उत्तराखंड बीजेपी में कलह! मंत्री हरक सिंह रावत बोले- त्रिवेंद्र बताएं कौन कौरव हैं, कौन पांडव

उत्तराखंड बीजेपी में अब चुनाव आते-आते असहमति के स्वर फूटने लगे हैं.

उत्तराखंड बीजेपी में अब चुनाव आते-आते असहमति के स्वर फूटने लगे हैं.

Harak singh rawat Vs Trivendra Singh Rawat: उत्तराखंड बीजेपी में जारी अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ गई है. श्रम मंत्री हरक सिंह रावत ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. हरक सिंह रावत 2017 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आने वाले नौ विधायकों में से एक हैं. त्रिवेंद्र रावत से उनकी इन चार सालों में कभी नहीं बनी.

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देहरादून. उत्तराखंड में 2017 में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई बीजेपी में अब चुनाव आते-आते उतने ही प्रचंड तरीके से असहमति के स्वर फूटने लगे हैं. हालांकि त्रिवेंद्र सरकार के सत्ता संभालने के कुछ समय बाद से ही फूटने लगे थे और इसका कारण था त्रिवेंद्र रावत की एकला चलो की नीति. आखिरकार दस मार्च को जब मुख्यमंत्री पद से हटाकर सांसद तीरथ सिंह रावत को कमान सौंपी गई. बदली परिस्थतियों में न सिर्फ मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने त्रिवेंद्र रावत के कई फैसलों पर असहमति जताई, बल्कि विधायक मंत्री भी रावत सरकार के कई निर्णयों की खिलाफ बोलते नजर आए. अब श्रम मंत्री हरक सिंह रावत ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत के खिलाफ मोर्चा खर्च कर दिया है. तीरथ रावत सरकार में कददावार कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत 2017 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आने वाले नौ विधायकों में से एक हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से उनकी इन चार सालों में कभी नहीं बनी.

दरअसल, रावत ने पिछले हफ्ते ही अपने विधानसभा क्षेत्र डोईवाला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि उनके साथ छल हुआ है. रावत ने खुद को अभिमन्यु बताते हुए कहा कि कौरवों ने भले ही छल से अभिमन्यु को मारा हो, लेकिन द्रोपदी ने इस पर पश्चाताप नहीं किया था, बल्कि प्रतिकार किया था. त्रिवेंद्र रावत ने कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें दु़:खी नहीं होना चाहिए, पांडवों की तरह प्रतिकार करना चाहिए. इस बयान के बाद भाजपा में हलचल शुरू हो गई. सवाल उठता है कि त्रिवेंद्र रावत किसका प्रतिकार करने की बात कह रहे थे.

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त्रिवेंद्र रावत सरकार में कर्मकार कल्याण बोर्ड से बिना पूछे बाहर किए गए हरक सिंह रावत का कहना है, "हमें हल्की बयानबाजी से बचना चाहिए. त्रिवेंद्र रावत बताएं कौन कौरव हैं और कौन पांडव हैं. क्या डोईवाला की जनता पांडव हो गई और हमारे रार्ष्टीय नेता कौरव हो गए क्या?" हरक सिंह रावत का कहना है कि जब उन्हें कर्मकार कल्याण बोर्ड से बाहर किया गया था , तब भी कहा था मैं महाभारत का अभिमन्यु नहीं हूं जो अंतिम द्वार पर मारा जाऊं. ये भगवान का आर्शीवाद है, मेरी बात सही साबित हुई.
त्रिवेंद्र रावत सरकार में कर्मकार कल्याण बोर्ड से हरक सिंह रावत को बिना पूछे बाहर कर दिया गया था. उन्होंने इसकी शिकायत दिल्ली हाईकमान से की थी.  हरक सिंह रावत की पीड़ा अब खुलकर छलक रही है. त्रिवेंद्र रावत के आउट और तीरथ की एंट्री के बाद हरक एक बार फिर पूरे दबदबे में हैं. तीरथ रावत ने एक बार फिर कोटद्वार में हॉस्पिटल निर्माण के लिए धनराशि जारी कर दी है तो इधर, कर्मकार कल्याण बोर्ड से भी सीएम त्रिवेंद्र रावत द्वारा तैनात की गई सचिव दीप्ति सिंह को गुरुवार को हटा दिया गया है. उनकी जगह हरक की पसंदीदा अधिकारियों में एक उप श्रमायुक्त हरिद्वार में तैनात मधु नेगी चौहान को बोर्ड के सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है. बहरहाल, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत के अभिमन्यु वाले बयान से पार्टी हाईकमान भी नाराज है. आने वाले समय में त्रिवेंद्र सरकार के और भी फैसलों की खुलकर खिलाफत होगी, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
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