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Indo-Pak War 1971: जब पाक को पता चल गया बांग्लादेश में पैरा कमांडो उतरने वाले हैं, फिर यह बनाया नया प्लान

गले में मफलर डाले और लंबे से दिख रहे अफसर ही कर्नल रिटायर्ड एसएम कुंजरू हैं.
गले में मफलर डाले और लंबे से दिख रहे अफसर ही कर्नल रिटायर्ड एसएम कुंजरू हैं.

Indo-Pak War 1971: 90 मिनट तक आसमान में टंगे रहने के बाद पैरा  कमांडो (Para Commando) दुश्मन के एरिया में 60 किमी अंदर जाकर पैराशूट की मदद से उतरे थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 20, 2020, 9:42 AM IST
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नई दिल्ली. तीन तरफ से बांग्लादेश (Bangladesh) की राजधानी ढाका को घेरने के बाद भी सन 1971 की लड़ाई अंजाम तक नहीं पहुंच पाई थी. उसके लिए जरूरी था कि पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) को शिकस्त देने के लिए ज़रूरी था कि ईस्टर्न साइड से भी ढाका (Dhaka) में घुसा जाए. लेकिन यहां एक नदी थी और उसे पार करने के लिए एक पुल पर कब्जा होना ज़रूरी थी, जहां भारतीय सेना (Indian Army) पहुंच नहीं पा रही थी. इसी ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए 2 पैरा बटालियन ग्रुप को चुना गया था. इस ग्रुप में कैप्टन की हैसियत से शामिल होने वाले कर्नल रिटायर्ड एसएम कुंजरू ने न्यूज18 हिंदी को बताया कैसे कमांडो ढाका के अंदर दाखिल हुए थे.

“वेस्ट बंगाल में नक्सली बहुत सिर उठा रहे थे. फरवरी, 1971 में 2 पैरा बटालियन ग्रुप को बंगाल भेजा गया था. यही वजह है कि जब 1971 के भारत-पाक युद्ध में बांग्लादेश में अंदर घुसने की जरूरत पड़ी तो आला अफसरों को याद आया कि पास में ही 2 पैरा बटालियन है.

हमे हुक्म मिला कि बांग्लादेश में जाकर एक ऑपरेशन को अंजाम देना है. हमारी बटालियन ग्रुप में करीब 600 लोग थे. सभी को कोलकाता के बोटेनिकल गार्डन में जमा होने का हुक्म था. यहां हम सभी ने ऑपरेशन की तैयार की. लेकिन अभी तक यह नहीं पता था कि ऑपरेशन क्या है.



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11 दिसम्बर को हमे दो ग्रुप में बांटकर कलाई कोंडा और दमदम एयरपोर्ट पर ले जाया गया. दोपहर में हम यहां पहुंच चुके थे. इसी दौरान हमे पता चला कि रात 8 बजे हमे बांग्लादेश के अंदर उतरना है. कुछ देर बाद ही खबर आई कि हमारी मूवमेंट की जानकारी पाकिस्तान को हो चुकी है. लेकिन ऑपरेशन बहुत जरूरी था. इसलिए अफसरों ने फैसला किया कि हम अब रात 8 बजे नहीं शाम 4 बजे जाएंगे. इसके बाद हम एएन-12, सी-119, सी-47 और कैरीबू हवाई जहाज में सवार होकर बांग्लादेश के लिए चल दिए. हमारे हवाई जहाजों के साथ-साथ कुछ दूरी पर फाइटर एयर क्राफ्ट भी चल रहे थे.

अगर सामने से पाकिस्तानी एयर फोर्स आ जाए तो उसे जवाब देने के लिए. क्योंकि दुश्मन को हमारी खबर हो चुकी थी, इसलिए हमे सीधे उस जगह पर नहीं उतारा गया जहां हमे जाना था. 90 मिनट तक हम आसमान में घूमते रहे. इसके बाद हमे टंगेल में जम्प कराई गई. नीचे पहुंचते ही हमने पोंगली पुल पर कब्जा कर लिया. थोड़ी देर में पाक आर्मी भी आ गई. देर रात तक उससे मुकाबला चला. आखिरकार हमने पाक आर्मी को रोक दिया. बाद में भारतीय सेना की दूसरी बटालियन हमसे आ मिलीं और हम उसके बाद ढाका की ओर चल पड़े.”
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