गुजरात: निसार को मारकर पुलिस ने नर्मदा में फेंका? शव तलाशने के लिए खाली कराई जा रही पूरी नहर

खाली कराई जा रही है नर्मदा नहर.
खाली कराई जा रही है नर्मदा नहर.

तेलंगाना के रहने वाले 65 साल के बाबू शेख निसार के परिजनों का आरोप है कि 10 दिसंबर, 2019 को पुलिस उन्हें वडोदरा के फतेहागंज पुलिस थाने लेकर गई थी, जहां उन्हें मार डाला गया. ऐसी आशंका है कि इसके बाद निसार का शव नर्मदा नदी में फेंक दिया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 7:57 AM IST
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अहमदाबाद. गुजरात (Gujarat) के सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड (SSNNL) ने क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के आग्रह पर नर्मदा की मुख्‍य नहर (Narmada Canal) को खाली करना शुरू कर दिया है. ऐसी आशंका है कि तेलंगाना के रहने वाले 65 साल के बाबू शेख निसार का शव इसमें पुलिस हिरासत में मौत होने के बाद फेंका गया था. आरोप है कि 10 दिसंबर, 2019 को वडोदरा के फतेहगंज पुलिस स्टेशन में हिरासत में उनकी मौत हुई थी.

नर्मदा नहर को खाली कराए जाने के कारण वडोदरा शहर के दो क्षेत्रों में रहने वाले लगभग पांच लाख लोगों को मंगलवार से 24 घंटे बिना पानी के रहना होगा. खानपुर से ताजे पानी की बिना आपूर्ति के नहर को खाली कर दिया जाएगा. वडोदरा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज (VFES) विभाग CID के अनुरोध के बाद शव की खोज के लिए तैयारी किए हुए है. मामले में 11 सितंबर को वडोदरा की स्थानीय अदालत द्वारा आरोपी 6 पुलिसकर्मियों की छह महीने की रिमांड बढ़ाने के लिए CID की याचिका खारिज चुकी है. ये सभी फतेहगंज पुलिस स्‍टेशन में थे.

इनमें इंस्पेक्टर डीबी गोहिल, सब-इंस्पेक्टर डीएम रबारी और लोक रक्षक दल के जवान पंकज मावजीभाई, योगेंद्र जीलसिंह, राजेश सविजीभाई और हितेश शंभुभाई शामिल हैं. उन्होंने 2 सितंबर को आत्मसमर्पण करने के बाद जांच में सहयोग करने से इनकार कर दिया था.



अधिकारियों ने कहा कि उस समय आरोपियों के मोबाइल लोकेशन के आधार पर सीआईडी ने वडोदरा में गोरवा क्षेत्र के पास नहर का चिह्नित किया था, आरोपी निसार के शव करे संभवत: फेंक सकते हैं. सीआईडी का मानना ​​है कि आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए कई वाहनों का इस्तेमाल किया था, जिनमें से एक हेड कांस्टेबल महेश राठवा की हैचबैक कार थी, जो मामले का आरोपी नहीं है.

निसार के बेटे ने वडोदरा के पुलिस कमिश्‍नर को एक पत्र सौंपा था, जिसमें शहर से उसके पिता के लापता होने के संबंध में कुछ आरोप लगाए गए थे. इसके बाद जांच शुरू की गई थी, जिससे कोई निष्कर्ष नहीं निकला. 20 जून को परिवार ने गुजरात हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की. 25 जून को दोनों जांचों को एक साथ मिलाकर वडोदरा ई डिवीजन को सौंप दिया गया. 6 अगस्त को गुजरात हाईकोर्ट ने सीआईडी को मामला ट्रांसफर कर जांच के निर्देश दिए थे.
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