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    पूर्व सैनिकों, पुलिस अधिकारियों और IAS ने गुपकार गठबंधन को बताया राष्ट्र विरोधी

    गुपकर गठबंधन को राष्ट्रविरोधी बताया गया है. (File Photo)
    गुपकर गठबंधन को राष्ट्रविरोधी बताया गया है. (File Photo)

    Gupkar Alliance: बयान में कहा गया है, "अपने उत्तेजक बयानों के जरिए, उन्होंने कश्मीर के लोगों को को सार्वजनिक आदेश से असहमति के कारण गड़बड़ी पैदा करने के लिए उकसाया है."

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 5, 2020, 6:14 PM IST
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    नई दिल्ली. भारतीय सेना (Indian Army), वायु सेना (Air Force) और नौसेना (Navy) के सेवानिवृत्त अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित सेवानिवृत्त सिविल सेवकों के एक समूह ने हाल ही में गठित गुपकार एलायंस (Gupkar Alliance), विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर (Jammu Kashmir) की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Former CM Mehbooba Mufti) की आलोचना की है. इस संबंध में पूर्व अधिकारियों ने एक बयान जारी किया है. इस बयान पर 250 से ज्यादा अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए हैं.

    बयान में कहा गया है कि - 'हम सेवानिवृत्त अखिल भारतीय सिविल सेवा और पुलिस अधिकारियों, सेना, वायु सेना और नौसेना के दिग्गजों, शिक्षाविदों, पेशेवरों और अन्य लोगों के भारत के चिंतित नागरिकों का एक समूह हैं; जो बिना किसी राजनीतिक या पक्षपातपूर्ण एजेंडे के साथ हैं. हमारा समूह उस तरीके से काफी परेशान है जिसमें कुछ लोग निहित स्वार्थों के चलते लगातार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने, हमारे देश और उसके संविधान के बारे में गलत बात कहने और अलगाववाद को बढ़ावा देने की कोशिश करने की कोशिश कर रहे हैं. और ऐसा करते समय, वे उन देशों की भाषा बोलते हैं जो भारत से शत्रुता रखते हैं; और वह उनसे सहयोग लेने में संकोच नहीं करेंगे.'

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    महबूबा और अब्दुल्ला के बयानों का दिया हवाला
    बयान में आगे कहा गया- 'जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रवादी और कानूनी स्वामित्व की सभी सीमाओं को पार कर लिया है और निश्चित रूप से अवमानना ​​की घोषणा करके खुद को अभियोजन पक्ष के लिए उत्तरदायी बनाया है कि जब तक कि कश्मीर का झंडा नहीं होगा वह कश्मीर में भारत का राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराएंगी.' 23 अक्टूबर को मुफ्ती के बयान का जिक्र करते हुए कहा गया कि जब तक कि पिछले साल 5 अगस्त को लागू किए गए संवैधानिक बदलाव वापस नहीं किए गए वह चुनाव लड़ने या तिरंगा, राष्ट्रीय ध्वज धारण करने में दिलचस्पी नहीं दिखाएंगी.

    सेवानिवृत्त दिग्गजों और अन्य सिविल सेवकों के समूह ने इसे "राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रत्यक्ष अपमान" बताया है.

    बयान में कहा गया है, "अपने उत्तेजक बयानों के जरिए, उन्होंने कश्मीर के लोगों को सार्वजनिक आदेश से असहमति के कारण गड़बड़ी पैदा करने के लिए उकसाया है."

    देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग
    इस समूह ने गठबंधन के एक अन्य सदस्य पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की भी आलोचना की है. बयान में अब्दुल्ला के बयान का हवाला देते हुए कहा गया कि उन्होंने कहा कि- अनुच्छेद 370 को चीन की मदद से बहाल किया जाएगा. इस बयान के चलते उन्हें और मुफ्ती को जम्मू और कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 1978 के तहत हिरासत में लिए जाने की जरूरत है.

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    इसके अलावा, समूह ने आईपीसी की धारा 124 ए के तहत देशद्रोह का मामला दर्ज करने की भी मांग की है.

    बयान में कहा गया है, "गुपकार गैंग भारतीय लोकतंत्र पर एक धब्बा है. यह आश्चर्यजनक नहीं है कि पाकिस्तान के राजनीतिक नेताओं ने बयान जारी कर उनका समर्थन किया है. इससे वह उनके वास्तविक गैर राष्ट्र प्रेमी रंगों में दिखाई पड़ते हैं."

    जम्मू और कश्मीर में कई मुख्यधारा की पार्टियों, जिनमें अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू और कश्मीर का नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने अनुच्छेद 370 की बहाली और 15 अक्टूबर को कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए गठबंधन की घोषणा की है.

    अब्दुल्ला ने कहा था, "हमने गुपकार घोषणा के लिए इस गठबंधन का नाम पीपुल्स अलायंस रखा है. हमारी लड़ाई एक संवैधानिक लड़ाई है. हम चाहते हैं कि भारत की सरकार 5 अगस्त 2019 से पहले राज्य के लोगों के अधिकारों को वापस करे."
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