WHO के अधिकारी बोले, डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ कम प्रभावी दिख रही हैं कोरोना वैक्सीन

डेल्टा वैरिएंट दुनियाभर में चिंता का सबब बना हुआ है. (सांकेतिक तस्वीर)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ (Expert) ने कहा है कि भविष्य में नए तरह के म्यूटेशन (Mutation) भी देखने को मिल सकते हैं जिनके खिलाफ वैक्सीन (Covid Vaccine) का प्रभाव शायद और कम हो. हालांकि अब भी कोरोना के खिलाफ वैक्सीन को सबसे कारगर हथियार के रूप में देखा जा रहा है.

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    नई दिल्ली. वर्तमान में दुनिया में मौजूद कोरोना वैक्सीन (Covid Vaccine) नए डेल्टा वैरिएंट (Delta Variant) के खिलाफ कम प्रभावी दिख रही हैं. यह बात विश्व स्वास्थ्य संगठन के संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ ने कही है. विशेषज्ञ ने यह भी कहा है कि भविष्य में नए तरह के म्यूटेशन भी देखने को मिल सकते हैं जिनके खिलाफ वैक्सीन का प्रभाव शायद और कम हो. हालांकि अब भी कोरोना के खिलाफ वैक्सीन को सबसे कारगर हथियार के रूप में देखा जा रहा है.

    डेल्टा या फिर B.1.617.2 वैरिएंट को भारत में कोरोना की दूसरी भयावह लहर का जिम्मेदार माना जा रहा है. अब आंकड़ों के मुताबिक यूनाइटेड किंगडम में भी तीसरी लहर का प्रकोप इसी वैरिएंट के कारण बढ़ रहा है. अब डेल्टा वरिएंट में म्यूटेशन के बाद डेल्टा प्लस वैरिएंट बना है. भारत में अब डेल्टा प्लस वैरिएंट ने भी पैर पसारना शुरू कर दिया है. फिलहाल महाराष्ट्र और केरल में कोविड-19 के डेल्टा प्लस वैरिएंट के कई मामले सामने आ गए हैं. महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने सोमवार को कहा कि राज्य में डेल्टा वैरिएंट के 21 मामले सामने आए हैं. वहीं केरल में भी डेल्टा प्लस वैरिएंट के कम से कम तीन मामले सामने आए.

    कोविशील्ड और कोवैक्सीन डेल्टा वैरिएंट पर कितनी प्रभावी
    इससे पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के वैज्ञानिकों ने अपने शोध की अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट्स में जानकारी दी थी कि कोविशील्‍ड और कोवैक्सिन कोरोना वायरस के B.1.617.2 वेरिएंट के खिलाफ कुछ ही एंटीबॉडी तैयार कर पा रही हैं, लेकिन ये वैक्‍सीन कोरोना के अन्‍य वेरिएंट पर प्रभावी हैं.

    डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन के प्रभाव पर जारी है रिसर्च
    कई प्रयोगशाला परीक्षणों से पता चलता है कि डेल्टा संस्करण में अन्य प्रकारों की तुलना में टीकों के लिए मजबूत प्रतिरोध है. जून की शुरुआत में लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक ब्रिटिश अध्ययन ने डेल्टा, अल्फा (पहले ब्रिटेन में पहचाना गया) और बीटा (पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पहचाना गया) वेरिएंट के संपर्क में आने वाले टीके वाले लोगों में बनीं एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने के स्तर को चेक किया था. कोरोना वायरस के नए स्वरूपों को लेकर वैज्ञानिक लगातार ये रिसर्च कर रहे हैं कि वैक्सीन इनके खिलाफ कितनी प्रभावी है. फिलहाल दुनियाभर में चिंता का सबब डेल्टा वैरिएंट है.

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