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उत्तराखंड: तपोवन में आपदा के बाद बनी झील ने बढ़ाई चिंता, गहराई नापने जुटी नौसेना

सड़क मार्ग नहीं होने के कारण उन्हें हेलीकॉप्टर की मदद से वहां पहुंचाया गया था. अधिकारियों ने बताया कि पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलट मुश्किल सतह पर सटीक स्थिति बनाए रखी. (फाइल फोटो)
सड़क मार्ग नहीं होने के कारण उन्हें हेलीकॉप्टर की मदद से वहां पहुंचाया गया था. अधिकारियों ने बताया कि पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलट मुश्किल सतह पर सटीक स्थिति बनाए रखी. (फाइल फोटो)

Uttarakhand Flash Flood: तपोवन आपदा के बाद कुछ तस्वीरें मिली थीं, जिनमें इस झील की सीमाओं की सटीक जानकारी थी. करीब से देखने पर पता चलता था कि झील के किनारे पर मलबे की दीवार है. ऐसे में यह चिंता बढ़ गई थी कि पानी दीवार में छेद कर बहेगा और यह एक और बाढ़ का कारण बनेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 21, 2021, 2:18 PM IST
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नई दिल्ली. उत्तराखंड (Uttarakhand) के तपोवन में 5 किलोमीटर ऊपर तैयार हुई एक बर्फीली झील (Lake) चिंता का कारण बनी हुई है. हाल ही में आई आपदा के बाद यह कृत्रिम झील समुद्र तल से करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर तैयार हो गई थी. इसके चलते क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बना हुआ है. ऐसे में झील की गहराई और इसकी दीवारों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए नौसेना (Indian Navy) के गोताखोरों (Divers) ने एक ऑपरेशन शुरू किया है. उन्होंने इस ठंडी झील में गोता लगाकर मिशन की शुरुआत कर दी है.

दरअसल तपोवन आपदा के बाद कुछ तस्वीरें मिली थीं, जिनमें इस झील की सीमाओं की सटीक जानकारी थी. करीब से देखने पर पता चलता था कि झील के किनारे पर मलबे की दीवार है. ऐसे में यह चिंता बढ़ गई थी कि पानी दीवार में छेद कर बहेगा और यह एक और बाढ़ का कारण बनेगा. ऐसे में किसी संभावित को टालने के लिए नौसेना के गोताखोर हाथ से पकड़ने वाले इको साउंडर की मदद से गहराई रिकॉर्ड करेंगे. इस ऑपरेशन से मिलने वाले डेटा की जांच वैज्ञानिक करेंगे और डैम की मिट्टी की दीवार पर दबाव का पता लगाएंगे. यह जानकारी अधिकारियों ने दी है.

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में गढ़वाल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वाय पी सुंद्रियाल के हवाले से बताया गया कि झील के बारे में मिली जानकारी चिंतित करने वाली है. उन्होंने हाल ही में स्थानीय गांववालों की मदद से आपदा के बाद मौके का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने आपदा के बाद के हालातों को जानने की कोशिश की थी.



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उन्होंने कहा था 'फिलहाल मैं उत्तरपूर्वी धारा और ऋषिगंगा नदी के संगम पर खड़ा हूं. बाढ़ उत्तरपूर्वी धारा  से शुरू हुई थी. भूस्खलन ने ऋषिगंगा नदी को अस्थाई तौर पर ब्लॉक कर दिया था.' इसके अलावा उन्होंने चेतावनी दी है कि झील की भी वक्त टूट सकती है और अधिक बाढ़ का कारण बन सकती है. खास बात है कि नौसेना के गोताखोरों को मौके तक पहुंचाने का काम वायुसेना ने किया था.

सड़क मार्ग नहीं होने के कारण उन्हें हेलीकॉप्टर की मदद से वहां पहुंचाया गया था. अधिकारियों ने बताया कि पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलट मुश्किल सतह पर सटीक स्थिति बनाए रखी. दरअसल, जलाशय के प्राकृतिक नहीं होने के चलते प्रशासन को तत्काल रूप से हालात का पता करने के लिए गहराई मापना जरूरी है. हाल ही में आई आपदा में दर्जनों लोगों की मौत हो गई थी.
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