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वाराणसी: दिखने लगा गंगा का रौद्र रूप, महाशमशान पर अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ रहा इंतजार

वाराणसी: दिखने लगा गंगा का रौद्र रूप, महाशमशान पर अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ रहा इंतजार

शुरुआत के दिनों में ही पानी लगभग 3 से 4 फीट ऊपर आ चुका है. जिसके कारण शवों के अंतिम संस्कार के लिए बने तीन प्लेटफार्म में से एक पूरी तरह से गंगा के पानी में समाहित हो चुका है और पानी का बढ़ाव जारी है.

शुरुआत के दिनों में ही पानी लगभग 3 से 4 फीट ऊपर आ चुका है. जिसके कारण शवों के अंतिम संस्कार के लिए बने तीन प्लेटफार्म में से एक पूरी तरह से गंगा के पानी में समाहित हो चुका है और पानी का बढ़ाव जारी है.

शुरुआत के दिनों में ही पानी लगभग 3 से 4 फीट ऊपर आ चुका है. जिसके कारण शवों के अंतिम संस्कार के लिए बने तीन प्लेटफार्म में से एक पूरी तरह से गंगा के पानी में समाहित हो चुका है और पानी का बढ़ाव जारी है.

    वाराणसी. मानसून (Monsoon) की शुरुआत के साथ ही धर्मनगरी वाराणसी (Varanasi) में गंगा (River Ganga) का रौद्र रूप दिखने लगा है. मानसून के पहले स्पेल में हुई बारिश में ही वाराणसी से बाढ़ की तस्वीरें सामने आ रही हैं. प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर शवों को जलाने वाला पहला प्लेटफार्म पानी में डूब गया है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे लोगों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. आलम यह है कि शुरुआत के दिनों में ही पानी लगभग 3 से 4 फीट ऊपर आ चुका है. जिसके कारण शवों के अंतिम संस्कार के लिए बने तीन प्लेटफार्म में से एक पूरी तरह से गंगा के पानी में समाहित हो चुका है और पानी का बढ़ाव जारी है.

    जुलाई में और बढ़ेगा जलस्तर

    अभी से ही स्थिति ये है कि शवों के लिए चिता का इंतजार लंबा होता जा रहा है. लोगों को अंतिम संस्कार के लिए आधे से एक घंटे का इन्तजार करना पड़ रहा है. गंगा के जलस्तर में बढ़ाव जुलाई में और बढ़ेगा. जिसके बाद शव छत पर जलाए जाएंगे. ऐसी स्थिति में एक बार में सिर्फ 10 शवों को ही जलाया जा सकता है. ऐसे में उस वक्त 3 से चार घंटे का इंतजार करना पड़ता है.

    घाट पर रहने वाले सुनील का कहना है कि मानसून के पहले सीजन में ही ऐसी तस्वीर पहले नजर नही आई थी. जिस हिसाब से गंगा का पानी का बढ़ाव है उससे ये लग रहा है कि इस बार मुश्किलें ज्यादा होंगी.
    पहाड़ों से आने वाले पानी का असर इसी तरह जारी रहा तो कुछ ही दिन में घाटों से भी संपर्क टूट सकता है. जिसको लेकर घाट के लोगों ने अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. बढ़ाव जिस रफ्तार से है उससे ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि घाटों का संपर्क भी 4 से 5 दिनों में टूट सकता है.

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