कोविड वैक्सीन निर्माता बोले- अभी सामान्‍य नहीं होंगे कोरोना वायरस संक्रमण के हालात, अगले साल सर्दियों तक करना होगा इंतजार

कोरोना वायरस वैक्‍सीन पर चल रहा है काम.
कोरोना वायरस वैक्‍सीन पर चल रहा है काम.

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि अगर कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) की वैक्‍सीन बन भी जाती है तो भी उसे अपना असर ठीक से दिखाने में समय लगेगा. इससे तुरंत ही संक्रमण के मामलों में कमी नहीं आएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 16, 2020, 7:37 AM IST
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नई दिल्‍ली. दुनिया भर में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) को खत्‍म करने के लिए वैक्‍सीन (Covid 19 Vaccine) और दवा विकसित करने का काम चल रहा है. इस बीच फार्मा कंपनी फाइजर के साथ वैक्‍सीन बनाने में जुटे शोधकर्ताओं ने दावा किया कि इस कोरोना वायरस संक्रमण के खराब दौर के बाद सामान्‍य हालात बनने में अगले साल सर्दियों तक का समय लगेगा. उनका कहना है कि अगर कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्‍सीन बन भी जाती है तो भी उसे अपना असर ठीक से दिखाने में समय लगेगा. इससे तुरंत ही संक्रमण के मामलों में कमी नहीं आएगी.

फार्मा कंपनी बायोएनटेक के सह-संस्थापक प्रोफेसर यूगर साहिन का दावा है कि नई कोरोना वायरस वैक्‍सीन का प्रभाव ठीक से होने में पूरी गर्मियां निकल जाएंगी. इसके बाद जीवन को पहले जैसा सामान्‍य होने में अगले साल सर्दियों तक का समय लग जाएगा. प्रोफेसर यूगर साहिन वही शोधकर्ता हैं, जिनकी दावेदार वैक्‍सीन ने 90 फीसदी मरीजों को कोरोना वायरस से बचाने संबंधी असर दिखाया है.

बीबीसी को दिए एक इंटरव्‍यू में प्रोफेसर यूगर ने कहा कि हो सकता है कि सर्दियां भी इस संबंध में कठिन साबित हों. प्रो. यूगर ने कहा कि उन्‍हें विश्‍वास है कि कोरोना वायरस वैक्‍सीन लोगों के बीच में वायरस से संक्रमण रोक सकती है. साथ ही यह वैक्‍सीन प्राप्‍त लोगों में कोरोना के लक्षण भी रोकने में मददगार हो सकती है. हालांकि यह परीक्षण के नतीजों जितना अधिक नहीं होगा, लेकिन यह करीब 50 फीसदी हो सकता है.

उनका कहना है कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो कोरोना की वैक्‍सीन इस साल के अंत में या अगले साल की शुरुआत में बाजार में आने की संभावना है. प्रो. यूगर ने कहा कि उनका लक्ष्‍य अगले साल अप्रैल तक कोरोना वायरस वैक्‍सीन की 30 करोड़ डोज लोगों तक पहुंचाना है. उनके मुताबिक गर्मियों का मौसम मददगार साबित होगा, क्‍योंकि उस समय कोरोना की संक्रमण दर घटेगी. इसके बाद अगले साल सर्दियों से पहले वैक्‍सीनेशन रेट बढ़ सकता है.
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