ओरिजिनल वायरस जैसा ही संक्रमण पैदा कर रहा नया वैरिएंट, वैक्सीन कारगर : केंद्र

सरकार का कहना है कि नए वैरिएंट पर वैक्सीन कारगर है. (फाइल फोटो)

सरकार का कहना है कि नए वैरिएंट पर वैक्सीन कारगर है. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (Principal Scientific Advisor to PM) के. विजयराघवन ने कहा कि नए वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कारगर हैं. नए वैरिएंट्स भारत और दुनिया के अन्य देशों में आते रहेंगे. भविष्य में ऐसे भी वैरिएंट्स आ सकते हैं जो संक्रमण को गंभीर बना दें. या इम्यून सिस्टम को चकमा दे दें. देश और दुनिया के वैज्ञानिक ऐसे वैरिएंट्स के मद्देनजर काम कर रहे हैं.

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (Principal Scientific Advisor to PM) के. विजयराघवन ने कहा है कि नया स्ट्रेन भी ओरिजिनल वायरस की तरह ही संक्रमण पैदा कर रहा है. इसमें संक्रमण की नई तरह की क्षमता नहीं है. उन्होंने कहा कि नए वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कारगर हैं. इसके बाद भी नए वैरिएंट्स भारत और दुनिया के अन्य देशों में आते रहेंगे. भविष्य में ऐसे भी वैरिएंट्स आ सकते हैं जो संक्रमण को गंभीर बना दें. या इम्यून सिस्टम को चकमा दे दें. देश और दुनिया के वैज्ञानिक ऐसे वैरिएंट्स के मद्देनजर काम कर रहे हैं जिससे पहले ही चेतावनी दी जा सके. ये एक गहन रिसर्च कार्यक्रम है जो भारत और दुनिया के अन्य देशों में चल रहा है.

उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर भी आ सकती है. उनका कहना है कि जिस तरीके से अभी वायरस का प्रसार हुआ है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि तीसरी लहर जरूर आएगी. उसके लिए हमें अभी से तैयारी रखनी होगी.

नए वैरिएंट्स की संक्रामक क्षमता पर होती रही है चर्चा

गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर में नए वैरिएंट्स के ज्यादा संक्रामक होने की बातें सामने आती रही हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स ने अब तक यही कहा है कि इस पर ज्यादा रिसर्च नहीं हुई है. साथ ही नए वैरिएंट के अधिक घातक होने की बातें भी कही गई हैं. लेकिन रिसर्च की कमी की वजह से इस पर मुहर नहीं लग पाई है.

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इससे पहले कोरोना के यूके स्ट्रेन को संक्रमण की दृष्टि से घातक माना जाता रहा है. रिसर्च में सामने आया था कि ये स्ट्रेन पुराने स्ट्रेन से करीब 70 गुना अधिक संक्रामक है. इसकी पुष्टि मरीजों से पटे पड़े ब्रिटेन के अस्पतालों से भी हुई थी. जब अप्रैल की शुरुआत में भारत में कोरोना का बेहद तेज प्रसार हुआ तो कहा जा रहा था कि ये नए स्ट्रेन का प्रभाव हो सकता है.

RT-PCR टेस्ट पर भी उठे हैं सवाल



डबल म्यूटेंट वायरस की चर्चा लगातार होती रही. इसके संदर्भ में यह भी कहा गया कि ये RT-PCR टेस्ट में नहीं पकड़ आ रहा. इसके लिए सीटी स्कैन की आवश्यकता पड़ रही है. डायग्नोस्टिक लैब चेन थायरोकेयर के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर ए. वेलुमनी (A. Velumani) ने इंडिया स्पेंड को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि RT-PCR पूरी तरह भरोसेमंद हैं. केवल 0.5 प्रतिशत एरर यानी गलती की गुंजाइश होती है और यह किसी भी लैब टेस्ट के साथ हो सकता है. RT-PCR की गलत रिपोर्ट्स पर उनका कहना है कि इस टेस्ट की तकनीक बेहद मजबूत है लेकिन स्वैब कलेक्शन की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो सकती है. अगर स्वैब कलेक्शन गड़बड़ होगा तो नतीजे भी गलत आ सकते हैं. एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने भी सीटी स्कैन से बचने की सलाह दी है.

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