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वैक्सीन डिप्लोमेसी में अड़चन, कोवैक्सीन के प्रभावशीलता डेटा को लेकर हिचकिचाहट!

कोवैक्सीन पर अब भी क्लीनिकल ट्रायल मोड का ठप्पा है.
कोवैक्सीन पर अब भी क्लीनिकल ट्रायल मोड का ठप्पा है.

कोवैक्सीन (COVAXIN) की प्रभावशीलता का डेटा (Efficacy Data) अभी नहीं आया है. वैक्सीन पर अब भी क्लीनिकल ट्रायल मोड का ठप्पा है. लोगों के बीच इसे लेकर एक हिचकिचाहट है. इससे भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी को झटका लग सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 23, 2021, 5:41 AM IST
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(स्नेहा मोर्दानी)
नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी (Covid-19) के बीच भारत सद्भावना संदेश (Goodwill Gesture) के तौर पर कई देशों को वैक्सीन भेज रहा है. इसे भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी के तौर पर भी देखा जा रहा है. लेकिन इस डिप्लोमेसी को झटका लग सकता है है. दरअसल भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन की खेप को पहुंचने में थोड़ी देर लग सकती है. इसके पीछे कारण ये है कि सरकार उन देशों की रेगुलेटरी अथॉरिटी के अप्रूवल का इंतजार कर रही है. यह बात न्यूज़18 को सूत्रों के हवाले से पता चली है.

कोवैक्सीन के डोज भेजने का हुआ था फैसला
बीती 16 जनवरी को भारत सरकार ने फैसला किया था वो कोवैक्सीन के 8.1 लाख डोज कुछ देशों को देगा. ये फैसला किया गया था कि विदेश मंत्रालय इसके लिए वैक्सीन खरीद 22 जनवरी के बाद करेगा. इसके बाद 18 जनवरी को एक और हाई लेवल मीटिंग हुई. इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, औषध विभाग राज्य मंत्री मनसुख मांडविया, सीरम इंस्टिट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला और भारत बायोटेक के एमडी कृष्णा एल्ला शामिल थे.
इसी बैठक में तय हुआ कि कोवैक्सीन के डोज म्यांमार, मंगोलिया, ओमान, बहरीन, फिलीपिन्स, मालदीव्स और मॉरिशस भेजे जाएंगे. लेकिन इसके बीच में बाधा ये दिख रही है कि कोवैक्सीन भारत में अभी क्लीनिकल ट्रायल मोड में है और इसकी प्रभावशीलता के डेटा का इंतजार किया जा रहा है. भारत बायोटेक ने फेज 2 का क्लीनिकल ट्रायल पूरा कर नवंबर में तीसरे फेज का ट्रायल किया था. इसके नतीजे मार्च में आने के उम्मीद जताई जा रही है.



डेटा की वजह से हिचकिचाहट!
सूत्रों के मुताबिक बैठक के बाद इन सभी देशों को डोज़ियर भेजे गए थे. इन देशों की रेगुलेटरी अथॉरिटी से इसकी मंजूरी मांगी गई थी. लेकिन जिन असाधारण स्थितियों में कोवैक्सीन को इमरजेंसी यूज की मंजूरी दी गई उनमें लोगों में वैक्सीन लगवाने को लेकर हिचकिचाहट भी है. हालांकि शुक्रवार को कोवैक्सीन के निर्माताओं ने राहत की सांस ली क्योंकि वैश्विक साइंस जर्नल लैंसेट ने इसके फेज 1 ट्रायल से संबंधी रिसर्च पब्लिश की है. इस रिसर्च में कहा गया है कि फेज 1 ट्रायल के बाद कोवैक्सीन ने बिना साइड इफेक्ट्स के एंटी बॉडी जेनरेट की. लेकिन इसके बावजूद भी अभी प्रभावशीलता का डेटा नहीं आया है. वैक्सीन पर अब भी क्लीनिकल ट्रायल मोड का ठप्पा है. लोगों के बीच इसे लेकर एक हिचकिचाहट भी है.

वहीं दूसरी तरफ सीरम इंस्टिट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड को भी गुडविल जेस्चर के तौर पर भी कुछ देशों में भेजा गया है. व्यावसायिक सप्लाई के अलावा भारत ने मालदीव्स, मॉरिशस, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश को फ्री डोजेस दिए हैं.
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