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वैक्सीन पेटेंट पर बहस तेज, अभियान समूह का दावा-टीकों ने 9 नए लोगों को बनाया अरबपति

वैक्सीन पर प्रॉपर्टी राइट्स और पेटेंट को लेकर लंबे समय से बहस जारी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Vaccine Patent Discussion: गठबंधन में ऐसे संगठन और कार्यकर्ता शामिल हैं, जो टीकाकरण के लिए प्रॉपर्टी राइट्स और पेटेंट को खत्म करने का समर्थन कर रहे हैं. समूह ने दावा किया है कि उनकी तरफ से जारी आंकड़े फोर्ब्स (Forbes) की सूची से लिए गए हैं.

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    पेरिस. कोविड-19 (Covid-19) की वैक्सीन टेक्नोलॉजी (Vaccine Technology) पर 'एकाधिकार नियंत्रण' का विरोध कर रहे एक अभियान समूह ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. समूह ने कहा है कि कोविड वैक्सीन से मिले मुनाफे ने कम से कम 9 लोगों को अरबपति बना दिया है. इस सूची में मॉडर्ना के सीईओ स्टीफन बैंसेल और बायोएनटेक के उगुर साहिन शीर्ष पर हैं. वैक्सीन पर प्रॉपर्टी राइट्स (Property Rights) और पेटेंट को लेकर लंबे समय से बहस जारी है.

    द पीपुल्स वैक्सीन अलायंस ने बयान जारी किया है, 'इनके बीच, नौ नए अरबपतियों के पास 19.3 बिलियन डॉलर की संयुक्त संपत्ति है, जो कम आय वाले देशों में सभी लोगों को 1.3 गुना पूरी तरह से टीकाकरण करने के लिए पर्याप्त है.' इस गठबंधन में ऐसे संगठन और कार्यकर्ता शामिल हैं, जो टीकाकरण के लिए प्रॉपर्टी राइट्स और पेटेंट को खत्म करने का समर्थन कर रहे हैं.

    समूह ने दावा किया है कि उनकी तरफ से जारी आंकड़े फोर्ब्स की सूची से लिए गए हैं. गठबंधन में शामिल चैरिटी ऑक्सफैम की एना मैरियट कहती हैं, 'ये अरबपति वैक्सीन पर एकाधिकारी से बड़ा मुनाफा कमा रही कंपनियों के इंसानी चेहरे हैं.' इसके अलावा गठबंधन ने यह भी कहा है कि पहले से अरबपतियों की संयुक्त संपत्ति भी वैक्सीन कार्यक्रमों की वजह से 32.2 बिलियन डॉलर बढ़ गई है.



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    इन आंकड़ों के आकलन में मदद करने वाले ग्लोबल जस्टिस नाउ में वरिष्ठ नीति और अभियान प्रबंधन हीडी चाउ ने कहा, 'हमारे पास जो असरदार वैक्सीन हैं, वे करदाताओं के मोटे भुगतान की देन हैं. ऐसे में यह बिल्कुल जायज नहीं होगा कि एक व्यक्ति कमाई कर रहा है. जबकि, दूसरी और तीसरी लहर का सामना कर रहे करोड़ों लोग पूरी तरह असुरक्षित हैं.'

    उन्होंने कहा, 'जब भारत में हर रोज हजारों लोग मर रहे हैं, तो बड़ी फार्मा कंपनियों के अरबपतियों के हितों को लाखों लोगों की जरूरत के आगे रखना... बिल्कुल अस्वीकार्य है.' हालांकि, वैक्सीन निर्माताओं ने कहा है कि पेटेंट प्रटोकेशन की वजह से उत्पादन सीमित नहीं हो रहा है. उन्होंने कच्चा माल, निर्माण स्थल तैया करने जैसे इसके कई और कारण भी गिनाए हैं.