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Vijay Diwas 2020: जब फील्ड मार्शल मानेकशॉ ने पाकिस्तान से कहा था- 'सरेंडर करो नहीं तो नेस्तनाबूत कर देंगे'

तस्वीर- भारतीय सेना
तस्वीर- भारतीय सेना

Vijay diwas 2020: फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ (Field Marshal Manekshaw) ने साल 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के सरेंडर से पहले सख्त संदेश दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 16, 2020, 12:03 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय सेना (Indian Army) के अतिरिक्त सूचना महानिदेशालय (ADGPI) ने बुधवार को फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ (sam manekshaw) की एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें  साल 1971 के युद्ध के दौरान सेना के साथी अधिकारियों के साथ वह दिख रहे हैं. यह तस्वीर भारत द्वारा पाकिस्तान पर जीत की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर की गई.

फोटो शेयर करते हुए कैप्शन लिखा गया था, 'आप सरेंडर करें या हम आपको नेस्तनाबूत कर देंगे.' यह 13 दिसंबर 1971 को फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ द्वारा पाकिस्तान को दिया गया संदेश था. पोस्ट में लिखा गया - 'फील्ड मार्शल ने अपने शब्दों को जिया क्योंकि दुनिया ने 93,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों के अभूतपूर्व आत्मसमर्पण को देखा.'

साल 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत के अवसर पर देश इस बार 'स्वर्णिम विजय वर्ष' मना रहा है. पीएम नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्रालय के कई अधिकारियों के साथ नई दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की और इस आयोजन की 50वीं वर्षगांठ के समारोह में हिस्सा लिया.





क्यों हुआ था साल 1971 का युद्ध?
बता दें कि साल 1971 की लड़ाई पाकिस्तान की सेना और बांग्लादेश की मुक्तिबाहिनी की सहयोगी सेना और फील्ड मार्शल जनरल सैम मानेकशॉ के नेतृत्व वाली भारतीय सेना के बीच लड़ी गई थी. पाकिस्तान सरकार ने साल 1970 के चुनावों में अवामी लीग की जीत को मान्यता नहीं दी. जिसके बाद अवामी लीग के नेता शेख मुजीबुर रहमान ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया. पाकिस्तान को डर था कि पूर्वी पाकिस्तान और स्वायत्ता की मांग करेगा जिसके बाद रहमान को गिरफ्तार कर उन्हें राजद्रोह के आरोप में लाहौर में कैद कर लिया गया.

रहमान को गिरफ्तार करने के बाद, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री याह्या खान ने जनरल टिक्का खान को विद्रोह को रोकने के लिए ढाका भेजा. मार्च 1971 में, जनरल टिक्का खान ने बांग्लादेश के राजनीतिक नेताओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों पर हमला बोल दिया. जानकारों के अनुसार, टिक्का खान की कार्रवाई युद्ध अपराध से कम नहीं थी.

भारत कैसे बना युद्ध का हिस्सा?
भारत इस युद्ध में तब घसीट लिया गया जब 3 दिसंबर को पाकिस्तान की वायु सेना ने अमृतसर, अंबाला, आगरा, अवंतिपुर, बीकानेर, हलवारा, जोधपुर, जैसलमेर, पठानकोट, भुज, श्रीनगर और उत्तरलाई में भारत के हवाई ठिकानों पर हमला किया. भारतीय वायु सेना ने जल्द ही हमलों का जवाब दिया और पूर्वी पाकिस्तान का रुख किया.

14 दिसंबर तक यह स्पष्ट हो गया था कि पाकिस्तान की सेना कमजोर हो गई और फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ ने बिना शर्त आत्मसमर्पण करने के लिए उनके कमांडर नियाजी से कहा. साल 1971 में आज ही के दिन यानी 16 दिसंबर को 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया और इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा आत्मसमर्पण बताया गया.
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