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वसुंधरा राजे ने पार्टी में विरोधियों को दरकिनार कर फिर किया शक्ति प्रदर्शन

Bhawani Singh | News18India.com
Updated: December 10, 2016, 10:34 PM IST
वसुंधरा राजे ने पार्टी में विरोधियों को दरकिनार कर फिर किया शक्ति प्रदर्शन
तस्वीर: GETTY IMAGES

राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने मंत्रिमंडल के दूसरे फेरबदल में भी पार्टी में विरोधियों को फिर दरकिनार कर दिया। मंत्रिमंडल के पुर्नगठन में अकेले राजे की ही चली। उन्होंने अपनी पसंद के विधायकों को ही मंत्रिपरिषद में जगह दी। 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव में वापसी के लिए क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को भी साधा, लेकिन इस रणनीति में भी भरोसा केवल अपनों पर भी जताया।

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नई दिल्ली। राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने मंत्रिमंडल के दूसरे फेरबदल में भी पार्टी में विरोधियों को फिर दरकिनार कर दिया। मंत्रिमंडल के पुर्नगठन में अकेले राजे की ही चली। उन्होंने अपनी पसंद के विधायकों को ही मंत्रिपरिषद में जगह दी। 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव में वापसी के लिए क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को भी साधा, लेकिन इस रणनीति में भी भरोसा केवल अपनों पर भी जताया।

राजे ने धुर विरोधी घनश्याम तिवाड़ी को फिर मंत्रिमडंल से बाहर रखा। इसी तरह पूर्व उपराष्ट्रपति भैंरोसिंह शेखावत के दामाद नरपत सिंह राजवी पर विरोधी खेमे के नेता के ठप्पे के चलते फिर मंत्रिमंडल में मौका नहीं मिला। वहीं, पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह पार्टी हाईकमान की पंसद के बावजूद राजे कैबिनेट की विस्तार में जगह नहीं बना पाए।

राजे ने दो मंत्रियों की छुट्टी कर और पसंद के छह मंत्री व पांच ससदीय सचिवों को जगह देकर शक्ति प्रदर्शन कर पार्टी में विरोधियों को फिर चौंकाया दिया है। राजे का फोकस 2018 के विधासनभा चुनाव में वापसी है। मेवा़ड़ के अलावा खासकर आदिवासी क्षेत्र डूंगरपुर और बांसवाड़ा मे बीजेपी की पकड़ मजबूत करने के लिए इस इलाके के विधायकों को जगह दी गई। इसी तरह मारवा़ड़ में दलित और किसानों में पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए विस्तार में इस सियासी और जातीय समीकरण को तरजीह दी।

पूर्वी राजस्थान में मीणा समुदाय में किरोड़ीलाल मीणा के प्रभाव से निपटने के लिए ओम प्रकाश हुड़ला को संसदीय सचिव बनया। हालांकि, एसबीसी का आरक्षण रद्द होने के बाद वसुंधरा के सामने इस इलाके में गुर्जर समुदाय को संतुष्ट करना भी चुन्नौती था, लेकिन इसे नजरअंदाज किया। राजे ने संभागवार समस्याएं सुनने के लिए दौरे कर अपनी सरकार का फीड बैक लिया।

स्थानीय विधायकों और इलाके से आने वाले मंत्रियों का भी फीडबैक लिया। मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में इस फीडबैक का भी ध्यान रखा और दो मंत्रियों की परफॉरमेंस के आधार पर छुट्टी कर दी। राजे ने पुराने मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया। चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ से स्वास्थ्य महकमा छीनकर पंचायत राज मंत्री बना दिया तो उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ को स्वास्थ्य मंत्रालय सौंपा।

करीबी मंत्री राजपाल शेखावत से शहरी विकास का भारी भरकम मंत्रालय लिया, लेकिन पिर वजनी उद्योग मंत्रालय का जिम्मा सौंपा। इस पूरी कवायद के दो मकसद हो सकते हैं, एक सरकार की छवि सुधारना, दूसरा विरोधियों को संदेश देना की वे राजस्थान में बीजेपी की मजबूत और इकलौती नेता हैं। बीजेपी संगठन में राजे के करीबी अशोक परनामी अध्यक्ष हैं। परनामी को सरकार में शामिल करने की चर्चा थी, लेकिन राजे सत्ता के साथ संगठन की चाबी अपने हाथ में रखने के लिए परनामी को पार्टी से हटाकर सरकार में नहीं लाईं। संदेश साफ है कि राजस्थान में सरकार ही नहीं पार्टी की भी बॉस राजे ही हैं।

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First published: December 10, 2016, 9:17 PM IST
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