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भारतीय परंपराओं को नई शिक्षा नीति का हिस्सा बनाना जरूरी: वेंकैया नायडू

भाषा
Updated: October 20, 2019, 4:56 PM IST
भारतीय परंपराओं को नई शिक्षा नीति का हिस्सा बनाना जरूरी: वेंकैया नायडू
उपराष्ट्रपति ने नई शिक्षा नीति में इतिहास और विरासत से जुड़ी घटनाओं को शामिल किए जाने की बात कही है (फाइल फोटो)

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू (Vice President Venkaiah Naidu) ने देश और युवा पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए भारतीय परंपराओं, संस्कृति, विरासत और इतिहास (History) से जुड़े सभी पहलुओं को नयी शिक्षा नीति (New Education Policy) में शामिल किए जाने की बात कही है.

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नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू (Vice President Venkaiah Naidu) ने बुजुर्गों के प्रति बुरे बर्ताव को सामाजिक बुराई बताते हुए कहा है कि युवा पीढ़ी को इस बुराई से दूर रख कर देश के उज्जवल भविष्य के लिये भारतीय सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और इनके इतिहास (History) को नई शिक्षा नीति (New Education Policy) का हिस्सा बनाना जरूरी है.

नायडू ने रविवार को ‘वरिष्ठ नागरिक सम्मान’ समारोह में कानूनविद के. पारासरन को सबसे विख्यात वरिष्ठ नागरिक सम्मान से नवाजते हुए कहा, 'भारतीय सभ्यता (Indian Culture) में अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान का जो भाव हमें सिखाया जाता है, उन मूल्यों पर हमें गर्व है, जिसके कारण ही समाज में वरिष्ठ जनों (Senior Citizens) को आदर के साथ शीर्ष स्थान पर प्रतिष्ठित किया जाता है.'

माता-पिता को उनके हाल पर छोड़ने की नई पीढ़ी में बढ़ती प्रवृत्ति पर जताई चिंता
उपराष्ट्रपति ने कहा कि बुजुर्ग, परिवार की प्रतिष्ठा, परंपराओं और औचित्यपूर्ण मूल्यों के संरक्षक होते हैं. मौजूदा दौर में यह कड़ी टूट गयी है जिसे इस पीढ़ी में जोड़ने की जरूत है. उपराष्ट्रपति (Vice President) ने माता-पिता को अकेले उन्हीं के हाल पर छोड़ने की नई पीढ़ी में बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बुजुर्गों के प्रति यह बर्ताव सामाजिक बुराई है और यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है.

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को अपनी संतान की उपेक्षा, भावनात्मक एवं शारीरिक शोषण (Physical Torture) का सामना करना पड़ रहा है. नायडू ने समाज, खासकर युवाओं की इस सोच में बदलाव की जरूरत पर बल देते हुये कहा कि बच्चों को अपने परिवार के बुजुर्गों की देखभाल अपना अनिवार्य उत्तरदायित्व समझकर करनी चाहिये.

92 साल की उम्र में भी पारासरन की सक्रियता को सराहा
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा, ‘‘भारतीय परंपराओं, संस्कृति, विरासत और इतिहास से जुड़े सभी पहलुओं को नयी शिक्षा नीति (New Education Policy) में शामिल किए जाने की जरूरत है जिससे देश और युवा पीढ़ी को बेहतर भविष्य प्रदान किया जा सके.’’
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‘वरिष्ठ जन दिवस’ के अवसर पर पारासरन (Parasaran) को सम्मानित करने की सराहना करते हुये नायडू ने कहा कि 92 साल की उम्र में भी वरिष्ठ कानूनविद पारासरन की आज भी सक्रियता उन्हें ‘इंडियन बार का पितामह’ कहे जाने का वास्तविक हकदार बनाती है.

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First published: October 20, 2019, 4:31 PM IST
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