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उत्‍तराखंड में अब सांपों और जानवरों के लिए बना खास पुल, 2 लाख की लागत से हुआ तैयार

उत्‍तराखंड के जंगलों में बनाया गया है पुल. (प्रतीकात्‍मक फोटो)
उत्‍तराखंड के जंगलों में बनाया गया है पुल. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

नैनीताल जिले (Nainital) के रामनगर फॉरेस्‍ट डिवीजन में इस पुल को खासकर सांप, अजगर व अन्‍य सरीसृपों के साथ ही छोटे-बड़े अन्‍य जानवरों के लिए बनाया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 30, 2020, 8:32 AM IST
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नई दिल्‍ली. आमतौर पर जंगलों (Forest) के बीच से निकली सड़कों का इस्‍तेमाल छोटे-बड़े जानवर भी एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए करते हैं. लेकिन इस दौरान जब हाईवे या सड़क पर वाहनों की संख्‍या अधिक होती है तो उनके सड़क हादसे (Road accident) का शिकार होने का खतरा भी बढ़ जाता है. जानवरों को इसी खतरे से बचाने के लिए उत्‍तराखंड वन विभाग ने अनोखी पहल की है. उसकी ओर से ऐसे जानवरों के लिए खास पुल बनाया गया है. नैनीताल जिले के रामनगर फॉरेस्‍ट डिवीजन में इस पुल को खासकर सांप, अजगर व अन्‍य सरीसृपों के साथ ही छोटे-बड़े अन्‍य जानवरों के लिए बनाया गया है.

कालाधुंगी-नैनीताल हाईवे पर बनाए गए इस पुल की लागत 2 लाख रुपये आई है. इसे ठेकेदार द्वारा 10 दिन में तैयार किया गया है. इसे बांस, जूट और घास से बनाया गया है. जिस हाईवे पर यह बना है वह नैनीताल आने-जाने का मुख्‍य मार्ग है. ऐसे में वो काफी व्‍यस्‍त रहता है. इस जंगल में बड़ी छिपकलियां, विभिन्‍न तरह के सांप और अजगर, गिलहरी, बंदर और अन्‍य जानवर रहते हैं. अमूमन देखने को मिलता है कि कोई ना कोई जानवर सड़क हादसे का शिकार हो जाता है.

जानकारी दी गई है कि यह पुल 5 फुट चौड़ा और 40 फुट लंबा है. यह पुल करीब 3 व्‍यक्तियों को भार झेल सकता है. वन विभाग के अफसरों का तो यह भी मानना है कि यह पुल तेंदुओं द्वारा भी इस्‍तेमाल किया जाएगा. रामनगर डिविजनल फॉरेस्‍ट ऑफिसर चंद्र शेखर का कहना है कि इस पुल की निगरानी के लिए चार कैमरे लगाए गए हैं. फॉरेस्‍ट डिपार्टमेंट द्वारा बनाए गए मॉडल के रूप में इसका अध्‍ययन होगा.

वन विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि पुल बेहद मजबूत है. इस पुल के जरिये जानवरों को सड़क पार करने को लुभाने के लिए इसपर बेल उगाई गई हैं. साथ ही बड़ी मात्रा में घास और पत्तियां भी लगाई गई हैं. अफसरों का कहना है कि यह एक तरह का प्रयोग है. इसके जरिये विभाग का मकसद सरीसृपों और अन्‍य जानवरों को रहने का बेहतर माहौल उपलब्‍ध कराना है.
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