भारत में कम ही आते हैं चक्रवात 'वायु' जैसे तूफ़ान, गुजरात समेत कई राज्यों में हाई अलर्ट

गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ के तटीय इलाकों से 1.60 लाख लोगों को एहतियात के तौर पर हटा लिया गया है. इन इलाकों में NDRF की टीमें तैनात कर दी गई हैं.

News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 8:06 PM IST
भारत में कम ही आते हैं चक्रवात 'वायु' जैसे तूफ़ान, गुजरात समेत कई राज्यों में हाई अलर्ट
चक्रवात वायु के कुछ घंटों में गुजरात के तटीय इलाकों से टकराने की संभावना है (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: June 12, 2019, 8:06 PM IST
चक्रवात 'वायु' को आने में कुछ देरी हो सकती है. विशेषज्ञों ने इसकी जानकारी दी है. IMD के ताजा अलर्ट के मुताबिक, चक्रवाती तूफान वायु इस वक्त गुजरात की ओर बढ़ रहा है और 12-13 जून को इसके सौराष्ट्र के इलाके से टकराने की संभावना है. अरब सागर में डिप्रेशन की स्थिति अगले कुछ घंटों में साइक्लोन (चक्रवाती तूफान) की शक्ल ले सकता है. इसके चलते 135 किमी/घंटे से हवाएं चलने के साथ भारी बारिश भी हो सकती है.

हालांकि पिछले महीने ओडिशा में आए चक्रवाती तूफान 'फानी' के मुकाबले 'वायु' चक्रवात के दौरान चलने वाली हवाओं की गति आधी होगी. इस दौरान 110 से 135 किमी प्रति घंटा तक की हवाएं चल सकती हैं. जबकि फानी के दौरान हवाओं की औसत गति 220किमी/घंटा थी. लेकिन 'वायु' के बारे में बाकी बातें जानने से पहले जान लेते हैं कि चक्रवात आते क्यों हैं?



क्यों आते हैं चक्रवात?
गर्म इलाकों में सूर्य की गर्मी के चलते हवाएं गर्म होकर वायुमंडल में ऊपर की ओर चली जाती हैं. जिससे कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है. वहीं समुद्र में लगातार वाष्पीकरण के चलते नमी वाली हवाएं बनी रहती हैं. जो ठंडी होने पर कम दबाव के क्षेत्र को भरने के लिए तेज गति से आती हैं. इस प्रक्रिया में वे तेजी से गोल-गोल घूमने भी लगती हैं. इसी प्रक्रिया के चलते चक्रवात बन जाते हैं. इनके जमीनी इलाकों में आने के दौरान तेज बिजली कड़कती है और मूसलाधार बारिश होती है. कभी-कभी तो इन तेज घूमती हवाओं का व्यास हजारों किमी होता है.

भारत में आने वाले चक्रवातों को साइक्लोन कहा जाता है (सांकेतिक तस्वीर)


क्या है चक्रवात और हरिकेन में अंतर?
उत्तरी गोलार्द्ध में चक्रवात की हवाएं घड़ी की सुईयों की उल्टी दिशा में और दक्षिणी ध्रुव में हवाएं घड़ी की सुईयों की दिशा में घूमती हैं. उत्तरी गोलार्द्ध के चक्रवातों को हरिकेन और दक्षिणी गोलार्द्ध के चक्रवातों को साइक्लोन कहते हैं. इसके अलावा प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में आने वाले चक्रवातों को टाइफून कहते हैं. भारत में चक्रवातों से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले राज्य ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा हैं.
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अरब सागर में पैदा हुआ चक्रवात है 'वायु'
'वायु' अरब सागर में आने वाला चक्रवात है. भारत में जितने चक्रवात आते हैं, उनमें से बहुत कम ही अरब सागर में पैदा होते हैं. भारत में आने वाले ज्यादातर चक्रवात बंगाल की खाड़ी में पैदा होते हैं. पिछले 120 सालों के उपलब्ध रिकार्ड्स के मुताबिक कुल चक्रवातों के मात्र 14% ही अरब सागर में पैदा हुए हैं. इसके अलावा बंगाल की खाड़ी के चक्रवातों के मुकाबले अरब सागर के चक्रवात कमजोर होते हैं. हिंद महासागर क्षेत्र में आने वाले 8 देश मिलकर इस इलाके में आने चक्रवातों के नाम रखते हैं. ऐसे में 'वायु' चक्रवात का नाम भारत का ही रखा हुआ है.

मानसून पर बुरा असर डाल सकता है चक्रवात 'वायु'
वायु को लेकर मौसम विभाग ने यह चिंता भी जताई है कि 'वायु' के चलते मानसून पर भी असर पड़ सकता है. दरअसल करीब-करीब मध्य भारत तक पहुंच चुके मानसून का अगर 80 से 90 किमी/घंटे की गति से चल रही हवाओं से संपर्क हुआ तो यह चक्रवात, मानसूनी हवाओं को उड़ाकर ले जा सकता है. इससे मानसून उत्तर भारत में नहीं पहुंच पाएगा. अगर ऐसा होगा तो न सिर्फ इस इलाके के किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा बल्कि उत्तर भारत में सूखे की स्थिति पैदा हो जाएगी.

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गुजरात के इन इलाकों को करेगा प्रभावित
IMD के मुताबिक 'वायु' तूफान के चलते अहमदाबाद, गांधीनगर और राजकोट समेत तटवर्ती इलाके वेरावल, भुज और सूरत में हल्की बारिश होने की संभावना है. फिलहाल चक्रवता 'वेरावल' से 280किमी दक्षिण में है. इसके अलावा सौराष्ट्र के भावनगर, अमरेली, सोमनाथ, वेरावल, जामनगर, पोरबंदर और कच्छ के इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है.

गुजरात के तटीय इलाकों से 1.60 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है (सांकेतिक फोटो)


वायु को लेकर इस तरह के सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं
वायु के खतरे को देखते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक की है. इसके अलावा पूरे प्रशासन को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है. इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने खुद सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी ली थी. गुजरात के अलावा दमन-दीव और महाराष्ट्र के भी कुछ हिस्सों के 'वायु' चक्रवात से प्रभावित होने की संभावना है.

जहां स्थानीयों को समुद्र की ओर न जाने की सलाह दी गई है, वहीं तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों को समुद्र में न जाने को कहा गया है. इसके अलावा गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ के तटीय इलाकों से 1.60 लाख लोगों को एहतियातन हटा लिया गया है. इन इलाकों में NDRF की टीमें तैनात कर दी गई हैं.

कई जिलों में स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है. इसके अलावा द्वारका, सोमनाथ, सासन और कच्छ आये पर्यटकों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. इन इलाकों में फ्लाइट्स का आवागमन भी बंद कर दिया गया है.

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