अगर कांग्रेस सत्ता में लौटती है, तो वे इस पद के लिए सबसे तगड़े दावेदार माने जा रहे हैं. इस वक्त वे पार्टी की चुनाव प्रचार समिति के मुखिया हैं. उनका निर्वाचन क्षेत्र बदले जाने के मामले में पार्टी के प्रदेश मीडिया-प्रभारी राजीव महर्षि ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहते हैं, ‘काफी सोच-विचार के बाद यह फैसला किया गया है. यह रणनीतिक निर्णय है. हरीश रावत की जीत की संभावनाएं रामनगर की तुलना में लालकुआं से कहीं ज्यादा बेहतर हैं. रामनगर से रंजीत रावत भी टिकट चाहते थे. लेकिन उन्हें भी साल्ट सीट से उतारा गया है.’

कहीं आपसी टकराव टालने लिए तो नहीं बदली गई सीट?
बहुत संभव है, ऐसा ही हो. राजीव महर्षि के बयान में हरीश रावत के साथ-साथ रंजीत का जिक्र ही अपने आप में इस बात का संकेत है कि कांग्रेस में इस वक्त सब ठीक नहीं है. टिकट वितरण से शीर्ष स्तर नेताओं के बीच भी असंतोष और टकराव की स्थिति बनी है. इसी को टालने के लिए हरीश रावत का निर्वाचन क्षेत्र बदला गया है. दरअसल, 24 जनवरी को कांग्रेस ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election) के लिए 11 प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी की थी. उसमें हरीश रावत को रामनगर और रंजीत को साल्ट से उम्मीदवार बनाया गया था.

सूची जारी किए जाने के तुरंत बाद रंजीत रावत ने खुला बयान दिया, ‘मेरे खिलाफ साजिश हुई है. मैं 5 साल से उस क्षेत्र (Ramnagar) में काम रहा हूं. अब वे (Harish Rawat) उसका फल लेने के लिए वहां पहुंच गए हैं. इसीलिए मुझे नुकसान पहुंचाया गया है. आखिरी मौके पर किसी की सीट बदली जाती है, तो उसके लिए नए क्षेत्र में काम करने के लिए समय कम बचता है, यह सभी जानते हैं. फिर भी नए निर्वाचन क्षेत्र में जाने की चुनौती स्वीकार करता हूं.’

रामनगर की जीत-हार से जुड़ा दिलचस्प वाकया, इसलिए भी बदली गई शायद
रामनगर सीट से एक दिलचस्प वाकया भी जुड़ा है. ऐसा माना जाता है कि जब जो पार्टी यह सीट जीतती है, उसी की राज्य में सरकार बनती है. यहां से 2002 में कांग्रेस के योगेंबर सिंह जीते और पार्टी ने उत्तराखंड में सरकार बनाई. ऐसे ही 2007 में भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट जीते और उसकी सरकार बनी. वहीं, 2012 में कांग्रेस की अमृता रावत जीतीं, तो फिर कांग्रेसी सरकार आई. जबकि 2017 में दीवान सिंह बिष्ट की जीत के साथ भाजपा ने सरकार में वापसी की.

जानकार मानते हैं कि इस दिलचस्प तथ्य के मद्देनजर भी हरीश रावत की सीट बदली गई क्योंकि संभावना ये थी कि रंजीत उनकी जीत की राह में रोड़ा बन सकते हैं. जबकि यही रंजीत एक समय हरीश रावत के बेहद नजदीकियों में शुमार रहे हैं. एकदम वफादार. जब हरीश मुख्यमंत्री थे, तो रंजीत उनके सलाहकार हुआ करते थे. सरकार के फैसलों में भी उनका सिक्का चलता था. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों में मतभेद उभरे और फिर रास्ते अलग हो गए.

Tags: Congress Leader Harish Rawat, Hindi news, Uttarakhand Assembly Elections 2022

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